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#AlQaeda का गढ़ तो नहीं बन रहा जमशेदपुर! अबतक गिरफ्तार हुए 12 संदिग्ध आतंकियों के जुड़ चुके हैं तार

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Saurav Singh

Jamshedpur: जमशेदपुर के रहने वाले संदिग्ध आतंकी कलीमुद्दीन को रांची एटीएस टीम के द्वारा 21 सितंबर को गिरफ्तार किया गया. इस गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर से जमशेदपुर से आतंकियों के कनेक्शन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

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बीते कई सालों के दौरान ऐसे कई मौके आये जब यहां के कई लड़के गिरफ्तार हुए या फिर दूसरे राज्य के आतंकियों ने यहां पनाह ली.

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इन सब घटनाओं के बीच सवाल उठ रहा है कि आतंकी संगठन अलकायदा का गढ़ तो नहीं बन रहा है जमशेदपुर. बता दें पिछले 10 वर्षो से अबतक गिरफ्तार हुए 12 संदिग्ध आतंकियों के तार जमशेदपुर से जुड़ चुके हैं.

जमशेदपुर से अलकायदा का जुड़ाव पुराना

आतंकी संगठन अलकायदा का जुड़ाव जमशेदपुर से बहुत ही पुराना है. अलकायदा से जुड़ाव के आरोप में दिल्ली की स्पेशल पुलिस टीम ने दिल्ली एयरपोर्ट से जमशेदपुर के जवाहरनगर रोड नंबर 14 निवासी मो. जिसान अली को 10 अगस्त 2017 को गिरफ्तार किया था. जिसान अली जमशेदपुर से 2008 से ही बाहर था.

पूछताछ में जिशान अली ने बताया था कि वह बेंगलुरू में कुछ दिनों तक था. उसके बाद वह अपने भाई आर्सियान के साथ 2010-11 में सउदी अरब चला गया.

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जिशान व अर्सियान दोनों भाई के आतंकी संगठन से जुड़े होने की जानकारी ओडिशा के कटक से दिसंबर 2015 में गिरफ्तार अब्दुल रहमान उर्फ कटकी ने दी. इसके बाद हरियाणा से 18 जनवरी 2016 को जमशेदपुर के धतकीडीह निवासी संदिग्ध आतंकी अब्दुल सामी को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था.

वर्ष 2002 में जमशेदपुर के आतंक से तार जुड़ने की जानकारी मिली

जमशेदपुर में सबसे पहले वर्ष 2002 में आतंकी तार जुड़े होने की जानकारी तब मिली थी, जब दिल्ली के अंसल प्लाजा में मुठभेड़ में मारे गए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शाहनवाज के पास एक लाइसेंस मिला था, जिसमें जमशेदपुर के मानगो के जवाहर नगर का पता था.

फिर देखते-देखते एक के बाद एक आतंकियों की गिरफ्तारी और आतंकी कनेक्शन ने ये साबित कर दिया कि जमशेदपुर में आतंकियों ने अपना नया साम्राज्य खड़ा कर लिया है.

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बताया जा रहा है कि बांग्लादेश की सीमा से सटे होने और भौगोलिक स्थिति अनुकूल होने के कारण कोल्हान की धरती को आतंकी अपना पनाहगाह बना रहे हैं.

मौलाना कलीमुद्दीन के मदरसा में दी जाती थी देशद्रोह की शिक्षा
21 सितंबर को एटीएस रांची के द्वारा गिरफ्तार किए गए मानगो रोड नंबर 12 निवासी संदिग्ध आंतकी मौलाना कलीमुद्दीन के घर चलने वाले मदरसा में, देश विरोधी गतिविधियों की शिक्षा दी जाती थी.

उसके मदरसे में अब्दुल रहमान उर्फ कटकी व अब्दुल सामी भी अपने साथियों को भेजता था. वह अपने घर पर जामिया मोहम्मद पी बिन अब्दुल्ला नाम से मदरसा चलाता था. जिसका प्राचार्य मौलाना कलीमुद्दीन ही था.

जब झारखंड एटीएस ने मौलाना कलीमुद्दीन के घर की 16 सितंबर 2017 को कुर्की की. उससे पहले ही मौलाना कलीमुद्दीन अपने पुत्र फैजाना के साथ सउदी अरब भाग गया.

कलीमुद्दीन पर बिष्टुपुर थाने में आतंकवादी संगठन अलकायदा से जुडऩे संगठन का विस्तार करने, जिहाद के लिए युवाओं को भड़काने और देशद्रोह का मामला दर्ज है.

