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एक करोड़ से कम की खरीददारी के लिए विभागों का चहेता बना जेम पोर्टल

केंद्र सरकार ने विकसित किया है पोर्टल जिससे खरीदी जा रही करोड़ों की वस्तुएं, विभागीय अधिकारी अपने इंफ्लूएंस का करते हैं इस्तेमाल

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Ranchi: झारखंड में अब एक करोड़ से कम की खरीददारी के लिए जेनरल इलेक्ट्रोनिक मार्केट (जेम) का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है. अब तक जेम के माध्यम से झारखंड में 60 करोड़ से अधिक की वस्तुएं, उपकरणों की खरीद कई विभागों से की जा चुकी है. जेम पोर्टल सरकार के लिए एक पसंदीदा पोर्टल बन गया है, जहां से निविदा को पूरा करने में किसी पर अंगूली फिलहाल नहीं उठ रही है.

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जेम पोर्टल से संबंधित प्रकोष्ठ (सेल) में क्या हो रहा है. इसकी जानकारी ऊपर के अधिकारियों तक पहुंचती भी नहीं है. सरकार का मानना है कि जेम से वस्तुओं की खरीददारी में किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं होती है. क्योंकि कंपनियां इसमें खुद निबंधित रहती हैं और निविदा की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जाती है.

कई विभागों में हो रहा है इसका उपयोग

उच्चतर और तकनीकी शिक्षा विभाग, कल्याण विभाग, श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग, श्रमायुक्त कार्यालय, कृषि एवं पशुपालन विभाग, सहकारिता विभाग तथा अन्य विभाग जो कार्य विभाग से संबंधित नहीं हैं वहां जेम से ही निविदा की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं.

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जेम डायरेक्टोरेट जनरल सर्विसेज एंड डिलिवरी (डीजीएसएनडी) का नया नाम है. इसमें सैनिटरी नैपकीन से लेकर बड़े उपकरणों के भेंडरों को सरकार की तरफ से निबंधित किया गया है. जेम में निबंधित वेंडरों की सूची के आधार पर राज्य सरकारें अपनी जरूरत का फर्नीचर, ऑफिस के उपकरण, स्टेशनरी तथा अन्य वस्तुओं की खरीद कर रही हैं.

इसके लिए सभी विभागों में जेम के लिए एक अलग सेल भी गठित किया गया है. इसमें जेम में निबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों से तीन आवेदन मंगा कर निविदा की औपचारिकताएं पूरी कर दी जाती है. बातचीत के क्रम में ही एल-1 कंपनी कौन होगी और उसकी दर क्या होगी. यह तय कर दिया जाता है.

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टैब, मोबाइल की खरीद जेम से सरकार के ग्रामीण विकास विभाग, महिला और बाल विकास विभाग की तरफ से सखी मंडल, आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका और अब सभी पारा शिक्षकों को टैब वितरित किया गया है. इतना ही नहीं राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की तरफ से अंचल कर्मचारियों को टैब दिया गया है, ताकि वे जीवंत रिपोर्ट भेज सकें. इन सभी की खरीददारी जेम से ही की गयी है. टैब और मोबाइल की खरीददारी के लिए जैप-आइटी को जवाबदेही दी गयी थी. इसके लिए जैप आइटी को संबंधित विभागों ने राशि आवंटित की थी.

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