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पलामू : जिन सरकारी भवनों में बन रहा प्लान, वहीं फेल है जल शक्ति अभियान

सरकारी भवनों में नहीं है वर्षा जल संचयन का कोई इंतजाम, बहकर हो रहा बर्बाद  

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Dilip Kumar

Palamu : राज्यभर में जल शक्ति अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत सरकारी अधिकारी व कर्मचारी गांव-गांव, गली-गली घूमकर जल संचयन के उपाय बता रहे हैं. लेकिन हैरानी कि बात है कि जहां से जल संरक्षण की प्लानिंग की जा रही है, वहीं वर्षा जल के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

हम राज्य के पांच प्रमंडलों में शामिल पलामू के मुख्यालय मेदिनीनगर की बात कर रहे हैं जहां आयुक्त, डीआइजी, उपायुक्त, एसपी, नगर निगम सहित कई सरकारी अधिकारियों के कार्यालय हैं पर किसी कार्यालय भवन में वर्षा जल के संरक्षण की व्यवस्था नहीं है.

25 करोड़ के समाहरणालय भवन में नहीं है रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था 

पलामू समाहरणालय का निर्माण हाल में ही कराया गया है. इसे पूरा करने में 25.47 करोड़ रूपये खर्च हुए हैं. लेकिन यहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. यानि लंबे-चौड़े भू-भाग पर फैले इस आलीशान भवन में वर्षा जल यूं ही बहकर बर्बाद हो जाता है.

समाहरणालय की तरह ही अधिकांश सरकारी भवनों का हाल है. भवन तो नये बनते गये, लेकिन पानी बचाने की फिक्र किसी में नहीं दिखी.

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नगर निगम भी अपनी जिम्मेवारी में हुआ फेल

मेदिनीनगर शहर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था को धरातल पर उतारने की जिम्मेवारी नगर निगम की है, लेकिन यहां भी स्थिति समाहरणालय भवन जैसी ही है. वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था निगम भवन में भी नहीं है.

निगम के कार्यपालक पदाधिकारी विनीत कुमार का कहना है कि समाहरणालय भवन सहित करीब दो दर्जन सराकरी भवन ऐसे हैं, जहां वर्षा जल रोकने का प्रबंध नहीं है. यही हाल व्यवसायिक भवनों का भी है.

उन्होंने कहा कि प्रयास है कि लोग वर्षा जल के महत्व को समझें. वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था के साथ ही नये भवन निर्माण के लिए नक्शा को मंजूरी दी जा रही है.

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जशौचालय जैसी जागरुकता का अभाव

यह सभी जानते हैं कि जल है तो जीवन है. बावजूद इसे बचाने के लिए अब तक सार्थक प्रयास नहीं किया जा रहा है.

मेदिनीनगर शहर में पेयजल की स्थिति लंबे समय से काफी खराब है. मार्च माह से ही पेयजल संकट विकराल हो जाता है. आधा शहर ड्राइ जोन हो चुका है.

पहले नगर पर्षद और अब नगर निगम पर यह जवाबदेही है कि भू-गर्भ जलस्तर को बढ़ाने के लिए कार्य किया जाये. शहर के हर घर में वाटर हार्वेस्टिंग का प्रबंध हो. मगर निगम इसमें पूरी तरह फेल है.

हर घर में शौचालय को लेकर जिस तरह जागरूकता अभियान चलाया गया था. उसी तरह वर्षा जल बचाने के लिए भी अभियान चले, यह अब तक नहीं किया गया.

घर-घर वाटर हार्वेस्टिंग के लिए एक्सपर्ट की कमी

वर्तमान में जो स्थिति है उसे देखकर नहीं लगता कि इस वर्ष शहर बारिश के पानी का सदुपयोग वाटर रिचार्ज के रूप में कर पायेगा.

निगम के कार्यपालक पदाधिकारी विनीत कुमार का कहना है कि घर-घर वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था करने के लिए टेक्निकल एक्सपर्ट नहीं हैं. वाटर हार्वेस्टिंग के कई मॉडल हैं, जो भवन के लंबाई-चौड़ाई के अनुसार बनते हैं.

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