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जमशेदपुर : सरयू राय की दो टूक, टाटा कमांड एरिया के लोगों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराए या लीज समझौता रद्द करे सरकार

विधायक सरयू राय ने टाटा स्टील के खिलाफ खोला मोर्चा, समर्थकों के साथ बैठे धरने पर, मुख्यमंत्री के नाम स्मार पत्र सौंपा

Jamshedpur : जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने टाटा स्टील के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. मंगलवार को विधायक अपने समर्थकों के साथ पूर्वी सिंहभूम जिला मुख्यालय के समक्ष धरने पर बैठ गए. सरयू राय ने सरकार से दो टूक शब्दों में कहा है कि सरकार की टाटा स्टील के साथ हुए समझौतों के तहत टाटा कंपनी कमांड एरिया के लोगों को मूलभूत नागरिक सुविधाएं मुहैया कराए या लीज समझौता सरकार रद्द करें.

टाटा स्टील नागरिक सुविधाएं मुहैया कराने में नाकाम

उन्होंने बताया कि झारखंड गठन के बाद टाटा स्टील से लीज समझौता हुए 17 साल बीत चुके हैं, मगर टाटा स्टील कंपनी कमांड एरिया के लोगों को नागरिक सुविधाएं मुहैया कराने में नाकाम रही है. जहां नागरिक सुविधाएं मुहैया करा रही है वहां सरकार से ज्यादा दर पर टैक्स वसूल रही है. तत्कालीन बिहार सरकार के समय में हुए लीज समझौते के आधार पर 36 साल और झारखंड सरकार के साथ हुए लीज नवीनीकरण समझौते के 17 साल हो चुके हैं. मगर इस कालखंड में भी टाटा कंपनी अपने वायदों पर खरी नहीं उतरी है. उन्होंने टाटा समूह पर दूसरे जिलों में नागरिक सुविधाएं मुहैया कराकर धन कमाने का आरोप लगाया है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि राज्य के साढ़े 23 जिलों में ही झारखंड सरकार का राज है, आधा जिला यानी जमशेदपुर में टाटा का राज है. जिसे समाप्त कर यहां के लोगों को तीसरे मत का अधिकार मिले, ताकि यहां के लोगों को समान नागरिक सुविधाएं मिल सकें.

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 मुख्यमंत्री सह नगर विकास मंत्री हेमंत सोरन के नाम स्मार पत्र सौंपा

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टाटा लीज समझौते के अनुरूप जमशेदपुर के सभी नागरिकों को जनसुवधिाएं उपलब्ध करने के संबंध में राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए सरयू राय ने मंगलवार को जमशेदपुर में पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त कार्यालय पर धरना दिया. धरना के उपरांत मुख्यमंत्री सह नगर विकास मंत्री हेमंत सोरन को संबोधित एक स्मार पत्र भी उपायुक्त को सौंपा गया. इस स्मार पत्र के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं-

