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हद है! ये एक इंस्पेक्टर व चार दारोगा रहेंगे तभी लातेहार पुलिस करा पायेगी शांतिपूर्ण व निष्पक्ष चुनाव

Ranchi:  झारखंड पुलिस लातेहार में निष्पक्ष व शांतिपूर्ण चुनाव कराना चाहती है. तब, जब एक इंस्पेक्टर और चार दारोगा को लातेहार में ही रहने दिया जाये. इनसे पुलिस को मदद मिलेगी. पांचो का तबादला हो गया है. क्योंकि पांचो ने लातेहार जिला में अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है. अब लातेहार एसपी चाहते हैं कि इन पांचों को तबादला संबंधी प्रावधान से छूट दे दिया जाये.

जिस एक इंस्पेक्टर मोहन पांडेय का तबादला रोकने का अनुरोध किया गया है, उनका तबादला रांची किया गया है. अन्य चार दारोगा में नित्यानंद प्रसाद का तबादला झारखंड जगुआर में, आलोक कुमार दुबे का तबादला रांची, सुभाष कुमार पासवान का तबादला बोकारो में, प्रभाकर मुंडा का तबादला सीआइडी में किया गया है.

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तबादला किये जाने पर दिया गया तर्क

पांचों का तबादला रोकने के लिए तर्क दिया गया है कि पांचो पुलिस पदाधिकारी को उनके घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति एवं नक्सल विरोधी अभियान तथा नक्सलियों की गतिविधि की विशेष जानकारी है. तथा इनका सूचना तंत्र भी अच्छा है.

इनके जिला में बने रहने से विधानसभा चुनाव को शांतिपूर्वक व निष्पक्ष संपन्न कराने में सहायता मिलेगी. इसलिए विधानसभा चुनाव शांतिपूर्वक व निष्पक्ष संपन्न कराने के लिए पांचो पदाधिकारियों का लातेहार में बने रहना उचित रहेगा.

एसपी ने यह पत्र पुलिस मुख्यालय को लिखा और पुलिस मुख्यालय ने गृह विभाग को. अब गृह विभाग के संयुक्त सचिव अनिल कुमार सिंह ने पुलिस मुख्यालय की अनुशंसा को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को भेजते हुए पांचो पुलिस अफसरों को तबादला संबंधित प्रावधान से छूट देने का अनुरोध किया है.

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संवाददाता की टिप्पणी

यह शर्मनाक है. लातेहार पुलिस के बाकि पुलिस अफसरों के लिए डूब मरने वाली स्थिति है. क्या सच में अगर लातेहार में एक इंस्पेक्टर और पांच दारोगा को वहां से हटा दिया गया, तो वहां चुनाव संपन्न कराना संभव नहीं होगा. यह आश्चर्यजनक है.

इससे भी अधिक चौंकाने वाला तथ्य तो यह है कि पुलिस मुख्यालय के अफसरों ने आंख बंद करके प्रस्ताव गृह विभाग को भेज दिया और अब गृह विभाग ने चुनाव आयोग को. सवाल उठता है कि अगर इन पांच अफसरों का तबादला रोक दिया गया और शांतपूर्वक चुनाव संपन्न हो गया, तब क्यों नहीं इन अफसरों को राष्ट्रपति पदक दे दिया जाये. क्यों नहीं उनमें से ही किसी एक को लातेहार का एसपी ही बना दिया जाये.

लातेहार जिला के तमाम पुलिस पदाधिकारियों के लिए एक स्थिति यह भी है कि क्या वे सब किसी काम के नहीं रह गये हैं. क्या वहां के एसपी, डीएसपी और अन्य कनीय पुलिस अफसर और जवान चुनाव संपन्न नहीं करा सकते. और अगर ऐसा है, तो सरकार और विभाग उन्हें क्या सोंच कर लातेहार जिला में रखा हुआ है.

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