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लौह नगरी ने विदेशों में भी मनवाया लोहा- जमशेदपुर के टेलर ने इटली में मचायी धूम

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Abinash Mishra

Jamshedpur: जमशेदपुर के मोइन अंसारी ने इटली में हुए 38वें वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ मास्टर टेलर्स इवेंट के गोल्डेन कारिगर कैटगरी में दूसरा स्थान हासिल कर दिखा दिया कि भारत दुनिया के किसी भी हुनर में किसी भी देश से पीछे नहीं. इस इवेंट में 22 देशों के 250 से अधिक टेलर्स ने हिस्सा लिया था और ये प्रतियोगिता इटली के वेरोना शहर में चार दिनों तक चली, जिसका आयोजन अगस्त की शुरुआत में हुआ था. मानगो गौजनगर के रहनेवाले मोइन अंसारी भारत से अकेले प्रतिनिधि थे जिन्होंने ये सम्मान हासिल किया. प्रतियोगिता तीन कैटगरी में थी जिसमें गोल्डेन कारिगर, गोल्डेन नीडल एंड थ्रेड और फैशन डिजाइन शामिल था. मोइन अंसारी ने जिस कैटगरी में हिस्सा लिया उसे इवेंट की सबसे मुश्किल प्रतियोगिता मानी गयी थी. इस इंवेंट में भाग लेने के लिए मोइन ने भारत में मास्टर्स स्टाइल की प्रतियोगिता जीती थी, जिसके बाद उन्हें इटली में भारत की तरफ से हिस्सा लेने का मौका मिला.

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कैसे मिली मोइन को जीत

गोल्डेन कारिगर इटेलियन भाषा में मानचीनो-डी-आरों में दूसरा स्थान उनकी बारीक फिनिश के चलते मिला. इस कैटगरी में उन्हें कोर्ट और सूट के बटनहोल पर अपनी फिनिशिंग दिखाने की चुनौती मिली. जहां दूसरे देश के दर्जी हाइ टेक्नोलॉजी और मशीन के साथ पहुंचे थे वहीं मोइन के पास केवल सुई-धागा थी. लेकिन अपने पर विश्वास और हुनर के बलबूते सभी को पछाड़ने में कामयाब रहे. मोइन ये भी कहते हैं कि मशीन ने आज के समय में काफी कामों को आसान कर दिया है. लेकिन हाथ में हुनर हो तो जो सफाई हाथ से हो सकती है वो आज भी मशीन नहीं कर सकती. यही वजह रही कि उनकी फिनिशिंग और बटनहोल की मजबूती ने सभी को खूब प्रभावित किया.

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कौन हैं मोइन अंसारी

पढाई में औसत होने के बावजूद 38 वर्षीय मोइन अंसारी बिष्टुपुर के एक निजी शोरूम में काम करते हैं. टेलरिंग उनके परिवार का पेशा है और मोइन के पिता और छोटा भाई शमशाद टेलरिंग का ही काम करते हैं. मोइन का कहना है कि इस जीत से उन्होंने ये दिखा दिया है कि बड़े शहर के लोगों के पास ही हुनर नहीं होता, मौका मिले तो छोटे शहर के लोग भी अपना लोहा मनवा सकते हैं. हालांकि उनकी जीत उनके लिए किसी सपने से कम नहीं लेकिन वो मानते हैं कि उनकी जीत युवाओं को भी टेलरिंग में आने के लिए प्ररणा देगी.

क्या चाहते हैं मोइन

मोइन चाहते हैं कि जमशेदपुर के युवाओं को इस पेशे की ओर आकर्षित किया जाये क्योंकि ज्यादातर युवाओं कि नयी सोच के चलते टेलरिंग उनको आकर्षित नहीं करती जबकि ऐसा नहीं है. इसकी बारीकियों को इच्छाशक्ति और मेहनत से अगर सीख लिय़ा जाये तो इस पेशे से भी लोगों का नाम देश-विदेश में हो सकता है. वो केवल सरकार से यही चाहते हैं कि जिस तरह स्किल इंडिया के तहत हऱ क्षेत्र में युवाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है. उसी तरह से इस पेशे को लेकर भी सरकार युवाओं को जागरूक करने के लिए कदम उठाये.

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