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जमशेदपुर : पंचायत चुनाव-2022, बागबेड़ा-कीताडीह क्षेत्र में पानी की समस्या बना मुख्य चुनावी मुद्दा, प्रत्याशी कर रहे हैं जलापूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने का जनता से वायदा

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Jamshedpur : त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव-2022 का बिगुल बजते ही जिले के जिन क्षेत्रों में चुनावी सरगर्मी तेजी से बढ़ने लगी थी, उसमें जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्र संख्या-8 खासतौर पर शामिल है. इस क्षेत्र में बागबेड़ा और कीताडीह शामिल है. यूं तो वर्षों से इन दोनों क्षेत्रों में बिजली, पानी, सड़क और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग उठती आई है, लेकिन फिलहाल क्षेत्र के लोगों की सबसे बड़ी समस्या पानी की समस्या है.

गर्मी में पानी के साथ बिजली की समस्या

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खासकर, गर्मी के इस मौसम में क्षेत्र के लोगों की पानी की समस्या हर साल की तरह गंभीर रूप धारण कर चुकी है. रही बात बिजली की समस्या तो इस समस्या से भी क्षेत्र के लोग कम नहीं जूझ रहे हैं. बावजूद इसके पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्र की बिजली व्यवस्था में सुधार हुई है और यह प्रक्रिया आगे भी जारी है. पिछले दिनों क्षेत्र में जो बिजली संकट उत्पन्न हुआ था, उसकी वजह थी कि विभाग के तेनुघाट यूनिट में आयी खराबी थी. इससे बागबेड़ा-कीताडीह के ही नहीं, बल्कि पूरे जमशेदपुर के साथ कोल्हान भर में बिजली संकट उत्पन्न हुआ था. उसके बाद फिर से स्थिति सामान्य हो चुकी है, लेकिन पानी की समस्या का यह हाल है कि क्षेत्र में महीने भर में करीब पंद्रह दिन भी किसी तरह पानी की सप्लाई हो जाय तो बहुत है. वह भी ऐसा पानी जिससे नहाने और घर का काम तो किया जा सकता है, लेकिन पीने के लिये सीधे उपयोग में लाना मुश्किल होता है.

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रुपये देकर लोग खरीदते है पानी

इस स्थिति में लोग या तो रुपये देकर पीने का पानी खरीदने पर मजबूर हैं या किसी समाजसेवी या जुस्को की ओर से टैंकर से पानी की आपूर्ति की जाय, तब जाकर ही उन्हें थोड़ी-बहुत राहत मिल पाती है. दूसरी तरफ पंचायत चुनाव को लेकर चुनावी मैदान में जिला परिषद से लेकर पंचायत समिति सदस्य और वार्ड मेंबर तक के प्रत्याशी आमने-सामने हैं. सभी प्रत्याशियों ने जोरशोर से अपना चुनावी अभियान शुरु कर दिया है. क्षेत्र की जनता को अपने पक्ष में गोलबंद करने की जी-तोड़ कोशिश की जा रही है. इस बीच पूरे क्षेत्र में पानी की समस्या ही मुख्य चुनावी मुद्दा बनकर उभरा है. प्रत्याशी चाहे किसी भी पद के हो, चुनावी अभियान के तहत जनता के बीच पहुंचने पर उनसे एक ही सवाल पूछा जा रहा है. वह सवाल है क्षेत्र की जलापूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने के लिये उनके पास किस तरह की योजना है. वहीं प्रत्याशी भी अपनी सोंच और योजना के अनुसार क्षेत्र की जनता से जलापूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने का वायदा कर रहे हैं.

जल सहिया कमिटी करती है व्यवस्था का संचालन

बता दें कि वर्ष 2010 में क्षेत्र में पंचायत का गठन हुआ था. उसके दो-तीन वर्ष बाद ही क्षेत्र की जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन का जिम्मा जल सहिया कमिटी को दे दिया गया था. हालांकि, जलापूर्ति पहले की तरह पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से की जाती है, लेकिन इसके एवज में शुल्क वसूली और मेंटेनेंस का जिम्मा जल सहिया कमिटी की ही है. इस बीच गर्मी के मौसम में विभाग का मोटर पंप जल जाने की समस्या लगातार आती रहती है. इससे क्षेत्र की जलापूर्ति व्यवस्था ज्यादातर बाधित होती है. इसके अलावा बागबेड़ा जलापूर्ति योजना का वर्षों बाद धरातल पर नहीं उतरना तो क्षेत्र के लोगों की सबसे बड़ी समस्या है.

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