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जमशेदपुर : पुलिस की ‘मूंछ’ का मामला या मोहल्ले की राजनीति का परिणाम, जानें बागबेड़ा की घटना पर क्या कहते हैं लोग

थाना घेराव को लेकर 18 नामजद और 40-50 अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज

Raj Kishore
Jamshedpur : बागबेड़ा थाना क्षेत्र के पोस्तोनगर स्थित यादव क्लव के पास ताश खेल रहे लोगों पर पुलिस की कार्रवाई के बाद हंगामे के दूसरे दिन जब न्यूजविंग की टीम वहां पहंची, तो पूरी बस्ती में सन्नाटा पसरा हुआ था. बस्तीवासियों की हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सोमवार को अधिकांश लोग अपने घरों में ही दुबके रहे. इक्के-दुक्के घर ही ऐसे मिले, जिनके बाहर कुछ महिलाएं बैठी थीं. उनकी चर्चा का विषय रविवार की शाम हुई घटना ही थी. वहीं, जिस क्लब के पास घटना घटी, वहां से होकर बस्ती जानेवाले रास्ते में भी गिने-चुने लोग ही चलते-फिरते दिखाई दे रहे थे. कुछ लोग आस-पास नजर भी आये, तो उनकी जुबान पर भी कल की ही घटना थी. वैसे लोगों के मुताबिक बस्ती वासियों और पुलिस, दोनों के बीच भ्रम की स्थिति घटना के लिए पूरी तरह से जिम्मेवार थी.

 

पुलिस को मिली थी जुआ चलने की सूचना

पोस्तोनगर के लोगों ने बताया कि एक तो किसी ने पुलिस को गलत सूचना दी थी कि क्लब के पास जुआ चल रहा है, उसके बाद आनन-फानन में की गयी पुलिस कार्रवाई से अफरातफरी मच गयी. स्थानीय लोग भी वास्तविक स्थिति से पुलिस को ठीक तरह से अवगत नहीं करा पाये. उस पर रहीसही कसर थाना के घेराव के दौरान क्षेत्र की आपसी राजनीति ने पूरी कर दी. नतीजा यह निकला कि जिन्हें जेल नहीं जाना चाहिए था, वे जेल चले गये. इसमें कहीं न कहीं पुलिस द्वारा इसे मूंछ का सवाल बना दिया जाना भी जिम्मेवार है.

 

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क्लब के पास सालों के ताश खेलते हैं लोग

बस्ती के पास ही रहनेवाले एक बुजुर्ग व्यक्ति ने बताया कि क्लब के पास वर्षों से समय काटने के लिए लोग ताश खेलते हैं. इनमें बूढ़े-बुजुर्गों की संख्या अधिक होती है. साथ यहां ताश का खेल देखने के लिए लोगों का जुट जाना भी आम बात है. रविवार की शाम एकाएक पुलिस की जीप मौके पर पहुंची और जीप रुकते ही पुलिस के जवान  ताश खेल रहे लोगों की ओर जिस तरह से लपके, इससे ताश खेल रहे लोगों के साथ देखनेवाले भी भागने लगे. पुलिस के हाथ जो भी चढ़ा, उसे धर-दबोचा गया. इससे बस्ती की महिलाएं और अन्य लोग भड़क गये. पुलिस को समझाने की कोशिश की गयी, लेकिन पुलिस नहीं मानी. पकड़े गये लोगों को थाना लाया गया, तो बस्ती के लोगों ने भी वहां पहुंचकर थाने का घेराव कर दिया.

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सुलझ रहा था मामला, लेकिन ऐसे बिगड़ गया

थाना घेराव के बाद शुरू हुआ राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों का थाना पहुंचना. इनमें कुछ लोग पुलिस और बस्तीवासियों से बातचीत कर मामले की सुलाने की राह पर ला चुके थे. बावजूद इसके कुछ लोग ऐसे भी मौके पर मौजूद थे, जिन्होंने पुलिस के मत्थे कुछ ज्यादा ही आरोप मढ़ दिये और पुलिस के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी करने लगे. इससे मामला गरमाने लगा, यहां तक कि जिले के एसएसपी को मामला शांत कराने के लिए थाना पहुंचना पड़ा. हालात ज्यादा न बिगड़े, इसे लेकर क्यूआरटी की भी तैनाती कर दी गयी. संभवत: यही सारे कारण रहे, जिस वजह से  पुलिस ने इस मामले को अपनी  ‘आन’  पर ले लिया और अंतत: पांच लोगों को जेल जाना पड़ा.

एबीवीपी नेता समेत 18 पर नामजद प्राथमिकी  

इस मामले में 18  नामजद और 40-50 अज्ञात लोगों के विरुद्ध नाजायज मजमा लगाकर थाना घेराव करने, सिरिस्ता कक्ष में उपस्थित पुलिस पदाधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार करने एवं सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में बगबेड़ा थाने में मामला दर्ज किया गया है.  यह प्राथमिकी पुलिस अवर निरीक्षक नारायण कुमार सिंह के प्रतिवेदन पर दर्ज की गयी है.  नामजद लोगों में एबीवीपी नेता हिमांशु दुबे, सुजीत शाही, भवनाथ सिंह, अनिल कुमार, अरुण यादव, मनीष यादव, राम सूरत यादव, मनोज कुमार, बलराम साह उर्फ पटेल, कृष्णा यादव, मनोज यादव, उमेश यादव, गौतम, संजीत साह, राजु महतो, सुमन गिरी, सोनु मिश्रा तथा शिवम केशरी उर्फ छोटू शामिल हैं.

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