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जमशेदपुरः एक दिन में हुई 153 एमएम की बारिश से शहर बेहाल, एमजीएम अस्पताल समेत कई अपार्टमेंट में घुसा पानी

Jamshedpur: लगभग 24 घंटे में 153 एमएम की बारिश क्या हुई पूरे जमशेदपुर में पानी भर गया. टाटा कंपनी शहर के मेंटेनेंस में हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है. एमजीएम अस्पताल और दफ्तरों में बाढ़ जैसे हालात दिखाई दिये. लोगों को बस्ती और अपार्टमेंट तक छोड़ कर भागना पड़ा. जी हां ये हाल है उस शहर का है जिसका रख-रखाव टाटा कंपनी करती है. जो दावा करती है कि शहर को खूबसूरत रखने में कंपनी कोई कसर नहीं छोड़ती. हर साल शहर के सौंदर्यीकरण में टाटा दो करोड़ रुपये खर्च करती है, जिसका 40 फीसदी हिस्सा सीवरेज-ड्रेनेज को मेंटेन करने में खर्च होता है. बीते पांच सालों में टाटा ने केवल नालों की सफाई और मरम्मत में 4 करोड़ से ज्यादा खर्च किया है. लेकिन एक दिन की बारिश ने टाटा के सारे दावों को बहा कर रखा दिया.

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सोनारी जैसी पॉश कॉलोनी में बरसात से पहले ही 6 लाख रुपये खर्च कर बड़े नालों को दुरुस्त कराया गया था. पर बारिश ने सबसे ज्यादा कदमा और सोनारी को ही प्रभावित किया. इन दोनों इलाकों से पानी निकलने में 18 घंटे से ज्यादा का वक्त लगा. रात भर लोग भूखे प्यासे रहे या फिर घर छोड़ कर ऱिश्तेदारों के यहां चले गये. जब इन इलाकों में हालात घर छोड़ने के बन गये तो जरा सोचिए कि निचले इलाकों में बारिश ने किस कदर कहर बरसाया होगा.

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शहर की क्या है समस्या

शहर की सबसे बड़ी चुनौती है 50 फीसदी से ज्यादा इलाकों में ऑरगेनाइज्ड ड्रेनेज सिस्टम का अभाव. बागबेड़ा, नया बस्ती, सोनारी और कदमा के कुछ इलाके निचले स्तर पर हैं, जहां थोड़ी बारिश में ही कॉलोनी में जल जमाव हो जाता है. इसके अलावा कई जगहों पर भारी अतिक्रमण के चलते भी पानी की निकासी नहीं हो पाती है. पानी निकलने के रास्ते पर बने बड़े अपार्टमेंट के चलते भी ड्रेनेज पूरा नहीं हो पाया है.

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खरकई और स्वर्णरेखा नदियों पर टाटा का कोई ध्यान नहीं

भले ही शहर के मेंटेनेस पर टाटा खर्च करती है, लेकिन टाटा खरकई और स्वर्णरेखा नदी को मेंटेन करने पर ध्यान नहीं देती. ये सारा काम राज्य सरकार के हवाले है. शहर के अंदर अतिक्रमण और कचरे के चलते दोनों नदियां शहर के अंदर संकरी हो गयी हैं. थोड़ी बारिश में भी इन नदियों का जल स्तर तेजी से बढ़ जाता है. तेज बहाव के बीच शहर का पानी आसानी से इन निदियों में नहीं जा पाता. लिहाजा घरों-अस्पतालों में पानी घुसता तो है ही साथ ही निकलने में पानी को काफी वक्त भी लगता है. इस बार 48 लाख रुपये के दो मोटर पंप सेट खरीदे गये और दोनों सेट को उन इलाकों में लगाया गया जहां नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी का पानी बस्तियों में घुस जाता है.

क्या कहते हैं सरयू रय

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शहर के विधायक और सरकर में मंत्री सरयू रय ने जल संसाधन विभाग समेत, जुस्को और डीसी रविशंकर शुक्ला के साथ बैठक की और समस्या के निदान पर अविलंब परामर्शी दल का गठन करने की बात कही. मौसम विभाग ने 23 और 24 अगस्त को भारी बारिश की संभावना जतायी है.

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