Jamtara

जामताड़ाः देश के कई राज्यों में पहुंच रही करमाटांड़ के आमों की खुशबू

लगातार बारिश व आंधी से इस वर्ष आम का उत्पादन कम, लॉकडाउन के कारण भी मिलेंगे खरीददार कम

Jamtara: जामताड़ा का करमाटांड़ किसी पहचान का मोहताज नहीं है. करमाटांड़ पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की कर्म भूमि है. साथ ही साइबर क्राइम के कारण इलाके का नाम थोड़ा खराब भी हुआ है. लेकिन साइबर को छोड़ वैराइटी व खुशबूदार आमों के उत्पादन से भी करमाटांड़ की पहचान बनी है.

करमाटांड़ के बागानों में लगभग 200 आम के पेड़ हैं. इन पेड़ों में कई प्रजाति के आम का उत्पादन होता है. दूर-दूर से लोग आम के लिए करमाटांड़ पहुंचते हैं.

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बिहार के झाझा, पटना, भागलपुर, झारखंड के मधुपुर, जसीडीह, धनबाद, व बंगाल के आसनसोल, कोलकाता सहित अन्य राज्यों से लोग आम लेने के लिए करमाटांड़ आते हैं. यहां के आम की खुशबू कई राज्यों में पहुंचती है. यहां के आम में एक अलग तरह की खुशबू पाई जाती हैं, जिस कारण आम की मांग देश के कई राज्यों में है.

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लॉकडाउन के कारण व्यवसाय प्रभावित

लॉकडाउन और कोरोना संकट के कारण इस बार आम की बिक्री कम होने की संभावना है. आम व्यवसायियों को ये चिंता सता रही है कि अगर खरीददार नहीं पहुंचेंगे तो आम को कम दर पर ही बेचना होगा. वहीं बेमौसम बारिश और आंधी के कारण भी इस साल आम का उत्पादन प्रभावित हुआ है. फिर भी लगभग एक सौ से डेढ़ सौ क्विंटल आम की बिक्री की उम्मीद है.

 

पहले कई वैराइटी के होते थे आम

करमाटांड़ आम बागान में पहले अनेकों वैराइटी के आम होते थे. लेकिन समय के अनुसार आम के पेड़ भी नष्ट हुए. वर्तमान में 5 से 7 वैराइटी के आम होते हैं. मालिक एडवर्ड स्मार्ट ने कहा कि पहले आम धनबाद की मंडी में बेचते थे.लेकिन खर्च अधिक होता था. अब आम के खरीदार यहीं पहुंचते हैं. यहां से ही आम कई राज्यों में ले जाते हैं. कोलकाता के बंगाली परिवार हर आम के मौसम में करमाटांड़ पहुंचते हैं. इलाके में लंगड़ा आम 50 रुपये किलो, हिमसागर 40 रुपये,  गुलाब खास 50 रुपये, बम्बईया 35 रुपये, आम्रपाली 30 रुपये, बीजू गुलाब 40 रुपये,  दशहरि 26 रुपये की दर से बिक्री रहा है.
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