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भ्रष्टाचार को लेकर बदनाम JBVNL के अधिकारी पद बचाने व प्रमोशन के लिए सत्ता से समीकरण बनाने में जुटे

Ranchi: राज्य में नयी सरकार बनने के बाद कुछ विभागों और निगमों में काफी हलचल है. कुछ ऐसी ही खबरें झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) से आ रही हैं.

जेबीवीएनएल के वरीय अधिकारियों में खौफ का माहौल कुछ ऐसा है कि ये सत्ताधारी दल के गलियारे में चहल कदमी करते नजर आ रहे है.

सरकार से बेहतर संबध बनाने के जुगाड़ में अपने पद और पद पर रहते हुए की गयी अनियमितता को पर्दा डालने की भी चर्चा विभाग में आम होती जा रही है.

इसमें शीर्ष अधिकारियों के नाम प्रमुख हैं जो पिछले कुछ सालों में कई घोटालों और गड़बड़ियों में शामिल रहे.

विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली है कि कुछ पदाधिकारी अपने पद बचाने और कुछ पदोन्नति के कारण सरकार के चक्कर काट रहे हैं.

पिछले कुछ सालों में जेबीवीएनएल में कई घोटाले इनके सरंक्षण में हुए और पूर्व के घोटालों को भी संरक्षण जेबीवीएनएल के वरीय अधिकारियों का रहा.

इसमें एमडी राहुल पुरवार और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ऑपरेशन्स केके वर्मा के नाम सबसे आगे आ रहे हैं.

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पद बचाने और पदोन्नति के लिये लगा रहे चक्कर

जानकारी मिली है कि एमडी राहुल पुरवार अपने पद को बचाने के लिये लगातार सत्ताधारी दल के चक्कर लगा रहे हैं.

पिछले कुछ सालों में जेबीवीएनएल के कई घोटालों में एमडी राहुल पुरवार का नाम आया है. इतना ही नहीं, कुछ ऐसे अधिकारियों को संरक्षण देने का आरोप भी इन पर लगा.

पिछले सरकार के काल में कई बार विधानसभा सत्र के दौरान जेबीवीएनएल और राहुल पुरवार का नाम विपक्ष की ओर से जोर-शोर से उठाया गया.

उर्जा विभाग की ओर से कई बार इनके कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े किये गये. वहीं खबर है कि एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ऑपरेशन केके वर्मा एमडी बनना चाह रहे हैं जिसके लिये ये काफी मेहनत कर रहे हैं.

वर्मा जेबीवीएनएल के पूर्व रांची एरिया बोर्ड के उच्च पद पर सात साल तक कार्यरत रहे. इसके पहले साल 2005 में जमशेदपुर में इन पर बाजार दर से अधिक कीमत पर इंसुलेटर खरीदने का आरोप लगा है.

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पिछले कुछ सालों में जेबीवीएनएल में हुए घोटाले

स्मार्ट मीटर खरीदने के लिये साल निकालें गये टेंडर में सीवीसी नियमों का उल्लंघन किया गया. इसके बाद भी बड़ी कंपनियों को स्मार्ट मीटर का टेंडर दिया गया.

स्मार्ट मीटर खरीद के लिए 60 करोड़ की जरूरत थी. जबकि टेंडर चार सौ करोड़ का निकाला गया जो सीवीसी नियमों का उल्लंघन है.

इस मामले में केंद्रीय उर्जा मंत्रालय की ओर से भी संज्ञान लिया गया. हालांकि घोटाला जब हुआ था उस वक्त जेबीवीएनएल के जगह राज्य विद्युत बोर्ड था.

इसमें लगभग 15 करोड़ का घोटाला हुआ. बिना टीडीएस कोटे की एजेंसियों को भुगतान कर दिया गया.

इस पर सीएमडी की ओर से 2017 में विजिलेंस टीम बनाकर जांच करने का आदेश एमडी राहुल पुरवार और जीएम एचआर को दिया गया जिसके बाद पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की गयी.

टीम के रिपोर्ट के बाद पिछले दिनों फाइनेंस कंट्रोलर उमेश कुमार को डिमोट करने की प्रक्रिया भी चल रही थी. लेकिन अभी भी उमेश कुमार अपने पद पर बने है.

पिछले दिनों बिना टेंडर निकाले ही जमशेदपुर पावर ग्रिड का काम टाटा पावर और सरायकेला खरसावां पावर ग्रिड का काम जुसको को भी दे दिया गया.

ये निर्णय जेबीवीएनएल की बोर्ड बैठक में लिया गया. हालांकि इसमें फाइल अब तक उर्जा विभाग में नहीं आयी है.

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