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Jamshedpur News: ईश्वर की जादू की छड़ी और सबकी दुआ काम आई, हम तो महज माध्यम, जान‍िए क‍िसने, क्‍यों कही ये बात

Jamshedpur: ब्रह्यानंद अस्पताल में नन्हीं ज्योति के दिल के पांच घंटे के जटिल ऑपरेशन और उसके बाद 48 घंटों का आब्‍जरवेशन  महज उसके माता – पिता के लिए भारी नहीं था बल्कि पूर्व विधायक सह नाम्या फाउंडेशन के संस्थापक कुणाल षाड़ंगी का दिल भी बेचैनी से धड़क रहा था.आखिर इस नन्ही जान के इलाज के लिए उनकी टीम तीन महीने से लगी हुई थी ऑपरेशन से पहले उन्होंने फेसबुक पर एक भावुक अपील भी की जिसमें ज्योति के लिए सबकी दुआ मांगी गई थी. तब उन्होंने लिखा था – जीवन में कई बार ऐसे पल आते हैं जब आपकी काबिलियत, मेहनत, पकड़, अकड़, पावर, पद सब बेकार और अप्रासंगिक से लगते हैं.अगर किसी एक चीज से ताकत मिलती है तो वो है ईश्वरीय शक्ति या divine intervention. बिल्कुल संपूर्ण समर्पण और अटूट आस्था की एक जादू की छड़ी चलेगी और सब ठीक हो जाएगा.ज्योति के दिल में छेद है और एक अविलंब ऑपरेशन ही उसके जीवित रहने की गारंटी है. कुछ देर में ऑपरेशन शुरू होगा. कहते हैं दुआओं में बहुत ताकत होती है. आईए, हम सब मिलकर बेटी ज्योति के जल्द स्वस्थ होने की ईश्वर से प्रार्थना करें.
ज्योति का ऑपरेशन सफल रहा, 48 घंटे का ऑब्‍जरवेशन था
ज्योति का ऑपरेशन सफल रहा. डा परवेज आलम ने ज्योति का ऑपरेशन किया. ऑब्‍जरवेशन के 48 घंटे महत्वपूर्ण थे और अब ज्योति पूरी तरह स्वस्थ है. कुणाल षाड़ंगी, टीम नाम्या के सदस्यों पूर्णेंदु पात्र और चिन्मयी पात्र के साथ ज्योति को देखने ब्रह्यानंद अस्पताल गए जहां नन्हीं जान के माता- पिता से मुलाकात की. बकौल कुणाल षाड़ंगी- ईश्वर ने सबकी प्रार्थना सुनकर अपनी जादू की छड़ी घुमा दी. मैं तो बस एक माध्यम हूं. हां इस बात का संतोष है कि पिछले तीन महीनों की मेहनत रंग लाई और बेटी ज्योति को जीवन मिल गया.उसके माता – पिता के चेहरे की चमक देखना ही असली खुशी है. ज्योति के माता- पिता ने कुणाल षाड़ंगी का हृदय से आभार जताया है.उन्होंने कहा कि परिवार ने ज्योति के बेहतर इलाज की आशाएं छोड़ दी थीं,  मगर कुणाल षाड़ंगी भगवान बनकर सामने आए. ज्योति के पिता फलूश हांसदा ने कुणाल षाड़ंगी से कहा- सर, मैं आपलोगों का कैसे शुक्रिया अदा करूंं,  जन्म तो मैंने अपनी बेटी को दिया पर उसको जिंदगी देनेवाले आपलोग हो. मुझे आप पर गर्व है सर.
मुसाबनी की ज्योति की तरफ तीन महीना पहले नाम्या ने बढ़ाए थे मदद के हाथ
मुसाबनी के केंदाडीह जानेगोरा गांव के फलूश हांसदा की 10 महीने की मासूम ज्योति हांसदा के दिल में छेद था. अत्यंत ही गरीब परिवार के पास न तो राशन कार्ड था और न आयुष्मान कार्ड. उस पर आंगनबाड़ी सेविका द्वारा उचित ध्यान न देने से बच्ची की तबियत के बारे में जानकारी होने में परिजनों को काफी देर हो गई थी. तबियत बिगड़ने पर पहले घाटशिला और फिर जमशेदपुर के ब्रह्यानंद लाया गया तो पता चला कि दिल में छेद है. जबकि आंगनबाड़ी सेविका ने अपनी रिपोर्ट में बच्चे को सामान्य बताया था. इसी बीच जादूगोड़ा की एक सामाजिक कार्यकर्ता लीताराम मूर्मू ने प्रदेश भाजपा प्रवक्ता सह नाम्या स्माइल फाउंडेशन के संस्थापक और पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी को इस मामले की जानकारी दी. कुणाल षाड़ंगी ने नाम्या फाऊंडेशन के माध्यम से मदद का बीड़ा उठाया. कुणाल ने पीड़ित परिवार के घर दौरा भी किया और परिजनों से तमाम जानकारियां एकत्रित करके मदद का भरोसा दिया. कुणाल ने आश्वस्त किया कि नाम्या फाउंडेशन बच्ची के चिकित्सा का खर्च उठाएगा. लेकिन कई चुनौतियां थीं.पीड़ित परिवार के पास राशन कार्ड न होने से आयुष्मान कार्ड नहीं बन पाया था.टीम नाम्या की मदद से पहले राशन कार्ड बना और फिर आयुष्मान कार्ड बनवाया गया. इससे ऑपरेशन के चार लाख की तो चिंता दूर हो गई ,लेकिन महंगी जांच प्रक्रिया में भी काफी खर्च होने थे,  जिसका बीड़ा नाम्या फाउंडेशन ने उठाया. इस प्रकार तीन महीने की मशक्कत के बाद अंततः ब्रह्यानंद अस्पताल, तामोलिया में नन्हीं ज्योति का ऑपरेशन पूर्णतया सफल रहा. अगले तीन- चार दिनों में उसे अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद है.

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