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#JAP: जैप वन, जहां नवरात्रि में पंडाल तो बनता है लेकिन प्रतिमा नहीं बैठाई जाती, जानें क्‍या है मान्‍यता

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Ranchi:   झारखंड सशस्त्र पुलिस (जैप वन) में सैनिक सम्मान के साथ कलश स्थापना की गयी. यहां सबसे बड़ी खासियत है कि मां भवानी की प्रतिमा की जगह कलश स्थापित किया जाता है.

इसी कलश पर मां का आह्वान किया जाता है. पूरे नौ दिनों तक कलश की रक्षा के लिए जैप की एक कंपनी तैनात रहती है़. रविवार को यहां 70 महिलाओं ने कलश की स्थापना की. बीच घेरे में मां भगवती का कलश बैठाया गया है. नवरात्र तक दुर्गा सप्तशती का पाठ करेंगी और उपवास रखेंगी़.

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यहां 78 किलो जावा का रोपण किया गया. 70 कलश पर अखंड दीप प्रज्ज्वलित रहेगा. यहां बलि देने की परंपरा आज भी कायम है़.

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गोलियों की सलामी के साथ की जाती है देवी की आराधना

नवरात्रि के मौके पर यहां गोलियों की सलामी के साथ देवी की आराधना की जाती है. यहां मूर्ति की जगह कलश की स्थापना की जाती है. सिटी की दुर्गा बाड़ी की तरह परंपराओं को सैकड़ों साल से सहेजती आ रही जैप वन की यह परंपरा अनोखी और आकर्षक है. यह परंपरा 150 साल पुरानी है.

और परंपराओं को उसी निष्ठा और श्रद्धा के साथ निभाया जा रहा है. इस बार जैप वन की पूजा में पहले दिन कलश स्थापना में 100 से ज्यादा महिलाओं ने हिस्सा लिया. यहां वाहिनी के सैनिकों ने बैंड बाजे बजाये. कल्श स्थापना में हिस्सा लेने वाली महिलाएं व्रतधारी है. और ये पूरे नवरात्र व्रत रखेंगी.

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लोगों का कहना है कि मां दुर्गा की पूजा का ही कमाल है कि हमारी वाहिनी के जवान नक्सल प्रभावित इलाकों में पोस्टिंग पर भी सुरक्षित रहते हैं.

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वर्षों से चली आ रही है प्रथा

1880 बटालियन रिजर्व पुलिस फोर्स के गठन के साथ ही यहां लगातार पूजा का आयोजन किया जा रहा है. विभिन्न रेजिमेंट से आये जवान भी यहां आकर इस पूजा की परंपरा को सीख गये हैं. जिसे यंग जेनरेशन भी फॉलो करता है.

1905 में गोरखा मिलिट्री के बाद 1948 बिहार मिलिट्री के बाद झारखंड स्थापना के साथ यहां झारखंड आर्म्ड फोर्स का गठन हुआ. अलग – अलग फोर्स के गठन के साथ ये परंपरा भी निरंतर चलती रही.

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