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जामताड़ा : जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई,  चिकित्सकों के अभाव में एकमात्र रेफरल अस्पताल भी हुआ बंद

Anwar Hussain

Jamtara: जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का काफी बुरा हाल है. यहां के लोगों को स्वास्थ्य के मामले में अन्य राज्यों और शहरों में पलायन करना पड़ता है. मामूली बीमारी में भी लोगों को दूसरे शहरों की ओर रुख करना मजबूरी है. कोरोना काल में हालात बद से बदतर हो गये हैं. ग्रामीण स्तर पर एक भी चिकित्सक नही है. ऐसे में लोग पूरी तरह से देहाती चिकित्सकों पर निर्भर है. जिले में चिकित्सकों की कमी से भारी परेशानी हो रही है. सरकार चिकित्सकों की बहाली तो कर रही है, लेकिन स्वीकृत पद से काफी कम संख्या में बहाली हो रही है.

झारखंड राज्य अलग होने के बाद उम्मीद थी की व्यवस्था में सुधार होगा. लेकिन अभी तक बदलाव नहीं दिख रहा है. लोगों को सबसे ज्यादा स्वास्थ्य के क्षेत्र में बदलाव होने की उम्मीदें थीं. क्योंकि जामताड़ा जिला स्वास्थ्य के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है. लेकिन राज्य बनने के इतने दिनों बाद भी व्यवस्था में कोई बदलाव न होने से लोगों के मन में आक्रोश है. लोगों ने कहा कि राज्य बनने के बाद स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली जैसी चीजों में सुधार की उम्मीद थी. लेकिन मंत्री, नेताओं की जानकारी में देने के बाद भी हालात ज्यों के त्यों है.

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एक मात्र रेफरल अस्पताल चिकित्सकों के अभाव में बंद

लोगों का कहना है कि जिले का एकमात्र रेफरल अस्पताल कुंडहित बंद है. करोड़ों ख़र्च कर इसका बिल्डिंग बनाया गया था. सरकार ने करोड़ों की मशीने भी भेजी. लेकिन सरकार एवं विभाग की उपेक्षापूर्ण नीति के कारण अस्पताल आज खंडहर में तब्दील हो गया. इस अस्पताल को आज भी चिकित्सकों का इंतजार है. रेफरल अस्पताल के सारे समान इधर-उधर हो गए. लोगों को मशीनों का जरा भी लाभ नही मिला. कई मशीनों में जंग लग गया है. लेकिन किसी ने भी सुध तक नही लिया.

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संयुक्त बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने किया था उद्घाटन

बता दें कि इस रेफरल अस्पताल का निर्माण तत्कालीन बिहार सरकार ने किया था. नाला विधान सभा क्षेत्र के कुंडहित प्रखंड में यह अस्पताल बनाया गया है. तत्कालीन बिहार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ महाबीर प्रसाद ने रेफरल अस्पताल का उद्घाटन किया था. अस्पताल के उद्घाटन के बाद अस्पताल में रौनक देखने को मिलती थी. लेकिन राज्य अलग हुआ तो अस्पताल की स्थिति भी बदतर होती गयी. चिकित्सकों की कमी से अस्पताल जूझता रहा. राज्य गठन के बाद लोगों को उम्मीद थी कि इस अस्पताल को हाईटेक बनाया जायेगा. लेकिन अब यह अस्पताल खंडहर में तब्दील होता नजर आ रहा है.

कई प्रखंडों में नही है चिकित्सक

यह जानकर आश्चर्य होगा कि रेफरल अस्पताल तो दूर पीएचसी व सीएचसी में भी चिकित्सक नही है.  चिकित्सक के अभाव में लोगों को ईलाज के लिए बंगाल जाना पड़ता है. जिले का फतेहपुर प्रखंड में एक भी सरकारी चिकित्सक नही है. वहीं कुंडहित प्रखंड में एक ही डेंटिस्ट की पदस्थापना है. वही जिले की आबादी लगभग आठ लाख है. इतनी आबादी के लिए मात्र 32 चिकित्सक ही पदस्थापित हैं. जबकि जिले में 89 चिकित्सक का पद है. ऐसे में लोगों को क्या सुविधा मिलती होगी ये सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. जिले में एक भी सर्जन, विशेषज्ञ चिकित्सक नही है.

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