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क्या झारखंड के सत्ताधारी महागठबंधन में राजद को किया जा रहा है दरकिनार ?

20 सूत्री कमिटी के गठन को ले बुलाई गयी बैठक में राजद को नहीं बुलाने से उठ रहे हैं सवाल

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Ranchi : झारखंड के सत्ताधारी महागठबंधन में बोर्ड-निगमों, 20 सूत्री निगरानी समिति के गठन को लेकर पिछले डेढ़ महीने से घमासान मचा हुआ है. झारखंड की हेमंत सरकार की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी कांग्रेस के विधायकों सहित वरिष्ठ नेताओं ने इस बात को लेकर रांची से लेकर दिल्ली तक आवाज बुलंद की. राजद ने भी अपनी तरफ से दावे ठोक दिए.
इस बीच मंगलवार को इस मामले पर झामुमो और कांग्रेस के नेताओं ने आपस में बैठक की और राजद को उस बैठक में नहीं बुलाया. इसके बाद से ही यह सवाल उठने लगा है कि क्या झारखंड के सत्ताधारी महागठबंधन में राजद को दरकिनार किया जा रहा है?

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लगातार सहयोगी दलों के बीच चल रहे घमासान के बाद राज्य में बीस सूत्री निगरानी कमेटियों के गठन की कवायद पर काम शुरू किया गया है. कमेटी में पदों का बंटवारा सत्तारूढ़ महागठबंधन के घटक दलों के बीच आपसी समन्वय से होगा,इसपर बातें शुरू हो गयी है. मंगलवार को कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं ने आपस में बैठक कर फार्मूले पर मंत्रणा की.

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ये शामिल हुए थे बैठक में

बैठक में झारखंड मुक्ति मोर्चा की तरफ से महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य और विनोद पांडेय शामिल हुए, जबकि कांग्रेस की तरफ से प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर, केशव महतो कमलेश के साथ-साथ शमशेर आलम और अमूल्य नीरज खलखो बैठक में मौजूद थे. कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह ने बीस सूत्री कमेटियों के गठन के लिए कमेटी बना रखी है. मंगलवार को हुई बैठक में आरंभिक बातचीत के साथ-साथ यह तय किया गया कि दोनों दल अपनी-अपनी सूची तैयार कर सौंपेंगे, लेकिन इस बैठक में यह जिक्र नहीं हुआ कि तीसरा सहयोगी राजद का क्या होगा. बैठक में तो राजद के नेताओं को नहीं ही बुलाया गया और ना ही झामुमो और कांग्रेस के नेताओं ने राजद को लिस्ट भेजने के लिए कहा है.

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फार्मूला- जिस विधानसभा से जो दल जीता उसकी होगी दावेदारी

फिलहाल तय फार्मूले के मुताबिक उन प्रखंडों की कमेटियों पर उन दलों की दावेदारी होगी, जिसने उस क्षेत्र की विधानसभा सीट पर जीत हासिल की है. इस आधार पर लिस्ट तैयार करने के पूर्व जिलाध्यक्षों से भी बातचीत की जाएगी. निर्णय किया गया कि जुलाई माह के अंत तक पदाधिकारियों की सूची तैयार कर नेतृत्व को सौंप दिया जाए. इसके बाद राज्य सरकार कमेटियों के गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी करेगी.

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बीस सूत्री कमेटियों के गठन का भारी दबाव

गौरतलब है कि कांग्रेस की तरफ से बीस सूत्री कमेटियों के गठन का भारी दबाव है. इस वर्ष के शुरूआत में कमेटियों के गठन की कवायद आरंभ हुई थी, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के कारण यह ठप हो गया. नए सिरे से कांग्रेस के भीतर-बाहर मांग उठने के बाद गठन की दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं. जानकारी के मुताबिक बैठक में मौजूद दोनों दलों के नेता प्रदेश नेतृत्व को रिपोर्ट सौपेंगे. यदि यह फार्मूला काम करता है तो राजद को सिर्फ एक सीट चतरा की मिली है. जाहिर है कि राजद को सिर्फ चतरा से ही संतोष करना पड़ेगा.

हेमंत सरकार में राजद विधायक सत्यानन्द भोक्ता को मंत्री बनाया गया है. इस बीच सत्ताधारी गठबंधन के घटक दल राजद ने भी बीस सूत्री कमेटियों में अपनी हिस्सेदारी को लेकर दावा ठोका है. राजद का दावा छह जिला उपाध्यक्ष के पद और 29 प्रखंड कमेटियों के पद पर है. इस बाबत विधानसभा चुनाव के फार्मूले का हवाला दिया गया है.

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बैठक में राजद को भी बुलाया जाना चाहिए : राधाकृष्ण किशोर

वरिष्ठ राजद नेता राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि बैठक में राजद को नहीं बुलाये जाने पर झामुमो और कांग्रेस नेतृत्व से बात हुई है. महागठबंधन के सहयोगी के नाते राजद को बुलाया जाना चाहिए. कहा कि अगली बैठक से राजद को भी बुलाया जाएगा. उन्होंने कहा कि राजद ने अपने फॉर्मूले से झामुमो और कांग्रेस से अवगत करा दिया है. पिछले विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे के अनुसार ही कमिटी के गठन पर निर्णय होना चाहिए. जिन-जिन सीटों पर जो दल चुनाव लड़े थे वो उस दल के खाते में जाना चाहिए.

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