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फिर से कटेगी जीएम लैंड की लगान रसीद, पहलेवाली व्यवस्था हुई बहाल

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Ranchi : मई 2016 में सरकार की तरफ से एक सर्कुलर जारी किया गया था. सर्कुलर में साफ तौर से कहा गया था कि उसी जीएम लैंड की लगान रसीद काटी जायेगा, जो 01.01.1946 से पहले जमीन मालिक को हस्तांतरित किया गया हो. 01.01.1946 के बाद किसी जीएम लैंड को हस्तांतरित किया गया है, तो उस जमीन के सारे कागजात दिखाने पड़ेंगे. सीओ के बाद एलआरडीसी और एलआरडीसी के बाद वह मामला एसी तक जाता था. अगर मामला जायज पाया जाता था, तो लगान रसीद की कार्यवाही की जाती थी. लेकिन, अमूमन मामलों में यह देखा जाता था कि जमीन मालिक 01.01.1946 के बाद के सही कागजात सरकारी अधिकारियों के पास नहीं जमा कर पाते थे. ऐसे में जीएम लैंड की लगान रसीद ही कटनी बंद हो गयी थी. मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में मई 2016 वाले सर्कुलर को रद्द कर दिया गया. अब जीएम लैंड के मामले में पहलेवाली व्यवस्था बहाल कर दी गयी है. मामले पर जानकारी देते हुए गृह कारा विभाग के प्रधान सचिव एसकेजी रहाटे ने बताया कि सिर्फ उसी जीएम लैंड की लगान रसीद नहीं कटेगी, जिसके खिलाफ न्यायालय की तरफ से विपरीत आदेश आया हो. जिस जीएम लैंड के लिए कोर्ट की तरफ से कोई विपरीत आदेश नहीं आया है, उसकी लगान रसीद कटेगी.

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जेपीएससी में दो सदस्यों की नियुक्ति

कैबिनेट ने एक अहम प्रस्ताव पर स्वीकृति देते हुए झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) में दो लोगों की नियुक्ति की है. इनमें डॉ सुखी उरांव और डॉ अजय कुमार चट्टोराज शामिल हैं. डॉ सुखी उरांव एसएस मेमोरियल कॉलेज में वाणिज्य कर विभाग सहायक प्राध्यापक के पद पर पदस्थापित थे और डॉ अजय कुमार चट्टोराज रांची विश्वविद्यालय के वाणिज्य एवं व्यापार प्रबंधन विभाग में सहायक प्राध्यापक के पद पर पदास्थापित थे.

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कैबिनेट के अन्य फैसले

  • झारखंड विधानसभा सचिवालय में नियुक्तियों एवं प्रोन्नतियो में बरती गयी अनियमितताओं की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच आयोग के अवधि विस्तार की स्वीकृति दी गयी. जांच आयोग की अवधि में तीन महीने का आखिरी बार विस्तार किया गया है. आयोग की अवधि 25.06.2018 को खत्म हो रही थी.
  • राज्य विकास परिषद् के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी का पद सृजित किया गया और पद पर 1981 बैच के सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अनिल स्वरूप की नियुक्ति को मंजूरी मिली.
  • सरकारी काम के लिए जमीन देनेवाले के उत्तराधिकारियों को 10 लाख रुपये से ऊपर के मुआवजे के लिए सक्षम न्यायालय से प्रमाणपत्र लेने का प्रावधान था. अब उत्तराधिकारियों को 50 लाख रुपये तक के मुआवजे के लिए सक्षम न्यायालय से प्रमाणपत्र लेने की छूट है.
  • राज्य के सेवानिवृत्त न्यायिक पदाधिकारियों एवं पारिवारिक पेंशनरों को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये दिशा-निर्देश के आलोक में अंतरिम राहत के तहत मूल पेंशन में 30% किये जाने पर स्वीकृति मिली.
  • अमृत योजना के तहत धनबाद के लिए 148 करोड़, आदित्यपुर के लिए 363 करोड़, हजारीबाग के लिए यह राशि 300 करोड़ से बढ़ाकर 407 करोड़ और रांची के लिए 148 करोड़ से बढ़ाकर 261 करोड़ रुपये करने पर स्वीकृति मिली.
  • झारखंड उच्च न्यायालय की अनुशंसा के आलोक में झारखंड उच्च न्यायालय में जुवेनाइल जस्टिस कमिटी की मदद के लिए सहायक निबंधक (न्यायिक) का पद सृजित किया गया है. इस पद पर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के अधिकारी की नियुक्ति होगी.
  • झारखंड उच्च न्यायालय की अनुशंसा के बाद हाई कोर्ट और जिला ज्यूडिशियरी में पांच वर्षों से अधिक पुराने मामलों की पहचान के लिए कोषांग का गठन किया गया है. कोषांग के लिए झारखंड न्यायिक सेवा में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) स्तर के उप निबंधक (न्यायिक) के एक पद और सिविल जज (जूनियर डिवीजन) स्तर के सहायक निबंधक (न्यायिक) के दो पदों के सृजन की स्वीकृति दी गयी.
  • झारनेट के रख-रखाव के लिए अगले पांच साल के लिए 286 करोड़ रुपये खर्च करने पर स्वीकृति मिली है. 2018-19 में 86 करोड़ रुपये खर्च किये जाने हैं.

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