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15 करोड़ का TDS घोटाला करनेवाले JBVNL के फाइनेंस कंट्रोलर उमेश कुमार ने JUVNL में भी की थी 3.10 करोड़ की गलत पेमेंट

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Ranchi : झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) में 15 करोड़ का टीडीएस घोटाला करनेवाले फाइनेंस कंट्रोलर उमेश कुमार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं. उमेश कुमार पर न सिर्फ वर्तमान सरकार में, बल्कि इसके पूर्व की सरकार में भी गड़बड़ी करने के आरोप हैं. सरकारें बदल जाती हैं, लेकिन उमेश कुमार हमेशा बिजली विभाग में पावरफुल पद पर ही रहते हैं.

उमेश कुमार पहले झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (JUVNL) में फाइनेंस कंट्रोलर हुआ करते थे. तब उन पर कोलकाता की एनविल केबल्स कंपनी को गलत तरीके से 3.10 करोड़ रुपये का भुगतान करने का भी आरोप लगा था. इस मामले में प्रवीण कुमार और जितेंद्र गुप्ता नामक अधिकारी उमेश कुमार के सहयोगी थे. एेसे अधिकारी को झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड अब भी फाइनेंस कंट्रोलर बनाये हुए है.

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जानकारी के मुताबिक बिजली विभाग ने मेसर्स एनविल केबल्स नामक कंपनी को कंडक्टर सप्लाई का काम किया था. कंपनी के खिलाफ उमेश कुमार ने एक रिपोर्ट की, जिसके आधार पर विभाग के तत्कालीन चीफ इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया और पूरे मामले की जांच का आदेश दे दिया गया. तत्कालीन इंजीनियर इन चीफ की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमिटी ने जब पूरे मामले की जांच की, तो पता चला कि यह तो बड़ा घोटाला है. प्राइस वेरिएशन के नाम पर कंपनी को गलत तरीके से 19 लाख रुपये से अधिक राशि का भुगतान  किया गया है.

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जांच में यह भी प्रमाणित हुआ कि फाइनेंस कंट्रोलर उमेश कुमार और अन्य ने मिलकर दूसरी योजना की राशि का पैसा कंपनी को पेमेंट कर दिया. एनविल केबल्स कंपनी को जो काम मिला था, वह एनुअल डेवलपमेंट प्लान (एडीपी) के तहत दिया गया था. लेकिन अधिकारियों ने रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन के प्लान से कंपनी को पेमेंट कर दिया. रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन (आरई) का काम केंद्र प्रायोजित योजना के तहत था. इसके फंड को डायवर्ट करने के लिए बोर्ड की मंजूर जरूरी थी, लेकिन उमेश कुमार और अन्य अधिकारियों ने बोर्ड की मंजूरी के बिना ही फंड को डायवर्ट कर दिया.

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इस मामले में उमेश कुमार समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ जब विभागीय कार्यवाही शुरू की गयी, तब अधिकारियों ने संचालन पदाधिकारी के समक्ष एक निर्देश (बफ शीट) की प्रति रखी. निर्देश बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन एचबी लाल के हस्ताक्षर से 28.02.2009 को जारी किया गया था. इसमें कहा गया था कि मेसर्स एनविल केबल्स के लंबित बिल के भुगतान के संबंध में आपसे वार्ता हुई. एडीपी मद में प्राप्त सामग्री को आरई एवं ओएंडएम मद में बंटवारे के संबंध में मुख्य अभियंता (क्रय एवं भंडार) तथा सदस्य (वितरण) को अधोहस्ताक्षरी द्वारा निर्देश दिया जा चुका है. अतः कंपनी को 1.63 करोड़ और 1.47 करोड़ का भुगतान तत्काल करके सूचित करें. जांच में यह पाया गया कि तत्कालीन चेयरमैन का यह आदेश बैक डेट से लिया गया, क्योंकि भुगतान से संबंधित फाइल में इस आदेश का जिक्र नहीं है. इतना ही नहीं, आदेश पत्र में कोई पत्र संख्या दर्ज नहीं है.

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