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Jamshedpur : सरायकेला में सबरों के बीच काम करनेवाली पूर्व आइएएस सुचित्रा सिन्हा बनीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्पेशल रैपोटियर

Jamshedpur : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने झारखंड की सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी सुचित्रा सिन्हा को झारखंड के स्पेशल रैपोटियर के रूप में चयनित किया है. रैपोटियर एक फ्रांसीसी शब्द है, जिसका अर्थ विशेष दूत होता है. स्पेशल रैपोटियर को राष्ट्रीय मानवाधिकार का आंख, कान और दिल भी कहा जाता है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने देश के विभिन्न राज्यों के लिए कुल 12 लोगों का चयन किया है. इनमें दस भूतपूर्व पुलिस महानिदेशक और दो अवकाश प्राप्त आइएएस अधिकारी हैं.

पूर्व में झारखंड से पूर्व आइएएस अधिकारी विनोद अग्रवाल और सुनीला बसंत इस पद पर काम कर चुके हैं. इस पद का दायरा बहुत ही व्यापक है. इन्हें केंद्र और राज्यों में जेलों, सुधार गृहों, आदिवासी कल्याण, मानव तस्करी, बाल मजदूरी, बंधुआ मजदूरी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ी जातियों से संबंधित मानवाधिकार हनन के मामलों की जांच करने का अधिकार है. सुचित्रा सिन्हा इससे पहले सरायकेला-खरसावां जिले में सबर जनजाति के बीच कार्य करती रही हैं और सबर आर्टीजनों (शिल्पकारों) के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें नीति आयोग और संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से वीमेन ट्रांसफार्मिंग इंडिया अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है.

यह एक बड़ी जिम्मेदारीः सुचित्रा सिन्हा
झारखंड के लिए स्पेशल रैपोटियर के रूप में चयनित होने पर सुचित्रा सिन्हा ने कहा कि यह एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसका निर्वहन वे पूरी तन्मयता के साथ करेंगी. साथ ही उनकी प्राथमिकता झारखंड के ग्रामीण इलाकों को महिला उत्पीड़न और डायन जैसी समस्याओं से महिलाओं को निजात दिलाना और जेलों में कैदियों की दशा में सुधार लाना है.

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