NationalWorld

जम्मू-कश्मीर मसला :  पाकिस्तान यूएन में  बैकफुट पर, नौ देशों ने नहीं दिया समर्थन

NewDelhi : जम्मू कश्मीर के मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने में लगे  पाकिस्तान को यूएन में करारा  झटका लगा है. जान लें  कि  पाकिस्तान ने यूएन में कश्मीर के मुद्दे पर  बैठक बुलाने का आह्वान किया था. हालांकि पाकिस्तान को चीन का भी समर्थन मिला है. अब खबर आयी है कि पाकिस्तान को इस बैठक के लिए नौ देशों का समर्थन नहीं मिला है. बता दें कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने बीते दिनों इस माह के लिए काउंसिल अध्यक्ष पोलैंड के अधिकारियों को पत्र लिखकर जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर यूएन की बैठक बुलाने का आह्वान किया था. गुरुवार को खबर आयी थी कि चीन ने भी पाकिस्तान का समर्थन करते हुए कश्मीर मुद्दे पर यूएन की एक गुप्त बैठक बुलाने की मांग की है. जानकारी के अनुसार   यूएन की यह गुप्त बैठक शुक्रवार यानि कि आज हो सकती है.

ऐसा कभी नहीं हुआ कि संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था को बंद दरवाजे के पीछे बैठक करनी पड़े लेकिन पाकिस्तान के इशारे पर चीन के समर्थन से ऐसा हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में यह दूसरा मौका है जब कश्मीर मुद्दे पर कोई बैठक होने जा रही है. हालांकि यह बैठक 1971 की पहली बैठक से कई मायनों में आलग है. पहली बैठक न तो बंद दरवाजे के पीछे थी और न ही सुरक्षा परिषद् के अधिकतर सदस्य देशों ने पाकिस्तान का समर्थन करने से मना किया था. जान लें कि यूएनएससी में 1969-71 में सिचुएशन इन द इंडिया/पाकिस्तान सबकॉन्टिनेंट विषय के तहत कश्मीर का मुद्दा उठाया गया था.

इसे भी पढ़ें –  भारत में भी मंदी के आसार! पीएम मोदी ने वित्त मंत्री सीतारमण से की मंत्रणा

 संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में कुल 15 सदस्य हैं.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (यूएनएससी) में कुल 15 सदस्य हैं. इनमें 5 स्थाई और 10 अस्थाई हैं. अस्थाई सदस्यों का कार्यकाल कुछ वर्षों के लिए होता है जबकि स्थाई सदस्य हमेशा के लिए होते हैं. स्थाई सदस्यों में अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस शामिल हैं. अस्थाई देशों में बेल्जियम, कोट डीवोएर, डोमिनिक रिपब्लिक, इक्वेटोरियल गुएनी, जर्मनी, इंडोनेशिया, कुवैत, पेरू, पोलैंड और साउथ अफ्रीका जैसे देश हैं.  खबरों के अनुसार स्थाई सदस्यों में चीन को छोड़ बाकी के देशों-फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका ने पाकिस्तान को मना कर दिया है.  ये देश मानते हैं कि  कश्मीर मुद्दा हिंदुस्तान और पाकिस्तान का आंतरिक मसला है, इसलिए  इसमें  तीसरे पक्ष की दरकार नहीं.

कुल 10 अस्थाई देशों में पोलैंड अकेला राष्ट्र जो पाकिस्तान के साथ खड़ा दिख रहा है.  लेकिन यह उसकी राजनयिक विवशता  है.   पोलैंड चूंकि अभी  यूएनएससी का रोटेटिंग प्रेसिडेंट है, इसलिए उसके सामने बैठक कराना ही अंतिम विकल्प है. . इसका अर्थ यह कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि पोलैंड कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ है. वह किसी राष्ट्र के साथ नहीं है बल्कि अस्थाई देशों की ओर से बैठक की मेजबानी कर रहा है.

पोलैंड के अलावा बेल्जियम, कोट डीवोएर, डोमिनिक रिपब्लिक, इक्वेटोरियल गुएनी, जर्मनी, इंडोनेशिया, कुवैत, पेरू और साउथ अफ्रीका पाकिस्तान को पूरी तरह नकार चुके हैं. इन देशों से पाकिस्तान को धेले भर का समर्थन नहीं मिलने वाला. तभी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने विश्व बिरादरी के सामने दुखड़ा रोया कि गए तो सबकी दहलीज पर लेकिन भाव किसी ने नहीं दिया.

चीन के सामने बड़ी मजबूरी बेल्ट रोड

चीन के सामने बड़ी मजबूरी बेल्ट रोड इनीशिएटिव (बीआरओ) है जिसका बड़ा हिस्सा पाकिस्तान से होकर गुजर रहा है. सड़क निर्माण के इस बड़े प्रोजेक्ट में चीन ने बहुत कुछ झोंक दिया है. अरबों युआन की राशि उसने रोड प्रोजेक्ट में लगाई है और पाकिस्तान से यारी बनाए रखने के लिए वहां बड़ी मात्रा में निवेश किया है.ऐसे में चीन के सामने दो ही विकल्प हैं. पहला यह कि वह पाकिस्तान को झिड़क दे और अपने बूते बीआरओ को आगे बढ़ाए. दूसरा विकल्प उसके सामने सबकुछ बर्दाश्त करते हुए पाकिस्तान को मदद देने का है. पाकिस्तान को चीन झिड़क नहीं सकता क्योंकि उसे पता है इससे उसका पैसा तो डूबेगा ही, रोड प्रोजेक्ट में जान-माल की भी बड़ी क्षति होगी.

इसे भी पढ़ें –  महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा जावेद का अमित शाह को पत्र,  कहा, युद्ध अपराधी जैसा सलूक किया जा रहा है 

Advertisement

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: