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JEPC : स्कूल बैग के 60 करोड़ के टेंडर में गड़बड़ी की आशंका, कम्पनी चयन में हो रही नियमों की अनदेखी

Ranchi : झारखंड शिक्षा परियोजना की ओर से राज्य के स्कूली बच्चों को निःशुल्क स्कूल बैग देने को लेकर टेंडर निकाला गया है. इस टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की बात सामने आ रही है. वहीं ऐसी आशंका जतायी जा रही है कि इस टेंडर के तहत किन्हीं कंपनी विशेष को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. शिक्षा परियोजना की ओर से 8 सितंबर को कम्पनी चयन के लिए टेंडर निकाला गया. इस टेंडर में जो शर्तें रखी गयी हैं उन शर्तों को सभी कंपनियां पूरा नहीं कर सकती है.

60 करोड़ के टेंडर में नियमों की अनदेखी

झारखंड शिक्षा परियोजना ने सरकारी स्कूल के बच्चों के बीच मुफ्त स्कूल बैग बांटने के लिए कंपनी चयन का टेंडर निकाला है. यह टेंडर लगभग 60 करोड़ रुपये का है. इस टेंडर के माध्यम से क्लास 1 से 8 तक के लगभग 40 लाख बच्चों को स्कूल बैग दिया जाना है. टेंडर के नियमों में शिक्षा परियोजना की ओर से ना तो पूरा सेंट्रल गाइडलाइन को फॉलो कर रही है ना ही स्टेट गाइडलाइन को पूरा कर रही है.

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क्या कुछ बदला

न्यूज विंग को उपलब्ध कराए गए डॉक्यूमेंट के अनुसार साल 2019 में लगभग 50 करोड़ रुपये का टेंडर जेईपीसी ने जारी किया था. उस साल टेंडर में 80 करोड़ के टर्नओवर की डिमांड की गई थी. इस बार लगभग 60 करोड़ के टेंडर के लिए मात्र 50 करोड़ के टर्नओवर की मांग की गई है. साल 2019 में पिछले 3 साल तक औसत टर्नओवर 80 करोड़ मांगा गया था जबकि इस बार 5 साल तक प्रत्येक साल 50 करोड़ का टर्नओवर मांगा जा रहा है. यह सीबीसी की गाइड लाइन का भी उल्लंघन है. इसके नियमानुसार 2 साल तक टेंडर वैल्यू का डेढ़ गुना टर्नओवर होना चाहिए.

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6 नयी शर्तें भी जोड़ी

बताते चलें कि साल 2019 की तुलना में इस साल के टेंडर में ऐसी छह नयी शर्तें जोड़ी गयी हैं जिनका कोई मतलब नहीं बनता है. इसका एक उदाहरण यह भी की कम्पनी बैग कहां बनाएगी उस यूनिट का भी निरीक्षण किया जा सकता है. इसके अतिरिक्त झारखंड शिक्षा परियोजना ने टेंडर में 15 करोड़ के सिंगल आर्डर की शर्त लगायी है यह सिंगल आर्डर पिछले 5 साल में कम से कम तीन ऑर्डर होना चाहिए. हालांकि वर्ष 2019 के टेंडर डॉक्युमेंट में टोटल बैग के 10 फ़ीसदी का सप्लायर होना शर्त था.

अब तक एक भी कम्पनी ने नहीं दिखाया इंटरेस्ट

बताते चलें कि शिक्षा परियोजना की ओर से 8 सितंबर को टेंडर की घोषणा करने के बाद 2 अक्टूबर तक आवेदन देने की बात कही थी पर इस डेट तक एक भी एप्लिकेशन नहीं आया. इसके बाद अब शिक्षा परियोजना ने टेंडर की डेट को 20 अक्टूबर तक कर दिया है. वहीं जानकारी यह भी मिली है कि टेंडर की शर्तों को देखने के बाद देश की कई बड़ी कंपनियों ने शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर शिकायत भी की है.

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