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‘रहबर की राहजनी’ के जरिये सरयू राय बताएंगे झारखंड में अवैध खनन का किस्सा, ऱघुवर दास निशाने पर

Ranchi: लौह अयस्क खनन में गड़बड़ियों को लेकर वरिष्ठ विधायक सरयू राय लगातार मुखर रहे हैं. समय-समय पर राज्य सरकार को इस संबंध में लेटर भी लिखते आये हैं. अब वे अपनी पुस्तक रहबर की राहजनी के जरिये राज्य में खनन घोटालों, इसमें शामिल अलग-अलग स्तर पर दोषियों और अवैध खनन के कारण सारंडा के पर्यावरण पर मंडराते संकट को पाठकों के सामने लाने को तैयार हैं.
गुरुवार (महाशिवरात्रि) पर उन्होंने ट्विटर पर इसकी सूचना देते हुए बताया है कि उन्होंने अपनी नयी पुस्तक का प्रारूप वेबसाइट saryuroy.in पर डाल दिया है. किताब को और बेहतर बनाने में अगर कोई सुझाव 18 मार्च तक आता है तो वे इसका उपयोग करेंगे.

रघुवर ने अवैध खननकर्ताओं को दिया संरक्षण

रहबर की राहजनी 18 खंडों में लिखी गयी किताब है. इसमें झारखंड में पिछले कई सालों से जारी लौह अयस्क घोटाले और इसमें शामिल प्रभावशाली किरदारों को केंद्र में रखा गया है. केंद्र सरकार ने 2010 में लौह अयस्क खनन घोटालों की जांच के लिए रिटायर्ड जज एमबी शाह की अध्यक्षता में एक आयोग बनाया था. अवैध खनन संबंधी जांच का प्रतिवेदन अक्टूबर 2013 में केंद्र को सौंप दिया. अवैध खननकर्ताओं पर जुर्माना लगाया औऱ दूसरी अनुशंसा की. झारखंड के अवैध खननकर्ताओं पर कुल 7599.30 करोड़ रुपये का फाईन लगाया. यह मांग झारखंड सरकार को भेजी गयी.

झारखंड सरकार ने 5 अधिकारियों की एक समिति जून, 2014 में गठित की. तीन महीने में इसने अपना प्रतिवेदन सौंप दिया. इसके बाद विधानसभा चुनाव हुए. हेमंत सोरेन सरकार सत्ता से बाहर हो गयी. रघुवर दास सीएम और खान मंत्री भी थे. पर उन्होंने इन प्रतिवेदनों पर कोई एक्शन नहीं लिया. जुर्माना वसूले जाने के बजाय इसमें पेंच लगाया. अवैध खननकर्ताओं के विरुद्ध लीगल एक्शन लिये जाने पर गंभीरता नहीं दिखायी. सरयू राय ने अब हेमंत सोरेन सरकार से उम्मीद लगायी है कि वह शाह आयोग की अनुशंसाओं को लागू करे.

किस खंड में किन-किन विषयों पर फोकस

किताब के खंड-1 और 2 में लौह अयस्क की अवैध खनन की जांच करने को बनाये गये शाह आयोग के जांच प्रतिवेदन और अनुशंसाएं हैं. 3 से 6 के बीच आयोग की अनुशंसाओं तथा खान एवं खनिज संशोधित अधिनियम-2015 के आलोक में झारखंड सरकार द्वारा उठाये गये कदम और जांच रिपोर्ट की जानकारी है. 7 में राज्य सरकार द्वारा गठित आयोग के विस्तृत प्रतिवेदन का संक्षिप्त ब्योरा है. इसी तरह से आठवें से लेकर 18वीं तक में अवैध खनन, राज्य सरकार द्वारा उठाये गये कदमों, लापरवाही, सारंडा वन क्षेत्र को हो रहे नुकसान संबंधी विषयों को शामिल किया गया है.

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