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#EconomicSlowDown : टाटा मोटर्स में जारी रहेगा ब्लॉक क्लोजर, टाटा स्टील से 16 कर्मियों की होगी छुट्टी

मांग में सुधार नहीं, साल के आखिरी दो महीने में 20 दिन और होगा क्लोजर, टाटा स्टील में सरप्लस के नाम पर 16 कर्मचारियों की होगी छुट्टी

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Abinash Mishra

Jamshedpur : टाटा मोटर्स में वाहनों की मांग में फेस्टिव सीजन में भी कोई सुधार नहीं हुआ. एक बार फिर कंपनी ने 18 और 19 अक्टूबर को ब्लॉक क्लोजर का फैसला लिया है.

20 अक्टूबर को रविवार होने के कारण सार्वजनिक छुट्टी है. 21 अक्टूबर को कंपनी खुलेगी, इसके साफ संकेत अभी तक नही मिले हैं. संभावना है कि कंपनी 22 अक्टूबर को खुलेगी.

चर्चा तो ये भी है की कंपनी साल के खत्म होते तक 18 दिन का और ब्लॉक क्लोजर कर सकती है. यदि ऐसा होता है तो 2019 में टाटा मोटर्स में कुल ब्लॉक क्लोजर 40 दिन का हो जायेगा.

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ये कहा जा सकता है की टाटा मोटर्स में सार्वजिनक छुट्टी को छोड़ कर पूरे साल में डेढ महीने के लिए काम ठप रहा जिसका सीधा कारण मांग में आयी गिरावट को माना जा सकता है.

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त्यौहारों में भी नहीं आयी मांग में तेजी

फेस्टिव सीजन में भी ऑटोमोबाइल सेक्टर को अच्छा रिस्पांस नहीं मिला है. सभी कंपनियों के साथ-साथ टाटा मोटर्स की डिमांड में भी गिरावट देखने को मिली है. जबकि मांग में तेजी के लिए ऑटोमोबाइल सेक्टर को फेस्टिव सीजन से काफी उम्मीद थी.

अब सबकी निगाहें दिपावली की बिक्री पर टिक गयी हैं. टाटा मोटर्स ने पहले ही उत्पादन को 5000 युनिट प्रतिमाह से घटा कर सीधे 2500 यूनिट प्रति माहन कर दिया था.

अब कंपनी उत्पादन को और कम करने का मन बना रही है. ऐसी खबरें हैं कि कंपनी उत्पादन को 1000 यूनिट प्रति महीने तक सीमित कर सकती है.

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टाटा स्टील के ब्लास्ट फर्नेस से 16 कर्मियों की होगी छुट्टी

टाटा स्टील के जी ब्लास्ट फर्नेस डीवीजन से भी 16 कर्मियों को नौकरी से निकालने की कवायद तेज हो गयी है. इसके पीछे कहा जा रहा है की इस विभाग में कर्मी जरूरत से ज्यादा हैं.

अभी इस डिविजन में कुल 79 कर्मी काम कर रहे हैं लेकिन मैनेजमेंट ने 63 लोगों के ही जरूरत की सिफारिश की है जिस पर मुहर लगनी बाकी है. पाइनल लिस्ट जारी होने में अभी कुछ वक्त लग सकता है.

राजनीति के शिकार होंगे कई कर्मी

ये तो तय है कि सरप्लस पूल में किसका नाम होगा इस पर राजनीति होगी. ऐसा माना जा रहा है की यूनियन अध्यक्ष आर रवि प्रसाद के जो करीबी हैं उनको खतरा नहीं होगा.

ऐसे में जो लोग काम करने वाले हैं या फिर कानाफुसी से कोई सरोकार नहीं रखते, गाज उनपर ही गिर सकती है. हालांकि मैनेजमेंट ने वर्किंग परफॉरमेंस के आधार पर सरप्लस पूल में नाम डालने की बात कही है.

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