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Jamshedpur Panchayat Election : वादों के ओवरडोज से मतदाता खामोश, चुप्‍पी ने बढ़ायी प्रत्‍याश‍ियों की धुकधुकी 

 हाल झारखंड के अनोखे प्रखंडों में शामिल जुगसलाई सह गोलमुरी प्रखंड का, चौथे चरण में 27 को होना है मतदान

Raj kishor
Jamshedpur : पंचायत चुनाव-2022 अपने आखिरी चरण की ओर तेजी से बढ़ रहा है. जिले के जुगसलाई सह गोलमुरी प्रखंड क्षेत्र 27 मई को चौथे चरण का मतदान होना है. इसे लेकर सभी पदों के प्रत्याशियों ने जनता को रिझाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इसके लिए सड़कों और गली-मुहल्लों को पोस्टर और बैनर से तो पाट ही दिया गया है, साथ ही, घर-घर जाकर जनसंपर्क करने के साथ व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्वीटर तक का सहारा लिया जा रहा है. बावजूद इसके मतदाताओं ने चुप्पी साध रखी है. इससे प्रत्याशियों की धुकधुकी बढ़ गई है.

Sanjeevani

बता दें कि जुगसलाई सह गोलमुरी प्रखंड, जिसे जमशेदपुर सदर प्रखंड के रुप में भी जाना जाता है. 55 पंचायतों वाला यह प्रखंड झारखंड के अनोखे प्रखंडों में एक माना जाता है. इस प्रखंड में 35 पंचायत अर्ध शहरी क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं, जबकि शेष 20 पंचायत ग्रामीण परिवेश को समाहित किये हुये हैं. इस लिहाज से पर्याप्त फंड आने के बावजूद क्षेत्र का विकास उस ढ़ंग से नहीं हो पाता है, जिस ढ़ंग से वास्तव में होना चाहिये.
यह है स्थिति
जानकारों की मानें तो इसकी बड़ी वजह बागबेड़ा के अलावा गोविंदपुर, घाघीडीह, कालीमाटी (परसुडीह), सुसनीगढ़िया (गोलपहाड़ी) समेत 35 पंचायतों को अर्ध शहरी क्षेत्र में शामिल करना ही है. इन पंचायतों में अधिकांश उस तरह के पंचायत शामिल हैं, जहां कृषि के क्षेत्र में विकास के लिए फंड तो आता है, लेकिन खेती योग्य जमीन की ही कमी है. फिर कृषि उस क्षेत्र के विकास के लिये काम कैसे हो पाएगा. नतीजन क्षेत्र में तालाब, ट्यूबवेल, मनरेगा, मुर्गी पालन, सुकुट पालन, गौपालन तक का फंड आकर लौट जाता है. जानकारों की मानें तो इनमें से अधिकांश क्षेत्रों का विकास तभी संभव है जब उन्हें नगरपालिका क्षेत्र में शामिल किया जाय. हालांकि, ऐसा नहीं की वजह से क्षेत्र का विकास कार्य नालियों के निर्माण तक ही सीमित होकर रह जाता है. साथ ही, इस परिस्थिति में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलने की संभावना भी हमेशा बनी रहती है.
पानी-बिजली के साथ शिक्षा के क्षेत्र में विकास बना मुद्दा
रही बात क्षेत्र के चुनावी मुद्दे की तो पानी की समस्या पहले से ही पूरे प्रखंड का मुख्य चुनावी मुद्दा बना हुआ है. इसके अलावा बिजली, सड़क व अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार के साथ क्षेत्र में शिक्षा का विकास भी पूरे प्रखंड में खास चुनावी मुद्दा बना हुआ है. जाननेवाली बात यह है कि बागबेड़ा के अलावा गोविंदपुर, घाघीडीह, कालीमाटी (परसुडीह), सुसनीगढ़िया (गोलपहाड़ी) तो इस प्रखंड में शामिल है ही, एनएच-33 के हुरलुंग और मनपीटा जैसे पंचायत भी इस प्रखंड में आते हैं.
क्या कहते हैं प्रत्याशी
वहां की रहनेवाली शांति मुर्मू मुखिया प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में भाग्य आजमा रही है. वह और उनके पति टाटा मोटर्स कंपनी में कार्यरत हैं. उनका कहना है कि विभिन्न संस्थानों के सहयोग से क्षेत्र में शिक्षा और चिकित्सा के साथ पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने की दिशा में काम करना उनका मुख्य उद्देश्य है. दूसरी ओर इसी प्रखंड में बागबेड़ा निर्वाचन क्षेत्र संख्या-आठ भी शामिल है. वहां जिला परिषद के रूप में यूं तो करीब दस प्रत्याशी चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं. इसमें निवर्तमान जिला परिषद किशोर यादव की पत्नी लक्ष्मी देवी के अलावा विभिन्न संगठनों से जुड़ी कविता परमार और बन्ना गुप्ता फैंस क्लब के अध्यक्ष अनिल सिंह की पत्नी संगीता सिंह भी शामिल है. वे भी बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ शिक्षा के क्षेत्र में विकास पर खास जोर देने की बात कह रही है. उधर कविता परमार के पास भी इलाके के कायाकल्प करने का मास्टर प्लान है. इसे दिखाकर वह मतदाताओं रिझाने में जुटी हुई है. बताते चलें कि कविता परमार वर्ष 2010 में भी जिला परिषद रूप में चुनावी मैदान में भाग्य आजमा चुकी. उस दौरान वह बेहद कम मतों के अंतर से दूसरे स्थान पर रही थी. इस बार अन्य कुछ प्रत्याशियों की तरह चुनावी समीकरण अपने पक्ष में बनाने को लेकर उन्होंने भी अपनी सारी ताकत झोंक दी है. आगे सभी प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करना जनता के हाथ में है.

MDLM

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