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सुखाड़ प्रभावित किसानों के मुआवजे पर सरकार की बेरुखी, अब आचार संहिता का पेंच

गुजर गये पांच महीने, किसी भी जिले के डीसी ने सुखाड़ प्रभावित किसानों की नहीं दी सूची

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18 जिले के 129 प्रखंडों के 11 लाख किसान हैं सुखाड़ प्रभावित, महीनों करना पड़ सकता है इंतजार

Ranchi : किसानों के हमदर्द होने का दावा करने वाली राज्य सरकार ने किसानों से ही मुंह फेर लिया है. किसानों की आय दोगुना करना तो दूर की कौड़ी है, उन्हें मुआवजा के भी पैसा नहीं मिल पा रहा है. पांच महीने गुजरने के बाद भी 18 जिले के 129 प्रखंडों के 11 लाख किसानों को सुखाड़ राहत की राशि नहीं मिल पायी है. अब तो आचार संहिता का भी पेंच फंस गया है. इस वजह से किसानों को मुआवजे के लिये महीनों इंतजार करना पड़ सकता है.

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18 जिलों के डीसी ने अब तक नहीं सौंपी है प्रभावित किसानों की सूची

जिन 18 जिलों के 129 प्रखंडों को सुखाड़ ग्रस्त घोषित किया गया था, उन जिलों के उपायुक्तों ने अब तक आपदा प्रबंधन विभाग को प्रभावित किसानों की सूची उपलब्ध नहीं करायी है. नियमत: डीसी की अध्यक्षता में बनी डिस्ट्रिक ड्रॉट मॉनिटिरिंग कमेटी लाभुकों को चिन्हित करती है. इसके बाद प्रभावित किसानों की सूची आपदा विभाग को सौंपती. कमेटी में डीसी के अलावा जिला कृषि पदाधिकारी, बीडीओ समेत अन्य सदस्य शामिल हैं.

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लाभूकों की सूची बिना कार्यकारिणी की बैठक नहीं हो सकती

जब तक आपदा विभाग को लाभुकों की सूची नहीं मिल जाती, तब तक आपदा प्रबंधन विभाग की कार्यकारिणी की भी बैठक नहीं हो सकती. कार्यकारिणी की बैठक में फैसला लेने में दो दिन का समय लगता है. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन के कार्यकारिणी की बैठक होती है. इसके बाद ही राशि निर्गत किये जाने का फैसला लिया जाता है.

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क्या कहते हैं आपदा विभाग के संयुक्त सचिव

आपदा विभाग के संयुक्त सचिव मनीष तिवारी के अनुसार किसी के मुआवजे की राशि नहीं काटी जायेगी. बशर्ते प्रभावित किसानों की सूची मिल जाये. सूची मिलते ही कार्यकारिणी की बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी और दो दिन के अंदर राशि निर्गत कर दी जायेगी.

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