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जेट एयरवेज: 25 साल पुरानी एयरलाइंस क्या फिर से भर पायेगी उड़ान

कंपनी के 20 हजार से ज्यादा कर्मियों का भविष्य अधर में

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New Delhi: 25 साल पुरानी निजी क्षेत्र की जेट एयरवेज कंपनी का भविष्य अधर में है. बुधवार से कंपनी ने अपनी सभी उड़ाने अस्थायी रुप से बंद कर दी है. ज्ञात हो कि जेट एयरवेज पर 26 बैंकों का 8 हजार 500 करोड़ रुपये बकाया है. इसमें कुछ विदेशी बैंक भी शामिल है.

कंपनी के पास कैश खत्म हो चुका है. बैंकों के समूह द्वारा 400 करोड़ रुपये की त्वरित ऋण सहायता उपलब्ध कराने से इनकार के बाद एयरलाइंस को अपनी सेवा बंद करनी पड़ी.

26 सालों से विमान सेवा दे रही इस कंपनी के बंद होने से 20 हजार से ज्यादा कर्मियों के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग गया है. साथ ही शेयरहोल्डर भी सकते में हैं.

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क्या है विकल्प

बड़ा सवाल ये है कि जेट एयरवेज का भविष्य अब क्या है. देश की दूसरी बड़ी विमानन कंपनी के दोबारा शुरू होने के लिए क्या रास्ते बचे हैं. इसमें पहला विकल्प है कि कंपनी में हिस्सा खरीदने वाला कोई खरीदारा मिल जाता है. या फिर कंपनी अब एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) में जाएगी, फिर वहां इस पर कार्रवाई होगी.

कर्जदाताओं को बोली प्रक्रिया से उम्मीद

आर्थिक संकट झेल रहे जेट एयरवेज के कर्जदाताओं ने हिस्सेदारी की बिक्री के लिए बोली प्रक्रिया के सफलतापूर्वक पूरी होने की उम्मीद जाहिर की है. नकदी संकट से जूझ रहे एयरलाइन के अपनी सेवाओं को निलंबित करने के बाद कर्ज देने वालों ने ये आशा प्रकट की है.

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बाजार खुलने से पहले गुरुवार तड़के ऋणदाताओं ने यह घोषणा की. बयान में कहा गया, ‘‘काफी विचार-विमर्श के बाद ऋणदाताओं ने तय किया कि जेट एयरवेज के अस्तित्व को बचाने का सबसे अच्छा तरीका संभावित निवेशकों से पक्की बोलियां प्राप्त करना है, जिन्होंने ईओआई (रुचि पत्र) जमा कराया है और जिन्हें 16 अप्रैल को बोली दस्तावेज जारी किए थे.’’

दूसरे केस में कंपनी एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) में जायेगी. अगर बोली लगाने वाली कंपनी हिस्सा नहीं खरीद पायी तो फिर जेट एयरवेज एनसीएलटी में जाएगी.

एनसीएलटी में पहले तो कंपनी से रिवाइवल प्लान मांगा जाएगा. जिसमें नाकाम होने पर कंपनी की नीलामी की प्रक्रिया शुरू होगी.

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