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जम्‍मू कश्‍मीर : पांच सालों में शहीद होने वाले जवानों की संख्‍या 94 फीसदी बढ़ी  

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New Delhi : छत्‍तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के बाद श्रीनगर के पुलवामा में सीआरपीएफ पर दूसरा सर्वाधिक भयावह हमला है. 2010 में नक्‍सली हमले में दंतेवाड़ा में 75 सीआरपीएफ के जवान शहीद हुए थे. गृह मंत्रालय में गृहराज्‍य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने 5 फरवरी 2019 को लोकसभा में दिये गये जवाब में बताया कि पांच सालों में (2014-19)के बीच हुए आतंकी हमले में शहीद जवानों की संख्‍या में 94 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. साल 2014 से 2018 के बीच कुल 1,708 आतंकी हमले हुए जिनमें 339 जवान श्‍हीद हुए. केंद्रीय गृह राज्‍य मंत्री के बयान की माने तो साल 2014 में जहां 47 जावन शहीद हुए वहीं साल 2018 में शहीद जवानों की संख्‍या बढ़ कर 91 हो गया. वहीं हुए हमले की तुलना 2014 से करें तो जम्‍मू कश्‍मीर में शहीद जवानों की संख्‍या में 94 फीसदी का इजाफा हुआ.

2014 से 2018 के बीच जम्मू कश्मीर में शहीद हुए जवान. (स्रोत: लोकसभा)

बीते चार सालों मे जम्‍मू कश्‍मीर में आतंकी हमलों की घटनाओं में 177 फीसदी का इजाफा हुआ. 2014 में जम्‍मू कश्‍मीर में 222 आतंक की घटनाएं हुई जबकि 2018 में यह संख्‍या 614 रही. 2014 से 2018 में जवानों के अलावा जम्‍मू में आंतकी हमले में 138 नागरिकों की मौत हुई. वहीं 2014 में आतंकी हमले में 28 नागरीक मारे गये. वहीं 2018 में 38 नागरीक आतंकी हमले के शिकार हुए.

जम्‍मू कश्‍मीर में बीते पांच सालों में 838 आतंकवादी मारे गये. वहीं 2014 में 110 जबकि 2018 में 257 आतंकी मारे गये. पांच सालों में आतंकवादियों को मारे जाने की घटना में 134 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए जवाब के मुताबिक बीते पांच वर्षों में आतंकवाद की सर्वाधिक घटनाएं 2018 में हुई हैं. 2017 की तुलना में 2018 में आतंकवाद की घटनाएं 80 फीसदी बढ़ी हैं. 19 जून 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू कश्मीर में 2017 तक 28 सालों में आतंकवाद की 70 हजार से अधिक घटनाएं हुई थीं. इस दौरान 22,143 आतंकवादियों को ढेर किया गया, 13,976 नागरिकों को जान गंवानी पड़ी और 5,123 जवान शहीद हुए.

 

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