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राज्य गठन को हो गये 18 साल, अब तक नहीं बन पायी वित्तरहित शिक्षकों की सेवा शर्त नियमावली

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  • अब स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव कहते हैं- नहीं पता इस संबध में

Chhaya

Ranchi : वित्तरहित शिक्षक अपनी मांगों के लिए सालों से प्रयासरत हैं. कभी शिक्षा विभाग इनकी अनुदान राशि में कटौती कर देता है, तो कभी इनके स्कूलों को शर्त पूरा नहीं करने के नाम पर बंद कर दिया जा रहा है. लेकिन, इन सबके बीच राज्य गठन के 18 साल हो जाने के बाद भी अब तक राज्य में वित्तरहित शिक्षकों के लिए सेवा शर्त नियमावली नहीं बन पायी है. अन्य राज्यों की तरह झारखंड में वित्तरहित शिक्षकों की सेवा शर्त के लिए निश्चित समय नहीं है. ऐसे में कई बार शिक्षकों के नाम पर अनुदान राशि स्कूल को मिलती है, तो कई बार नहीं मिलती. वहीं, शिक्षकों की मांग है कि इन शिक्षकों की भी सेवानिवृत्ति 62 वर्ष की उम्र में हो. इसके लिए कई बार राज्य के शिक्षकों ने मुख्य सचिव समेत शिक्षा सचिव से मुलाकात की, लेकिन फिर भी विभाग और सरकार की संवेदनहीनता के कारण नियमावली नहीं बन पा रही है.

2015 में उच्चस्तरीय कमिटी का हुआ था गठन

शिक्षकों के संघर्ष को देखते हुए साल 2015 में उच्चस्तरीय कमिटी का गठन किया गया, जिसके तत्कालीन अध्यक्ष हंसराज सिंह थे. उनकी सेवानिवृत्ति के बाद कमिटी के अध्यक्ष तत्कालीन शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव जगजीत सिंह को बनाया गया, लेकिन इन्हें भी जेपीएससी में पदस्थापित कर देने के बाद आनंद मोहन ठाकुर को कमिटी का अध्यक्ष बनाया गया. उन्होंने साल 2017 में विभाग को अपनी रिपोर्ट दी, जिसमें वित्तरहित शिक्षकों की सेवा शर्त समेत अनुदान से संबंधित मामलों की अनुशंसा की गयी थी.

मंत्रिमंडल में नहीं भेजी जा रही रिपोर्ट

वित्तरहित शिक्षक संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष सुरेंद्र झा ने बताया कि साल 2017 में विभाग को कमिटी ने रिपोर्ट सौंप दी थी. इसके बावजूद विभाग इस रिपोर्ट को मंत्रिमंडल में नहीं भेज रहा. मंत्रिमंडल से सहमति मिल जाने के बाद नियम लागू हो जायेगा, लेकिन विभाग ऐसा कर नहीं रहा. उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार विभागीय सचिव और मुख्य सचिव से मुलाकात की गयी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. राज्य में लगभग 200 स्कूल हैं, जो वित्तरहित की शर्त को पूरा करते हैं.

क्या है रिपोर्ट में

कमिटी की रिपोर्ट के अनुसार वित्तरहित शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की उम्र भी 62 साल हो जायेगी. जबकि, वर्तमान उम्र सीमा 60 साल है. इसके साथ ही, समय पर अनुदान देना, अनुदान नियमावली का सही से पालन करने समेत अन्य प्रावधान हैं.

पता नहीं इस संबंध में, माध्यमिक निदेशक से पूछें : प्रधान सचिव

जब इस विषय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव एपी सिंह से बात की गयी, तो उन्होंने कहा कि इस संबध में कोई जानकारी नहीं है. माध्यमिक निदेशक से पूछें कि राज्य गठन को 18 साल हो गये, अब तक सेवा शर्त नियमावली क्यों नहीं लागू हो पायी.

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