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क्या दिवालिया होने के करीब है सरकार ?

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Girish Malviya

अटल सरकार में वित्त मंत्री रहे बीजेपी के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा कह रहे हैं कि आर्थिक सुस्ती की वजह से मोदी सरकार दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गई है. उन्होंने कहा कि विभिन्न सेक्टर्स में मांग में भारी गिरावट के कारण अर्थव्यवस्था ‘अब तक से सबसे भीषण संकट’ के दौर से गुजर रही है.

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पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने भी कह दिया है कि चालू वित्त वर्ष में सरकार का कर संग्रह निर्धारित लक्ष्य से करीब ढाई लाख करोड़ रुपये कम रहने का अनुमान है. यह देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 1.2 प्रतिशत के बराबर है. गर्ग ने एक ब्लॉग में कहा कि कर राजस्व के नजरिए से 2019-20 एक बुरा वित्त वर्ष साबित होने जा रहा है.

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के प्रमुख आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने अपने हालिया रिसर्च नोट में लिखा है अर्थव्यवस्था में मंदी से कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में और कमी आएगी, जिससे कॉरपोरेशन टैक्स में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की कमी हो सकती है.

व्यक्तिगत आयकर में भी 0.88 लाख करोड़ रुपये की कमी होगी.’घोष का कहना है, ‘जीएसटी संग्रह में भी सुस्ती दिखाई दे रही है और उम्मीद की जा रही है कि लगभग 85,000 करोड़ रुपये का कुल राजस्व घाटा केंद्र सरकार को होगा.’

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सरकार भी यह बात मान रही है कि 15वें वित्त आयोग (FFC) ने जून 2019 में ही बताया था कि अगले पांच साल में उसके ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू (GTR) में बढ़ोतरी की रफ्तार बजट अनुमान से काफी कम रहेगी. मिसाल के लिए, पहले उसने 2019-20 में 2019-20 के 25.52 लाख करोड़ रुपये रहने का अंदाजा लगाया था.

इसके लिए 2018-19 के अस्थायी आंकड़ों को आधार बनाया गया था. हालांकि, यह 23.61 लाख करोड़ रुपये ही रह सकता है. आयोग का कहना है कि 2020-21 में यह अनुमान से 2.16 लाख करोड़ और 2024-25 में 3.70 लाख करोड़ कम रह सकता है

इकोनॉमिक टाइम्स ने आयोग के दस्तावेज देखे हैं, जिनसे यह जानकारी मिली है. कुल मिलाकर, अगले पांच साल में GTR, FFC को दिए गए ऑरिजिनल एस्टिमेट से राजस्व संग्रह 15 लाख करोड़ रुपये कम रह सकता है.

साफ है कि इन अर्थशास्त्रियों की बातें और यह रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है सरकार दिवालिया होने के बेहद करीब पहुंच गयी है. लेकिन इन सबके बावजूद प्रधानमंत्री विदेशों में ‘सब चंगा सी’ के नारे लगाते हुए पाए जाते हैं.

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