न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

#IshratJahan की मां ने #CBI अदालत को लिखा पत्र, अब नहीं लड़ सकती केस, नाउम्मीद और बेबस हो गयी हूं

एक भयानक आपराधिक षडयंत्र के चलते उसकी हत्या की गयी और यह साजिश इसलिए की गयी क्योंकि वह एक मुस्लिम महिला थी तथा उसे घातक आतंकवादी बताकर राजनीतिक हित साधा गया.

134

Ahmedabad : इशरत जहां की मां शमीमा कौसर ने सीबीआई अदालत को एक पत्र लिख कर कहा है कि वह फेक एनकाउंटर केस अब नहीं लड़ेंगी. उन्होंने लिखा है, लंबी लड़ाई के बाद मैं आशाहीन और बेबस महसूस कर रही हूं.   शमीमा कौसर ने अहमदाबाद में  विशेष सीबीआई अदालत में कहा कि वह अब इस मामले की सुनवाई में भाग नहीं ले सकती , क्योंकि न्याय के लिए इतनी लंबी लड़ाई के बाद वह नाउम्मीद और बेबस महसूस कर रही हैं.

जान लें कि विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश आरके चूडावाला  द्वारा पुलिस महानिरीक्षक जीएल सिंघल, पूर्व डीएसपी तरुण बरोट, पूर्व पुलिस उपाधीक्षक जे जी परमार और सहायक सब इंस्पेक्टर अनाजु चौधरी समेत चार आरोपी पुलिसकर्मियों द्वारा आरोप मुक्त करने के लिए दायर की गयी अर्जियों पर सुनवाई की जा रही है.

इसे भी पढ़ें : #J&K: प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष के भाई समेत 12 लोगों पर आतंकियों से साठगांठ का आरोप, मामला दर्ज

मेरी बेटी इशरत निर्दोष थी

कौसर ने मंगलवार को  सीबीआई अदालत को पत्र लिखकर कहा कि दंडमुक्ति की इस संस्कृति के कारण मैं अत्यंत दुखी हूं, मेरा जज्बा टूट गया.   वह अदालत की कार्यवाही से दूरी बना रही हैं और सीबीआई से आरोपियों की दोषसिद्धि सुनिश्चित करने का अनुरोध करती हैं.कौसर ने  कहा, न्याय के लिए इतनी लंबी लड़ाई के बाद अब मैं नाउम्मीद और बेबस महसूस करती हूं. कहा कि 15 साल से अधिक समय बीत गया, लेकिन पुलिस अधिकारियों समेत सभी आरोपी जमानत पर हैं.

मेरी बेटी की हत्या के मुकदमे का सामना करने के बावजूद कुछ को तो गुजरात सरकार ने बहाल कर दिया. उन्होंने दावा किया कि उनकी बेटी  इशरत निर्दोष थी. एक भयानक आपराधिक षडयंत्र के चलते उसकी हत्या की गयी और यह साजिश इसलिए की गयी क्योंकि वह एक मुस्लिम महिला थी तथा उसे घातक आतंकवादी बताकर राजनीतिक हित साधा गया.

इसे भी पढ़ें : #GSTCollection: आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार के लिए बुरी खबर, GST कलेक्शन में 6 हजार करोड़ से ज्यादा की गिरावट

अब लड़ने की मेरी इच्छा खत्म हो गयी है

कौसर ने कहा, मैंने अपनी वकील वृंदा ग्रोवर को बता दिया है कि अब लड़ने की मेरी इच्छा खत्म हो गयी है और वह सीबीआई अदालत में सुनवाई में भाग नहीं लेना चाहती. इतनी लंबी और पेचीदा न्याय प्रक्रिया ने मुझे थका और परेशान कर दिया है. उन्होंने कहा कि अपनी बेटी के लिए न्याय के उनके संघर्ष में उन्होंने पाया कि वह गुजरात के कुछ बहुत शक्तिशाली पुलिस अधिकारियों का सजा दिलाना चाहती है जो सेवा में है और जिन्हें राज्य का संरक्षण हासिल है.

Sport House

उन्होंने कहा, कई कमजोर मासूम नागरिकों की जान बचाने के लिए दंडमुक्ति की इस संस्कृति को मिटाने की जरूरत है. यह केवल मेरी लड़ाई नहीं हो सकती. यह देखना अब सीबीआई का काम है कि दोषियों को सजा मिले.कौसर ने कहा कि उनकी बेटी की ‘निर्मम हत्या को ‘गलत और दुर्भावनापूर्ण तरीके से मुठभेड़ हत्या दिखाया गया तथा उसे बदनीयती से आतंकवादी बताया गया.

जान लें कि गुजरात पुलिस के 15 जून 2004 को अहमदाबाद के बाहरी इलाके में एक कथित फर्जी मुठभेड़ में मुंबई के समीप मुंब्रा की रहने वाली 19 वर्षीय महिला इशरत जहां, जावेद शेख उर्फ प्रनेश पिल्लई, अमजदअली अकबरअली राणा और जीशान जौहर मारे गये थे. पुलिस कादावा  था कि इनके लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों से संपर्क थे.सीबीआई ने अगस्त 2013 में सात लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था और फरवरी 2014 में चार और लोगों के खिलाफ अनुपूरक आरोपपत्र दायर किया था.

इसे भी पढ़ें : PMC Bank : आरबीआइ के प्रतिबंध लागू होने से ठीक पहले किसने 16 करोड़ के 49 फिक्स डिपॉजिट तुड़वाये

 

Mayfair 2-1-2020
SP Jamshedpur 24/01/2020-30/01/2020

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like