आतंकी अब्दुल रहमान उर्फ कटकी ने किया था बड़ा खुलासा

17 दिसंबर 2015 में जब आतंकी अब्दुल रहमान उर्फ कटकी ओडिशा से पकड़ा गया था, तब पूछताछ में उसने स्वीकारा था कि झारखंड में अली सेना को जिंदा कर उसे अलकायदा से जोड़ऩे की फिराक में था.

हालांकि अली सेना राज्य में वर्ष 1997 से 2000 के बीच सक्रिय थी. वह उसी संगठन की मदद से झारखंड में पैठ जमाने की कोशिश में था. कलीमुद्दीन के अलावा कटकी के संपर्क में चान्हो के कई अन्य लोग भी थे.

जिसके बाद एटीएस ने फिर से रांची में अलकायदा से जुड़ी हर गतिविधियों को खंगालना शुरू कर दिया है. बता दें कि गिरफ्तार हुए कटकी की बहन जमशेदपुर में रहती थी. और वह दो बार जमशेदपुर आ चुका था.

पहले भी जमशेदपुर से जुड़ चुके हैं आतंकियों के तार

21 सितंबर 2019- रांची एटीएस की टीम ने संदिग्ध आतंकी कलीमुद्दीन को जमशेदपुर के रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया.
9 अगस्त 2017- अलकायदा के संदिग्ध आतंकी जिशान अली को दिल्ली की स्पेशल टीम ने गिरफ्तार किया था. जिशान जमशेदपुर के आजाद नगर का निवासी है.

18 जनवरी 2016- जमशेदपुर के अब्दुल सामी को हरियाणा से दिल्लीा पुलिस ने गिरफ्तार किया.

16 दिसंबर 2015- ओडिशा पुलिस ने अल कायदा आतंकी अब्दुल रहमान उर्फ कटकी को गिरफ्तार किया. उसने बताया कि जमशेदपुर के कई युवकों को वो ओडिशा में प्रशिक्षित कर चुका है और कई बार जमशेदपुर आ चुका है.

17 दिसंबर 2015- दिल्ली के सीलमपुर से अलकायदा के भारत प्रमुख मोहम्मद आसिफ को गिरफ्तार किया गया. उसकी बहन जमशेदपुर में रहती है, जिससे मिलने के लिए वह दो बार जमशेदपुर आ चुका है.

अक्टूबर 2014- एटीएस ने पश्चिम बंगाल के वर्द्धवान में हुए बस विस्फोट मामले में जमशेदपुर के आजादनगर थाना क्षेत्र के आजाद बस्ती से शीष महमूद नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया था. एटीएस के अनुसार, महमूद जमात उल मुजाहिदीन का सदस्य था.

27 अक्टूबर 2013- पटना में हुए ब्लास्ट में एनआइए की टीम ने रांची के सिठियो में गिरफ्तारी की थी, जिसके बाद टीम ने जमशेदपुर से भी एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया था.

5 जून 2011- मध्य प्रदेश की एटीएस की टीम ने मानगो के जाकिर नगर रोड नंबर 13 वेस्ट में एक दो मंजिला मकान में छापेमारी कर, इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी अबु फैज़ल, इरशाद और एक महिला को गिरफ्तार किया था. अबु फैज़ल मध्यप्रदेश की एक फाइनेंस कंपनी में हुए सोना लूटकांड का मुख्य आरोपी था. ये मकान रांची के एक व्यक्ति ने इन्हें दिलाया था. अबु फैजल और इरशाद दोनों मध्य प्रदेश की जेल में हैं.

2006- कोलकाता से आई टीम ने नूर मोहम्मद को जमशेदपुर के मानगो, आजादनगर से गिरफ्तार किया था. जिस पर कोलकाता में अमेरिकन सेंटर में हुए हमले का आरोप था. हालांकि उस मामले में सालों तक मुकदमा चलने के बाद दोष साबित नहीं हो पाया और आरोपी छूट गए.

नवंबर 2002- दिल्ली के अंसल प्लाज़ा में मुठभेड़ में मारे गए लश्कर-ए-तैयबा ये आतंकी शहनवाज़ के पास से एक लाइसेंस मिला था, जिसमें जमशेदपुर के मानगो के जवाहरनगर का पता था और लाइसेंस भी जमशेदपुर का बना दिख रहा था. लेकिन दिल्ली से आई टीम को उस पते पर शाहनवाज़ का कोई परिजन नहीं मिला और न ही जिला परिवहन विभाग के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड था.

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