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क्या #IL&FS, #DHFL के बाद अगला नंबर #इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड का है?

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Girish Malviya

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IL&FS में 91 हजार करोड़ रुपये, DHFL में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये और इंडियाबुल्स हाउसिंग के 98 हजार करोड़ के सामने अब विजय माल्या और नीरव मोदी के कुछ हजार करोड़ के घोटाले बहुत छोटे मामले लगने लगे हैं!….

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, याचिका में इंडियाबुल्स हाउसिंग के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ जनता के 98,000 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया गया है ….याचिका में कहा गया है कि कंपनी के चेयरमैन समीर गहलोत और निदेशकों ने जनता के हजारों करोड़ रुपये के धन का हेरफेर करके उसका इस्तेमाल निजी काम में किया….समीर गहलोत ने स्पेन में एक एनआरआई हरीश फैबियानी की मदद से कई “मुखौटा कंपनियां” खड़ी कीं.

इन कंपनियों को आईएचएफएल ने फर्जी तरीके और बिना आधार के भारी मात्रा में कर्ज दिए और  बाद में इन कंपनियों ने उस कर्ज का धन कुछ ऐसी अन्य कंपनियों को हस्तांतरित कर दिया. जिनका कंपनियों का संचालन या परिचालन गहलोत, उनके परिवार के सदस्यों और इंडियाबुल्स के अन्य निदेशकों के हाथ में था.

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यह याचिका IHFL के एक शेयरधारक अभय यादव ने दाखिल की है, समीर गहलोत की गिनती भारत के टॉप 100 अमीरों में 29 वे स्थान पर होती है, भारत में सबसे युवा 5 मल्टी मिलेनियर में उनका नाम शामिल हैं, इसलिए यह कोई साधारण आरोप नहीं है. देश की सबसे बड़ी ऑनलाइन और रिटेल ब्रोकरेज फर्म इंडियाबुल्स के वे मालिक है….कुछ दिन पहले लक्ष्मी विलास बैंक के बोर्ड ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनांस के साथ विलय को मंजूरी दी है….

लेकिन ऐसा नहीं है, याचिका में जो आरोप लगाए गए हैं वह पहली बार लगे हैं…..कुछ साल पहले बेहद मशहूर पनामा पेपर्स जब सामने आए थे, तब यह बात सामने आई थी कि मोस्सैक फोंसेका के ज़रिये अस्तित्व में आयीं कुछ कंपनियां संबद्ध देशों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नशीले द्रव्यों के व्यापार, धोखाधड़ी और कर चोरी में शामिल रही हैं. इन कंपनियों में भारत के 50 बड़े लोगों के नाम सामने आए थे, जिसमें अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन, डीएलएएफ के कुशल पाल सिंह, गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी और इंडिया बुल्स के समीर गहलोत का नाम भी शामिल था…

इन्ही पेपर्स में नाम आने के कारण पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ आज जेल में चक्की पीस रहे हैं, लेकिन बड़े-बड़े नामों के सामने आने के बावजूद यहां पर न खाऊंगा न खाने दूंगा की बात करने वाली सरकार के कानों पर जूं तक नही रेंगी!….

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जिस तरह से फर्जी कंपनियां बनाकर धोखाधड़ी की बात इस याचिका में की गयी, ठीक इसी तरह की बात कोबरापोस्ट ने अपने एक स्टिंग में DHFL के बारे में बताई थी, जिसमें बताया गया था कि DHFL ने सरकारी बैंकों जैसे एसबीआइ और बैंक ऑफ बड़ौदा से कर्ज लेकर उसका इस्तेमाल दूसरे कार्यो के लिए किया…….स्टिंग में सामने आया था कि इंडिया बुल्स की तरह ही डीएचएफएल ने भी 97000 करोड़ रुपये के कुल बैंक लोन में से 31000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल मुखौटा कंपनियों को कर्ज देने में किया…

लेकिन उस वक़्त भी बात दबा दी गयी, लेकिन अब जिस तरह से IL&FS संकट के कारण NBFC सेक्टर दबाव में आया है, उससे एक-एक करके बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के घपले घोटाले सामने आ रहे हैं, इसलिए अब यह बात और दबने वाली है नहीं……और इन घोटालों की सीधी जिम्मेदारी वर्तमान सरकार की ही है, जिसने समय रहते हुए कोई कार्यवाही नहीं की….

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(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं)

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