  • देश में जमशेदपुर एक ऐसा शहर है, जहां नगरपालिका स्वशासन की व्यवस्था नहीं है.
  • नगर निकाय व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए संविधान के 74वें संशोधन के बाद भी यहां संविधान के अनुच्छेद 243 ‘फ’ के मुताबिक नगर निगम/औद्योगिक नगर का गठन नहीं हो पाया है. इसके पूर्व भी ऐसी व्यवस्था नहीं थी.
  • जमशेदपुर में नगरपालिका के नाम पर जेएनएसी की व्यवस्था चल रही है, जो असंवैधानिक है.
  • नगरपालिका के अभाव में जमशेदपुर के नागरिकों को नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी तत्कालीन बिहार सरकार और टिस्को (टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी) के बीच 1985 में हुए टाटा लीज समझौता के प्रासंगिक प्रावधानों के मुताबिक टिस्को पर थी.
  • 2005 में टाटा लीज समझौते का नवीकरण झारखंड सरकार के मुख्य सचिव और टाटा स्टील लि के प्रबंध निदेशक के हस्ताक्षर से हुआ.
  • टाटा लीज समझौता में  उल्लेख है कि कंपनी नागरिक सुविधाएं पूरे जमशेदपुर के नागरिकों को उपलब्ध करायेगी. अपने खर्चे पर उपलब्ध करायेगी और नागरिकों से उतना ही शुल्क वसूल करेगी, जितना झारखंड सरकार अपनी नगरपालिकाओं के लिए समय-समय पर तय करेगी.
  • समझौते में यह प्रावधान नहीं है कि यदि किसी नागरिक को जनसुविधाओं के संबंध में कोई शिकायत है तो उसके निराकरण के लिये वह कहां जायेगा.  उसकी सुनवाई और उसका निदान कौन करेगा.
  • पानी, बिजली सदृश नागरिक सुविधाएं देते समय नागरिकों से इनकी स्थापना का एकमुश्त शुल्क नहीं वसूला जाेये. यह नीतिगत निर्णय सरकार करे.
  • टाटा लीज समझौता हुए 37 वर्ष और इसका नवीकरण हुए 17 वर्ष होने जा रहा है. परंतु आज तक जमशेदपुर के सभी इलाकों तक जनसुविधाएं नहीं पहुंच सकी है. पानी, बिजली, सफाई, जल-मल निकासी जैसी अत्यंत आवश्यक नागरिक सुविधाओं का घोर अभाव है. शहर में ध्वस्त जल-मल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करना और बस्ती क्षेत्रों में जहां यह व्यवस्था नहीं है, वहां इसे स्थापित करना अति आवश्यक हो गया है. यह कार्य हर हालत में अतिशीघ्र किये जाएं.
  • जमशेदपुर पूर्वी विधान सभा क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति की मुख्यतः दो व्यवस्थाएं हैं. एक कंपनी द्वारा की गयी व्यवस्था और दूसरी सरकार द्वारा की गयी मोहरदा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था, जिसका संचालन कंपनी द्वारा सरकार के सहयोग से किया जा रहा है. दोनों ही व्यवस्थाओं की गंभीर त्रुटियों की ओर मैंने नगर विकास विभाग, जेएनएसी और कंपनी का ध्यान आकृष्ट किया है. इन शिकायतों का शीघ्र निराकरण किया जाये.
  • नागरिक सुविधाओं, खासकर पेयजल एवं जल-मल निकासी के बारे में सुविधा प्रदाताओं को टाटा लीज के प्रावधानों के संबंध में व्यवहारिक. संवेदनशील एवं मानवीय दृष्टिकोण रखना होगा. पेयजल आपूर्ति मामले में छायानगर से लेकर बाबूडीह-लाल भट्ठा इलाका तक, जोजोबेडा एवं निकटवर्ती क्षेत्र, केबुल टाउन क्षेत्र तथा जल-मल निकासी मामले में ब्राह्मण टोला, भुंइयाडीह ग्वाला बस्ती इलाका, पंजाबी रिफ्यूजी कॉलोनी, देवनगर इलाका आदि क्षेत्रों में कंपनी द्वारा अपनाये गये रवैये में इसका घोर अभाव दिख रहा है. आप कृपया अपने स्तर से हस्तक्षेप करें और ऐसा होना सुनिश्चित करें.
  • बिजली आपूर्ति मामले में टाटा लीज क्षेत्र एवं लीज से बाहर क्षेत्र की बस्तियों में कंपनी दोहरा मापदंड अपना रही है. लीज समझौते के अनुसार सभी बस्ती क्षेत्रों एवं गैर बस्ती क्षेत्रों को बिजली की सुविधा उपलब्ध कराना कंपनी का दायित्व है. परंतु लीज समझौते होने के 36 वर्ष और इसके नवीकरण के 17 वर्ष बाद भी यह नहीं हो सका है. कंपनी जमशेदपुर के बाहर के नागरिकों को बिजली उपलब्ध करा रही है, परंतु लीज समझौता में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद जमशेदपुर की सभी बस्तियों की बात तो दूर अपने लीज क्षेत्र की बस्तियों में भी बिजली नहीं दे रही है. यह व्यवस्था की जाये कि जमशेदपुर का जो कोई भी व्यक्ति कंपनी की बिजली लेना चाहे, तो उसे यह सुविधा दी जायेगी.
  • एक ओर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में कोताही हो रही है तो दूसरी ओर इनके स्थापन शुल्क में बढ़ोतरी हो रही है. जमशेदपुर पूर्व की बस्तियों एवं अन्य क्षेत्रों में होल्डिंग्स टैक्स की व्यवस्था नहीं हो पायी है. जहां है, वहां इसमें भारी वृद्धि हुई है. होल्डिंग्स व्यवस्था मालिकाना अधिकार की दिशा में एक ठोस कदम है. बस्तियों को इससे आच्छादित किया जाये और जहां है, वहां होल्डिंग टैक्स की वृद्धि वापस ली जाये.
  • बस्तियों को मालिकाना हक देने की मांग जमशेदपुर में लंबे समय से की जा रही है. जिन लोगों ने बस्तीवासियों की इस मांग को बड़ा मुद्दा बनाया वे समय आने पर मुकर गये. राज्य में शीर्ष पद पर बैठने के बाद निहित स्वार्थ में इसका सौदा कर लिया और लीज का झुनझुना थमा दिया. बस्तीवासियों को मालिकाना हक देने के लिए एक नियम बनाने की दिशा में आप ठोस निर्णय लें, ताकि राज्य में सभी योग्य व्यक्तियों को उनके आशियाना का मालिकाना मिल सके.
  • ट्रैफिक के प्रकोप से जनता को बचाने के लिये टाटा स्टील, टाटा मोटर्स एवं अन्य उद्योगों के भारी वाहनों को शहर से सीधे बाहर निकलने की योजनाओं को सरकार जल्द लागू करें. इनमें से दो योजनाएं प्रमुख हैं. एक, टाटा मोटर्स से गोविंदपुर ऊपरी पुल के माध्यम से भारी वाहनों को सीधे बाहर निकालना तथा दूसरा लिट्टी चौक से नदी पार कर डीपीएस होते हुए भारी वाहनों को सीधे शहर से बाहर निकालना. इसके अतिरिक्त शहर के भीतर भीड़भाड़ वाले इलाकों में ऊपरी पुल का निर्माण करना निहायत जरूरी है. इसके लिए चिन्हित एवं लंबित परियोजनाओं को शीघ्र लागू करने का निर्देश दें.

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