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#NewTrafficRules पर बोले जमशेदपुर SSP : नियम कड़े हैं पर इसमें जनता की ही भलाई है

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Abinash Mishra

Jamshedpur : मोटर व्हीकल एक्ट 2019 के तहत लगाये गये भारी-भरकम चालान से भले ही राज्य सरकार ने तीन महीने के लिए राहत दे दी हो, लेकिन इस पर चर्चा का बाजार अब भी गर्म है. इस मुद्दे पर हमने बात की है जमशेदपुर के एसएसपी अनुप बिरथरे से. पढ़िये बातचीत के प्रमुख अंश :  

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एक सितंबर से लागू हुए नये ट्रैफिक रूल को लेकर क्या रिस्पॉन्स है, जनता का कितना सहयोग मिला?

उत्तर : नये ट्रैफिक रूल्स लोगों में ट्रैफिक सेंस डेवलप करने के लिहाज से अच्छा है क्योंकि सड़कों पर चलने वाले लोगों की छोटी से छोटी लापरवाही उनके लिए घातक साबित हो रही है. इस लिहाज से देखें तो नियम को सही कहा जा सकता है. लेकिन लोगो की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली. कहीं पर लोगों ने नियम का विरोध भी किया तो कही पर सहयोग भी निला. इसमें कोई दो राय नहीं कि नियम सख्त हैं और लोगों की जेब पर भारी पड़ा है लेकिन यदि लोग जागरुक रहें और सड़कों पर सही कागज के साथ चलें तो कोई समस्या उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी. हमारी भी कोशिश रही है कि नियम का सीधा दबाव अचानक से जनता पर नहीं आये. जमशेदपुर पुलिस सहजता से पेश आयी है.

केंद्र सरकार ने नियम तो बना दिये लेकिन सड़कों पर सीधा फेस तो ट्रैफिक पुलिस और आप जैसे सीनियर अधिकारियों को करना पड़ता है. क्या लगता है आपको लॉन्ग टर्म में इसका फायदा होगा?

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उत्तर : नियम तो बनाये ही जाते हैं लॉन्ग टर्म के लिए. निश्चित तौर पर इससे लॉन्ग टर्म में फायदे हैं क्योंकि सभी को नियम को फॉलो करना सीखना ही होगा. विदेशों में भी सख्त ट्रैफिक रुल होते हैं. भारत कोई पहला देश नहीं है. यहीं के लोग जब विदेशों में जाते हैं तो सभी कानूनों को फॉलो करने लगते है और तारीफ भी करते हैं. लेकिन अपने देश में आते ही नियम को नजरअंदाज करने लगते हैं. ये एक आदत सी हो गयी है. इस नियम से इतना तो जरूर होगा कि लोगों को नियम की वैल्यू समझ आने लगेगी और धीरे-धीरे ये आदत बन जायेगी.

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क्या यह सही नहीं होता कि नये रूल में पहले फाइन को हेलमेट, पलूशन या सेफ्टी बेल्ट तक ही सीमित रखा जाता और इसमें सफलता के बाद दूसरी चीजों पर फाइन बढ़ाई जाती?

उत्तर : ऐसा किया जा सकता है या दूसरे कई और भी उपाय हैं जिस पर नये सिरे से विचार होगा. लेकिन जरूरी ये आंकना नहीं कि नियम कैसें हैं बल्कि जरूरी ये समझना है कि ये क्यों जरुरी है. यह सीधे-सीधे सुरक्षा से जुड़ा है. ये नया रूल पहले स्टेप, दूसरे स्टेप या एक साथ लागू हो, फॉलो करना ज्यादा जरूरी है क्योंकि हादसे जब गंभीर होते हैं तो लोगों के पास पछताने के अलावा कुछ नहीं बचता. कई परिवार हैं जो सड़क हादसों का दंश झेल रहे हैं. मैने खुद इस दंश को झेला है. मेंरे क्लोज रिश्तेदार की मौत सड़क हादसे में हो चुकी है. इसीलिए नियम का पालन महत्वपूर्ण है. दोहरा रहा हूं कि अगर आप पेपर कंपलीट रखेंगे तो न सिर्फ सेफ रहेंगे बल्कि कई मुसीबतों में आपके लिए यही पेपर मददगार भी साबित होंगे.

लेकिन इसका दबाव तो पुलिस महकमे में भी देखा जा रहा है. एक तो उन पर काम का लोड पहले से अधिक हुआ है और सड़कों पर भी बहस-झगड़े पहले से ज्यादा बढे हैं. इसमें तालमेल बिठाना क्या एक नयी चुनौती नहीं है?

उत्तर : हां, बिल्कुल! ये नयी चुनौती है लेकिन आदेश का पालन भी जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट भी अब इसे हल्के में नहीं लेता. हर छोटी से छोटी जानकारी की मॉनिटरिंग सुप्रीम कोर्ट के स्तर से हो रही है. कितने हादसे, कितनी मौत, यहां तक कि शहर के क्राइम ग्राफ की रिपोर्ट भी हर महीने सुप्रीम कोर्ट तक जा रही है. अब चलान जैसी चीजें भी वहां जायेंगी. इससे आप समझ सकते हैं कि कितनी बारीकी से नजर रखी जाती है तो जाहिर है कि दबाव तो होगा ही लेकिन ये लोकहित में है. पुलिस का काम है कि वह शहर को हर स्तर से सुरक्षित रखे. उसके लिए जितना हो सकेगा उतना तो हम करेंगे ही. नये नियम लागू होने के शुरुआती दौर में मुश्किलें आती हैं, तनाव भी रहता है लेकिन अगर लोग जागरुक हों तो दिक्कत का सवाल ही नहीं.

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क्या नयी टेक्नॉलोजी नये रुल में कारगर साबित हो सकती है?

उत्तर : हां, एकदम नयी तकनीक के सहारे पुलिस और जनता के बीच के गतिरोध को खत्म किया जा सकता है. डिजिटल चालान जैसे उपायों से फायदा ये है कि पुलिस किसी को रोक नहीं सकती. उनका चालान कटा. उनको दे दिया गया. अब वो कोर्ट जाकर मामले को सुलझाएं. इससे सड़क पर होने वाले विरोध को रोकने में कामयाबी मिलेगी. इस पर विचार भी हो रहा है. आखिर में जनता से मेरी यही अपील है की तीन महीने के इस समय में जितनी जल्दी हो सके सभी पेपर्स को दुरुस्त कर लें. जो भी जरूरी सलाह है वो हम देने को तैयार हैं लेकिन ये बेहद जरूरी है क्योंकि ये सीधे आपकी सुरक्षा से जुड़ा हुआ है.

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