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बोले जयराम रमेश, तानाशाही का नया नाम अमित शाह, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण में माहिर है भाजपा

मोदी इतिहास को गलत तरीके से पेश करते हैं और अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं. यह सारी बातें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहीं.

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 NewDelhi :  भाजपा अध्यक्ष अमित शाह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ पर्दे के पीछे रहकर ध्रुवीकरण के काम में लगे हुए हैं.  तानाशाही का नया नाम अमित शाह है. नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री की तरह बर्ताव नहीं करते. मोदी इतिहास को गलत तरीके से पेश करते हैं और अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं. यह सारी बातें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहीं. जयराम रमेश ने इसे कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए भाजपा पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया.   कहा कि भाजपा उन राज्यों में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर रही है जहां चुनाव हो रहे हैं. इस क्रम में  कांग्रेस नेता ने  भाजपा पर गैर-जरूरी मुद्दों को मुद्दा बनाने के आरोप भी लगाये. रमेश ने कहा, भाजपा हर चुनाव में बहुत अधिक सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर रही है और यह इन राज्यों में भी किया जा रहा है.

यूपी में भाजपा को मिली प्रचंड जीत सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के कारण

यूपी में भाजपा को मिली प्रचंड जीत सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के कारण हुई.  रमेश के अनुसार उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत भयावह स्तर का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण था. वे छत्तीसगढ़ में यह कर रहे हैं और निश्चित तौर पर मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में भी कर रहे हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस द्वारा गठित कोर ग्रुप के सदस्य जयराम रमेश ने कहा कि भाजपा देश भर में दो तरह का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर रही है. उन्होंने कहा, एक तो खुलेआम ध्रुवीकरण किया जा रहा है, जो अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी की भाषा है. इसके बाद, आरएसएस और इसके लोग पर्दे के पीछे रहकर जुबान से और घर-घर जाकर ध्रुवीकरण कर रहे हैं. रमेश ने कहा, अमित शाह उस व्यक्ति के अच्छे उदाहरण हैं जो कथनी और करनी में खुलकर ध्रुवीकरण की राजनीति करते हैं.   लेकिन विपक्ष खुलेआम किये जा रहे ध्रुवीकरण पर ध्यान देता नहीं लग रहा और पर्दे के पीछे रहकर किये जा रहे ध्रुवीकरण की गंभीरता भी नहीं समझ रहा है.  क्या कांग्रेस ध्रुवीकरण के मुद्दे से निपटने में कामयाब रही है?  इस पर रमेश ने कहा, यह महज चुनावी चुनौती नहीं, बहुत बड़ी चुनौती है.

उन्होंने कहा, चाहे सत्ता में रहें या सत्ता से बाहर, हमें इस चुनौती का सामना करना होगा. आरएसएस से कांग्रेस की लड़ाई को लंबी चलने वाली करार देते हुए रमेश ने कहा, यह तुरंत खत्म होने वाली चीज नहीं है. यह लंबी चलने वाली लड़ाई है. उन्होंने कहा कि आरएसएस को आदिवासी इलाकों में पकड़ बनाने में वर्षों, दशकों का समय लगा है.

 

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