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जमशेदपुर: बढ़ते अपराध ने तोड़ा तीन साल का रिकार्ड, 2019 में हुए सबसे अधिक आपराधिक मामले

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Jamshedpur: सूबे की आर्थिक राजधानी कहलाने वाले जमशेदपुर में पिछले तीन सालों की तुलना में वर्ष 2019 में सबसे अधिक आपराधिक मामले सामने आये हैं.

वर्ष 2016 में 3009, वर्ष 2017 में 2813, वर्ष 2018 में 3183 और वर्ष 2019 में पिछले तीन वर्षों की तुलना में 4109 आपराधिक मामले सामने आये. इस आंकड़े के मुताबिक औसतन हर महीने जमशेदपुर में छोटे-बड़े 342 अपराधिक मामले हुए हैं.

जमशेदपुर में अपराध का ग्राफ दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. अपराधियों के हौसले बुलंद हैं. यही कारण है कि हर रोज शहर के किसी न किसी इलाके में हत्या, चोरी और छिनतई जैसी घटनाएं हो रही हैं. राह चलते लोगों को अपराधी अपना निशाना बना रहे हैं.

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हर महीने हो रही औसतन 7 हत्याएं

शहर में अपराधी बेलगाम हैं. बेखौफ अपराधी घटना को अंजाम देकर निकल जाते हैं और पुलिस हाथ मलती रह जाती है. झारखंड पुलिस के आंकड़े के अनुसार जमशेदपुर में वर्ष 2019 में 83 हत्या की घटना हुई. अधिकतर हत्या की घटना आपसी विवाद ,जमीन विवाद और अवैध संबंध के कारण हुई है.

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गैंगवार थमा पर चोर-उचक्के हुए बेलगाम

शहर में हाल के दिनों में गैंगवार में तो कमी आयी है, लेकिन चोरी और छिनतई की घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गयी है. महिलाओं और युवतियों से बैग और मोबाइल की छिनतई की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं.

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औसतन हर एक दिन बाद चोरी और छिनतई की रिपोर्ट दर्ज करायी जा रही है. अपराधियों के बढ़े मनोबल का आलम यह है कि दिनदहाड़े छिनतई की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा.

शहर की मुख्य सड़कों पर पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे तो जरूर लगाये हैं लेकिन खुफिया तंत्र की नाकामी और पुलिस की कार्यप्रणाली के कारण बदमाश पकड़ से दूर हैं.

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क्राइम जोन बन चुके हैं वीआइपी इलाके

शहर से जुड़े ग्रामीण क्षेत्र तो दूर, वीआइपी इलाके भी सुरक्षित नहीं हैं. हाल के महीनों में हुई घटनाओं पर नजर डालें, तो अपराधियों ने साकची, बिष्टुपुर, टेल्को जैसे इलाके को टारगेट बनाया है. शाम ढलते ही चोरी की घटनाएं होने लगती हैं. घर बंद कर थोड़ी देर के लिए बाहर जाने में भी लोग डरने लगे हैं.

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