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 हिंदुत्व के खिलाफ बोलना खतरनाक, प्रेस की आजादी की  रैंकिंग में पिछड़ा  भारत

भारत में पत्रकारों के लिए स्थितियां ठीक नहीं हैं.  माना जा रहा है कि यहां हिंदुत्व के खिलाफ बोलना खतरनाक हो सकता है. भारत प्रेस की आजादी की  रैंकिंग में पिछड़ता जा रहा है.

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NewDelhi : भारत में पत्रकारों के लिए स्थितियां ठीक नहीं हैं.  माना जा रहा है कि यहां हिंदुत्व के खिलाफ बोलना खतरनाक हो सकता है. भारत प्रेस की आजादी की  रैंकिंग में पिछड़ता जा रहा है. प्रेस की आजादी की इस रैंकिंग में भारत  पिछले साल के मुकाबले इस बार दो स्थान पिछड़ गया है.  यह बात देश में  हो रहे लोकसभा चुनाव के बीच वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2019 में सामने आयी है. रिपोर्टर्स  विदाउट बॉडर्स द्वारा गुरुवार को रैंकिंग जारी  की गयी है.  इस रैंकिंग के तहत नॉर्वे  टॉप स्थान पर है.  भारत इस वैश्विक रैंकिंग में दो स्थान लुढ़कर 140वें स्थान पर पहुंच गया है.

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इसके अनुसार भारत में पत्रकारों के लिए स्थितियां ठीक नहीं हैं.  यहां हिंदुत्व के खिलाफ बोलना खतरनाक हो सकता है. दक्षिण एशिया में पाकिस्तान तीन स्थान खिसकर 142वें स्थान पर है,  जबकि बांग्लादेश चार स्थान खिसकर 150वें स्थान पर है.

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हिंदुत्व के खिलाफ लिखते या बोलने वाले हेट कैंपेन का शिकार

रिपोर्ट में पाया गया है कि ऐसे पत्रकार जो हिंदुत्व के खिलाफ लिखते या बोलते हैं, उनके संगठित रूप से हेट कैंपेन का शिकार होने की दर काफी चिंताजनक है.   संवेदनशील माने जाने वाले कश्मीर में पत्रकारों के लिए स्थितियां मुश्किल बनी हुई है.  विदेशी पत्रकारों के कश्मीर में जाने पर रोक है और यहां इंटरनेट अक्सर बंद रहता है.

इंडेक्स में कहा गया है कि पत्रकारों के खिलाफ हिंसा में पुलिस हिंसा, माओवादियों का हमला और भ्रष्ट राजनेताओं और आपराधिक संगठनों की तरफ से हमले भी शामिल हैं.  भारत की हवाले से इस कथित विश्लेषण में कहा गया है कि 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले सत्ताधारी भाजपा के समर्थकों की तरफ से पत्रकारों पर किये जाने वाले हमले बढ़े हैं.

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भारत में  2018 में हिंसक घटनाओं में छह पत्रकार मारे गये

बता दें कि भारत में पिछले साल यानी 2018 में अपने काम के दौरान हिंसक घटनाओं में छह पत्रकार मारे गये थे. इन हत्याओं ने यह दिखाया कि भारतीय पत्रकारों को कितनी खतरनाक स्थितियों को सामना करना पड़ता है.  इसमें गैर-अंग्रेजी मीडिया संगठनों में  काम करने वाले पत्रकार अधिक हैं.  पेरिस स्थित रिपोटर्स सैन फ्रंटियर्स (आरएसएफ) एक गैर सरकारी संगठन है जो दुनियाभर में पत्रकारों पर हमलों का रिकॉर्ड रखता है.  2019 की इस रैंकिंग में नॉर्वे को पहला स्थान मिला है जबकि फिनलैंड ने दो स्थानों की बढ़त हासिल कर दूसरे स्थान पर है. नीदरलैंड को इस बार एक स्थान का नुकसान हुआ है.

वह चौथे स्थान पर है. अफ्रीका में इथोपिया ने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 40 स्थानों की छलांग लगा 110वां स्थान हासिल किया है. जांबिया ने 30 स्थानों की बढ़त हासिल कर 92वां स्थान पाया है. वियतनाम और चीन एक स्थान लुढ़कर क्रमशः 176वें और 177वें स्थान पर पहुंचे हैं.  तुर्केमेनिस्तान अंतिम 180वें स्थान पर है.

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