Opinion

क्या मोदी वाकई कोरोना से लड़ने में नंबर-1 हैं? जान लीजिये, इस सर्वे में अमेरिका में रह रहे 447 लोगों ने भाग लिया है

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Apoorv Bhardwaj

आप आजकल मीडिया (लोग अब गोदी मीडिया भी कहते हैं) में एक डाटा सर्वे खूब देख रहे होंगे. जिसमें पीएम मोदी को अन्य राष्ट्राध्यक्षों की तुलना में कोरोना से लड़ने में 68 पॉइंट्स की अप्रूवल रेटिंग प्वाइंट के साथ नंबर 1 दिखाया जा रहा है. और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सबसे पीछे दिखाया जा रहा है. अगर आपको इस सर्वे की सच्चाई जाननी है तो यह लेख पढ़ें-

यह सर्वे अमेरिका की ग्लोबल डेटा इंटेलीजेंस कंपनी Morning consult  ने किया है. सबसे पहले जानते है कि मॉर्निंग कंसल्टेंट एजेंसी कौन है और उसने यह सर्वे कैसे, कब और क्यों किया है. मॉर्निंग कंसल्टेंट 2013 में स्थापित एक डेटा एनालिटिक्स करनेवाली कंपनी है, जो अमेरिका में विभिन्न राजनीतिक और समसामयिक विषयों पर पोल करवाती है.

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इस सर्वे में सिर्फ अमेरिका में रहनेवाले सभी देशों के नागरिकों में से केवल 447 की राय ली गयी है. इस सर्वे में वो ही भाग ले सकते हैं जो इस सर्वे के लिए साइन अप करके बाकायदा रजिस्टर्ड होते हैं और इस सैम्पलिंग का रॉ डाटा भी अवेलेबल नहीं है. जिससे कोई दूसरा विश्लेषक सैम्पलिंग साइज के रिजल्ट्स का विश्लेषण कर सके. मतलब आपको यह भी नहीं पता है कि सर्वे में किन-किन क्षेत्रों, धर्म, नस्लों के लोगों ने भाग लिया है. जिस अमेरिका में मोदी समर्थक हर बार लाखों लोगों का मेगा इवेंट मैंनेज कर सकते हैं, उनके लिए 447 लोगो का मैनजमेंट करना कौन सी बड़ी बात है.

यह सर्वे 1 जनवरी से शुरू किया गया था. मीडिया बता रहा है कि एक जनवरी को पीएम मोदी के अप्रूवल प्वाइंट्स 62 थे. लेकिन अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक यह 68 पर पहुंच गये.

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वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को माइनस 3 प्वाइंट्स दिये गये हैं. इस डाटा के साथ कितनी छेड़छाड़ की गयी है, वो दूसरे चार्ट में देखें तो 8 मार्च को मोदी जी की रेटिंग 46 प्वाइंट थी. मतलब 1 जनवरी को 62 रेटिंग वाले मोदी 8 मार्च को 46 पर लुढ़क गये थे. 1 जनवरी को तो मोदी जी ने ऐसा कोई काम नहीं किया था, जो रेटिंग 62 पर पहुंच जाये और 8 मार्च तक भी ऐसा कुछ नहीं किया था जो 46 पर पहुंच जाये.

मॉर्निंग कंसल्टेंट ने ऐसा ही एक पोल फ़रवरी 2017 में कराया था. जिसका अमेरिका में बहुत विरोध हुआ था. उस पोल में ट्रम्प के इमिग्रेशन बैन का अप्रूवल रेटिंग 55 था. इसका विरोध खुद CNN , NBC जैसे मीडिया ग्रुप ने किया था. इस पोल में भी लोगों की राय केवल लैंडलाइन टेलीफोन पर ली गयी थी और जिन लोगों ने साइनअप किया था, उनसे ही बात की गयी थी. CNN ने दावा किया था कि सैम्पलिंग तकनीक गलत है और इससे रिजल्ट गलत आते हैं.

2013 में स्थापित हुई इस कम्पनी ने बहुत बड़ी उड़ान भरी है और पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से लेकर कोरोना आउट ब्रेक से पहले तक बहुत सारे विवादित पोल कर चुकी है. इस कम्पनी की नजर ट्रम्प के अगले राष्ट्रपति चुनाव अभियान पर थी. लेकिन ट्रम्प ने अभी तक कम्पनी की सेवाएं लेने का संकेत नहीं दिये हैं. इसलिए उनकी पोल रेटिंग माइनस में दिखायी गयी है.

CNN के ब्रायन स्टेलर ने कहा था कि अमेरिका में कुछ चैनलों और पोलिंग एजेंसियों को अब डाटा विज्ञान से ज्यादा ट्रम्प पर भरोसा हो गया है. यह मीडिया के लिए चेतावनी है. यह बात उन्होंने 2017 में बोली थी और यह बात आज पूरे भारत के मीडिया के लिए भी बिलकुल सही सिद्ध हो रही है.

मोदी जी मीडिया, मार्केटिंग और सेल्फ ब्रांडिग से ट्रम्प जैसा छद्म बड़ा ब्रांड तो बन सकते हैं, लेकिन महात्मा गांधी, नेहरूजी और लाल बहादुर शास्त्री जैसा सम्मान और विश्ववास हासिल कर ग्लोबल लीडर का नाम शायद ही कभी हासिल कर पायें.

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डिस्क्लेमरः लेखक डाटा विशेषज्ञ हैं और ये उनके निजी विचार हैं.

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