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क्या चंदनकियारी सीट बन रही है गठबंधन में रोड़ा,  बीजेपी 110 परसेंट लड़ने को तैयार, आजसू छोड़ने को नहीं है तैयार

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Divy Khare

Bokaro: विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गयी है पर अब भी चंदनकियारी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और आजसू के बीच चुनाव लड़ने को लेकर घमासान मचा हुआ है. चंदनकियारी के भाजपा विधायक अमर बाउरी 110 परसेंट आश्वस्त हैं कि वह चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे भी. आजसू के उमाकांत रजक ने भी चुनाव लड़ने का मन बना लिया है और वह लड़ के रहेंगे.

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अगर देखा जाये तो चंदनकियारी विधानसभा क्षेत्र की दावेदारी एनडीए के दोनों सहयोगियों के होनेवाले गठबंधन के बीच बहुत बड़ा रोड़ा है.

आजसू पार्टी चंदनकियारी को अपनी पारंपरिक सीट मानती है, वहीं भाजपा अपनी सीटिंग सीट को त्यागना नहीं चाहती. दोनों पार्टियों के अपने-अपने लॉजिक हैं.

रविवार को सुदेश महतो ने कहा था की चंदनकियारी आजसू की सबसे मजबूत सीटों में से एक है. यह सवाल ही पैदा नहीं होता कि हम चंदनकियारी से नहीं लड़ें.

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पहले संगठन, फिर गठबंधन

पहले संगठन है, फिर गठबंधन है. कई सालों की कड़ी मेहनत के बाद हमने अपने संगठन को चंदनकियारी क्षेत्र में मजबूत किया है, ऐसे ही छोड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता.

वहीं अमर बाउरी ने भी साफ कर दिया की सीट त्यागने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता. चंदनकियारी अब भाजपा का गढ़ है.

कुछ महीने पहले हुए संसदीय चुनाव में भाजपा को चंदनकियारी में 1.27 लाख वोट आये थे और वह भी तब जब आजसू ने गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया था और हमें हराने की जी-तोड़ कोशिश की थी. हमें मिले वोट यह दर्शाते हैं कि भाजपा की पकड़ कितनी अंदर तक और मजबूत है.

बाउरी ने यह भी कहा की उनको पार्टी के शीर्ष नेताओं द्वारा यह साफ कर दिया गया है कि बिना किसी शंका के वह चुनाव लड़ने की तैयारी करें. हाल ही में हुए मुख्यमंत्री के जन आशीर्वाद यात्रा में जिस तरह चंदनकियारी निवासियों का जनसैलाब उमड़ा था ये दर्शाता है कि पब्लिक का रुझान भाजपा की ओर है.

लोगों के बीच भाजपा के प्रति और उनके लिए विश्वास बढ़ा है. ऐसी स्थिति में भाजपा चंदनकियारी सीट नहीं छोड़ेगी.

आजसू के पास कहने के लिए एक लॉजिक यह भी है कि 2009 के विधानसभा चुनाव में आजसू ने चंदनकियारी सीट जीती थी. 2014 में आजसू चंद वोटों से झाविमो से हार गयी थी.

2014 तक चंदनकियारी सीट एनडीए के अंदर आजसू के खाते में थी. बाउरी ने तो झाविमो से चुनाव लड़ कर जीता था, बाद में वह उसे छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए.

2014 तक आजसू ही एनडीए का चंदनकियारी में चेहरा थी. इस बाबत इस बार भी आजसू के खाते में ही यह सीट आनी चाहिए.

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आजसू के दावे से बाउरी असहमत

इस बात पर बाउरी सहमत नहीं है. उनका कहना है कि एक बार जीतने से अगर कोई सीट पारंपरिक हो जाये तो 1990 के दशक में भाजपा के गौर हरिजन ने दो बार चंदनकियारी सीट पर विजय हासिल की थी. इस हिसाब से तो चंदनकियारी सीट पारंपरिक रूप से भाजपा की होनी चाहिए.

बाउरी ने पिछले 5 साल का हिसाब देते हुए कहा कि “आप सड़कों की बात कर लें या सरकारी कल्याण योजनाओँ की या फिर बिजली, शिक्षा या किसी अन्य क्षेत्रों की, हमारी सरकार ने चहुंमुखी विकास किया है.

गवई बराज प्रोजेक्ट, री सर्वे सेटेलमेंट आदि प्रोजेक्ट को कंप्लीट करने के लिए आगे कदम बढ़ाया है. भाजपा अपने काम के बल पर आज चंदनकियारी में लड़ने और जीतने का दावा ठोक रही है.

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