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Jamshedpur Union Politics : इंतजार करते रहे नेता, नहीं आए अनूप सिंह, टाटा कमिंस कर्मचारी यूनियन चुनाव पर नहीं हो सका कोई फैसला

Jamshedpur : टाटा कमिंस कर्मचारी यूनियन के नेता इंतजार करते रहे और कांग्रेस विधायक जयमंगल सिफ उर्फ अनूप सिंह शहर नहीं पहुंचे. अनूप सिंह 26 मई को शहर आकर टाटा कमिंस कर्मचारी यूनियन के चुनाव की घोषणा करने वाले थे. चुनाव कराने की घोषणा एक बार फिर टांय-टांय फिस्स होने के बाद चुनाव को लेकर यूनियन नेता और कर्मचारी नाउम्मीद हो गये हैं. इसके पहले जब 9 अप्रैल को अनूप सिंह शहर आए थे, तो उन्होंने 15 दिन के अंदर चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी.

लेकिन डेढ़ माह बीतने के बाद भी चुनाव को लेकर जारी गतिरोध खत्म नहीं हो पाया है. अनूप सिंह ने यहां तक कहा था कि अगर प्रबंधन ने चुनाव में किसी तरह का हस्तक्षेप किया और देरी की तो वह जिला प्रशासन की देखरेख में चुनाव कराने के लिए पत्र लिखेंगे. बीच-बीच में प्रबंधन और अनूप सिंह के बीच बात होने से कर्मचारियों में यह उम्मीद जगी है कि शायद चुनाव हो जाय. लेकिन प्रबंधन और अनूप सिंह के बीच वार्ता के बावजूद चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से कर्मचारियों में निराशा बढ़ती जा रही है.
नहीं बन पा रही सहमति
सूत्रों का कहना कि चुनाव को लेकर प्रबंधन और अनूप सिंह के बीच सहमति नहीं बन पा रही है. प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि वह बाहरी अध्यक्ष नहीं चाहता. इसे लेकर प्रबंधन की ओर से अनूप सिंह को एक सूची भी सौंपी गई हैं जिसमें यूनियन के पांच नेताओं के नाम शामिल है, जिसे अध्यक्ष बनाया जा सकता है. उधर, अनूप सिंह का स्टैंड रहा है कि चुनाव में जीत कर आए कमेटी मेंबर्स फैसला करेंगे कि कौन अध्यक्ष होगा?
चुनाव नहीं होने से ग्रेड समझौता में हो रही देरी
टाटा कमिंस कर्मचारी यूनियन चुनाव नहीं होने से कंपनी का ग्रेड समझौता नहीं हो पा रहा. यूनियन के चुनाव को लेकर जारी विवाद के बीच यह भी कयास लगाया जा रहा है कि प्रबंधन कहीं स्टीयरिंग कमेटी के साथ मिलकर समझौता नहीं कर लें. यूनियन की स्टीयरिंग कमेटी भी वेट एंड वाच की स्थिति में है. लगभग दो साल से प्रबंधन और अनूप सिंह के बीच चल रहे विवाद के बाद पिछले दिनों पैच अप हुआ, लेकिन चुनाव नहीं होने से ग्रेड को लेकर कर्मचारियों में अफवाहों का बाजार गर्म है.
14 माह से लंबित है चुनाव
यूनियन का चुनाव लंबित हुए 14 माह हो गए. यही नहीं एक अप्रैल से ग्रेड भी लंबित हो गया. तीन साल से यूनियन का मुकम्मल अस्तित्व नहीं है. 2018 में पिछला चुनाव हुआ था. चुनाव के कुछ ही महीने बाद यूनियन की गुटबाजी तेज हो गई. अभी यूनियन ने काम करना शुरू ही किया था कि आपसी विवाद के चलते तत्कालीन अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने 2019 में यूनियन के सारे पदाधिकारियों को पद से हटाकर स्टीयरिंग कमेटी बना दी थी. स्टीयरिंग कमेटी बनने के बाद समस्याएं तो खत्म नहीं हुई, यूनियन का पावर कम होते गया. दो साल तक स्टीयरिंग कमेटी के भरोसे चलने वाली यूनियन कर्मचारियों का भला नहीं करा सकी. 2021 में जब यूनियन के तीन साल का कार्यकाल खत्म हुआ तो बर्खास्त अरूण सिंह मामले को लेकर प्रबंधन और राजेन्द्र प्रसाद सिंह के विधायक बेटे अनूप सिंह के बीच की कड़वाहट बढ़ती गई. यह कड़वाहट इतनी ज्यादा बढ़ गई कि राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख का लाभ उठाकर प्रबंधन के आला अधिकारियों पर केस तक किया गया. इसके चलते प्रबंधन और अनूप सिंह के बीच की दूरी और बढ गई. इस साल के शुरू में जब यूनियन ने चुनाव प्रक्रिया शुरू की तो कोरोना का हवाला देकर चुनाव को रोक दिया गया.

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