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जाम सड़कों पर ही नहीं लगता, माउंट एवरेस्ट पर्वत पर भी लगता है

पृथ्वी के इस सबसे ऊंचे स्थान तक पहुंचने की आकांक्षा रखने वाले लोगों की संख्या में बीते कुछ सालों में तेजी से इजाफा हुआ है.

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NewDelhi :  जाम सड़कों पर ही नहीं लगता, माउंट एवरेस्ट पर्वत पर भी जाम लगता है. बता दें कि दुनिया के सबसे ऊंचे माउंट एवरेस्ट पर्वत को फतह करने से बड़ा दूसरा इनाम पर्वतारोहियों के लिए कुछ और नहीं हो सकता. पृथ्वी के इस सबसे ऊंचे स्थान तक पहुंचने की आकांक्षा रखने वाले लोगों की संख्या में बीते कुछ सालों में तेजी से इजाफा हुआ है. इसका नतीजा यह है कि कई बार पर्वत की चोटी पर भीड़ की स्थिति हो जाती है और ऐसे में पहुंचकर वापस लौटने का वक्त बढ़ जाता है.इसके चलते पर्वतारोहियों को विपरीत परिस्थितियों और मौसम में ज्यादा वक्त गुजारना पड़ता है.

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बुधवार को भी ऐसी ही स्थिति हुई, जब टॉप पर पहुंचे पर्वतारोहियों ने नीचे देखा तो सैकड़ों अन्य लोग कतार में थे. एक तरह से ट्रैफिक जाम की स्थिति दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत पर थी.  पर्वत को फतह करने की कतार में 250 से 300 लोग खड़े थे और इस जाम के चलते पूरे अभियान में तीन घंटे तक की देरी हुई.

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दो ऐसे पर्वतारोही थे, जिनकी मौत एवरेस्ट फतह करने के बाद हुई

पर्वत पर लंबी लाइन होने के चलते यहां लोगों को भीषण ठंड के अलावा ऑक्सिजन की कमी से भी जूझना पड़ता है. बुधवार को कम से कम दो ऐसे पर्वतारोही थे, जिनकी मौत एवरेस्ट को फतह करने के बाद हुई. माना जा रहा है कि इसकी वजह यही थी कि उनके अभियान में ट्रैफिक जाम के चलते देरी हुई.

एवरेस्ट पर बचाव अभियान चलनाने वाली संस्था पायनियर एडवेंचर्स के अनुसार 54 वर्षीय अमेरिकी नागरिक डॉनल्ड कैश की लंबे वक्त तक ठहरने के चलते माउंटेन से गिर गये थे. कैश पायनियर एडवेंचर्स के शेरपा गाइड के साथ ट्रेकिंग कर रहे थे. लेकिन, तबीयत खराब होने के चलते वह गिर गये और शेरपा उन्हें बचा नहीं सके.

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मार्च से मई के बीच पर्वतारोहियों की काफी भीड़ होती है

आठ हजार आठ सौ अड़तालीस मीटर ऊंचे शिखर पर फिलहाल कई देशों के लोग चढ़ने की कोशिश में हैं. यहां मार्च से मई के बीच पर्वतारोहियों की काफी भीड़ होती है.खबर के अनुसार कई देशों के पर्वतारोहियों ने ये शिकायत की है कि उन्हें माउंट एवरेस्ट से उतरने के लिए कई घंटों तक का इंतजार करना पड़ा. मुश्किल हालात के चलते एवरेस्ट से उतरते वक्त एक महिला समेत दो और भारतीय पर्वतारोहियों की मौत हो गयी.

12 घंटे तक भीड़ में खड़े रहने के कारण बागवान की मौत

जिन दो भारतीयों की गुरुवार को मौत हुई है, उनमें से कल्पना दास (52) और निहाल बागवान (27) हैं. इनकी मौत शिखर से नीचे आने को दौरान हुई. 12 घंटे तक भीड़ में खड़े रहने के कारण बागवान की मौत हुई. जब शेरपा गाइड उन्हें नीचे कैंप चार में लेकर आये तब तक उनकी मौत हो चुकी थी. गुरुवार को एक ऑस्ट्रेलिया पर्वतारोही की भी मौत हो गयी.इस साल अब तक 15 पर्वतारोहियों की जान जा चुकी है जिनमें सात भारतीय हैं.

भारतीय सेना के जवान रवि ठाकुर और एक अन्य पर्वतारोही नारायण सिंह की 16 मई को कैंप चार में मौत हुई. ठीक उसी दिन पहाड़ी से गिरने के कारण आयरिश प्रोफेसर सिआमुस लॉलेस की मौत हो गयी.

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