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मनरेगा की 24 योजनाओं में गड़बड़ी, बीडीओ-बीपीओ पर जुर्माना, मुखिया, जेई और वेंडर पर FIR का निर्देश

  • पंचायत सचिव सस्पेंड, FIR भी दर्ज करने का निर्देश
  • दो ग्राम रोजगार सेवक भी नपे
  • डीडीसी की जांच रिपोर्ट पर डीसी ने लिया एक्शन

Palamu : पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड क्षेत्र में मनरेगा की दो दर्जन योजनाओं में गड़बड़ी उजागर हुई है. इस मामले में पलामू के डीसी ने पथरा की मुखिया ललिता देवी, ग्राम रोजगार सेवक, पंचायत सचिव और कनीय अभियंता (जेई) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश हुसैनाबाद बीडीओ को दिया है. साथ ही बीडीओ और बीपीओ पर भी जुर्माना लगाया है.

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डीडीसी की जांच रिपोर्ट पर डीसी ने यह कार्रवाई की है. डीडीसी ने बीडीओ को सात दिनों के भीतर राशि की वसूली करते हुए नाजिर रसीद सहित प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.

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मनरेगा आयुक्त और डीसी ने किया था निरीक्षण, ग्रामीणों ने की थी शिकायत

बता दें कि मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी और डीसी शशि रंजन ने संयुक्त रूप से अगस्त में हुसैनाबाद की पथरा पंचायत पहुंचकर मनरेगा योजनाओं का निरीक्षण किया था. इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने योजनाओं में अनियमितता बरते जाने की शिकायत की थी.

इसमें ज्यादातर कूप निर्माण में गड़बड़ियों से संबंधित शिकायत की गयी थी. इस पर डीडीसी को मामले की जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था.

पथरा मुखिया ललिता देवी की वित्तीय शक्ति जब्त

मनरेगा कार्य में अनियमितता बरतने, फर्जी तरीके से राशि की निकासी करने के कारण पथरा की मुखिया ललिता देवी की वित्तीय शक्ति जब्त कर ली गयी है.

वहीं, पथरा पंचायत के संबंधित ग्राम रोजगार सेवक विनोद चौधरी और संजय सूरज एवं कनीय अभियंता (जेई) विवेक कुमार की संविदा को भी रद्द कर दिया गया है.

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पंचायत सचिव सस्पेंड

गड़बड़ी की पुष्टि के बाद पथरा पंचायत के पंचायत सचिव नंदकिशोर राम को सस्पेंड कर दिया गया और इनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की भी अनुशंसा कर दी गयी.

साथ ही, संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर पर भी मनरेगा की धारा 25 के तहत प्रत्येक योजना में एक-एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया.

वहीं, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (बीपीओ) और प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) पर भी मनरेगा की धारा 25 के तहत प्रत्येक योजना में एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

जांच टीम में ये थे शामिल

इस पूरे मामले को लेकर डीडीसी ने जिलास्तरीय जांच टीम गठित की थी, जिसमें हुसैनाबाद के अनुमंडल पदाधिकारी, सहायक परियोजना पदाधिकारी एवं डीआरडीए के सहायक अभियंता शामिल थे. उक्त जांच दल के प्रतिवेदन के आधार पर सभी आरोपियों से स्पष्टीकरण मांगा गया था.

प्राप्त स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाये जाने के कारण डीडीसी ने विभिन्न योजनाओं को रद्द कर सभी आरोपियों के विरुद्ध जिला द्वारा पूर्व से निर्धारित दर पर प्रोपोर्शनेट लायबिलिटी का निर्धारण करते हुए इसमें व्यय की गयी राशि की वसूली करने का निर्देश दिया है.

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