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अवैध रूप से नियुक्त मेनहर्ट परामर्शी को 17 करोड़ भुगतान हेमंत सोरेन ने कराया था : सरयू राय

राय ने कहा, सिवरेज-ड्रेनेज सिस्टम की बदहाली के लिए नगर विकास मंत्री सीपी सिंह को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं

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Ranchi : मंत्री सरयू राय ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रांची के निमार्णाधीन सिवरेज-ड्रेनेज सिस्टम की बदहाली के लिए नगर विकास मंत्री सीपी सिंह को जिम्मेदार ठहराया जाना उचित नहीं है.

राय ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा, “स्वयं हेमंत सोरेन ने नगर विकास मंत्री रहते हुए इस संबंध में महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी की है और अयोग्य साबित हो चुके मेनहर्ट परामर्शी को 17 करोड़ रुपया का बकाया भुगतान करने के लिये कैबिनेट से संकल्प पारित कराया है, जबकि इसके पहले निगरानी (तकनीकी कोषांग) की जांच में यह साबित हो गया था कि रांची के प्रस्तावित सिवरेज-ड्रेनेज सिस्टम का डीपीआर बनाने और इसके क्रियान्वयन का पर्यवेक्षण करने के लिये मेनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति अवैध थी.”

मंत्री ने कहा कि 6 अगस्त 2010 को निगरानी (तकनीकी कोषांग) के मुख्य अभियंता ने तत्कालीन निगरानी आयुक्त राजबाला वर्मा को जांच रिपोर्ट सौंपी थी और कहा था इस निविदा में प्रकाशन से लेकर निविदा निष्पादन की प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण रही है और तकनीकी कारणों से मेनहर्ट अयोग्य है.

राजबाला वर्मा ने जांच प्रतिवेदन पर कार्रवाई करने के बदले में 21 फरवरी 2011 को संचिका नगर विकास विभाग में भेज दिया. इसके बाद 13 जुलाई 2011 को नगर विकास विभाग ने कैबिनेट से संकल्प पारित कराकर मेनहर्ट को 17 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान कर दिया. इस बारे में नगर विकास विभाग ने झारखंड उच्च न्यायालय के 25 अप्रैल 2011 के निर्णय के विरुद्ध झारखंड उच्च न्यायालय की खंडपीठ में अपील दायर नहीं करने का निर्णय लिया.

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सीपी सिंह ने मेनहर्ट को हटाया

उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि नगर विकास मंत्री रहते हुये हेमंत सोरेन ने निगरानी जांच में अयोग्य साबित हो चुके मेनहर्ट को न केवल 17 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान कर दिया बल्कि इसके विरुद्ध उच्च न्यायालय की खंडपीठ में अपील दायर करने से भी मना कर दिया.

दूसरी ओर सीपी सिंह ने वर्तमान सरकार में नगर विकास मंत्री बनने के बाद मेनहर्ट को पर्यवेक्षण के काम से हटा दिया. ऐसी स्थिति में हेमंत सोरेन द्वारा रांची के सिवरेज-ड्रेनेज की बदहाली की जिम्मेदारी वर्तमान नगर विकास मंत्री सीपी सिंह के ऊपर थोपा जाना कतई न्यायोचित नहीं है. वस्तुस्थिति तो यह है कि अनेक जिम्मेदार उच्चपदस्थ पदधारी मेनहर्ट के हमाम में नंगे पाये गये हैं.

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राय ने कहा कि रांची के सिवरेज-ड्रेनेज की बदहाली का मुख्य कारण अयोग्य होने के बावजूद परामर्शी एवं पर्यवेक्षक के तौर पर मेनहर्ट की बहाली करने और इससे निर्माण कार्य का पर्यवेक्षण कराना है. यह जांच का विषय है कि मेनहर्ट ने जो डीपीआर बनाया था वह डीपीआर रांची के सिवरेज-ड्रेनेज प्रणाली के क्रियान्वयन में कितना कारगार सिद्ध हुआ और निर्माण कार्य के दौरान इसमें कितना परिवर्तन करना पड़ा.

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राजबाला की भूमिका पर उठाये सवाल

विडम्बना है कि एक ओर रांची के सिवरेज-ड्रेनेज का काम मेनहर्ट के पर्यवेक्षण में चल रहा था तो दूसरी ओर 2015 में रांची में पथ निर्माण विभाग भी अलग से ड्रेनेज बना रहा था. ड्रेनेज निर्माण पर पथ निर्माण विभाग द्वारा 140 करोड़ रुपया खर्च होने के बाद भी यह ड्रेनेज सिस्टम कामयाब नहीं हुआ. सवाल है कि पथ निर्माण विभाग द्वारा बनाया गया ड्रेनेज सिस्टम मेनहर्ट के डीपीआर के अनुरूप था या नहीं? यह महज संयोग नहीं हो सकता कि जिन राजबाला वर्मा ने निगरानी (तकनीकी कोषांग) की जांच में दोषी पाये गये मेनहर्ट पर कार्रवाई करने की संचिका निगरानी आयुक्त के रूप में दबा दिया उन्हीं राजबाला वर्मा ने पथ निर्माण सचिव के नाते रांची में स्वतंत्र ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण भी करा दिया.

16 अक्टूबर 2009 से 28 अगस्त 2011 के बीच निगरानी ब्यूरो के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक एमवी राव ने झारखंड उच्च न्यायालय के निदेशानुसार आधा दर्जन से अधिक बार निगरानी आयुक्त से कार्रवाई के लिये निर्देश मांगा परंतु यह निर्देश उन्हें नहीं मिला. इस अवधि में शिबू सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री भी रहे और हेमंत सोरेन नगर विकास मंत्री भी रहे.

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