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राज्य में लौह अयस्क का खनन ठप, राज्य सरकार को हुआ 6250 करोड़ का नुकसान

राज्य के स्टील उद्योगों का उत्पादन भी हो रहा है प्रभावित

chhaya

Ranchi: राज्य में लौह अयस्क खनन का कार्य पिछले साल से ठप है. 31 मार्च 2020 के बाद से लौह अयस्क का खनन बंद है. खनन बंद होने से राज्य सरकार को लगभग 6250 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है. यह आंकड़ा पिछले साल से लेकर फरवरी-2021 तक का है. केंद्र सरकार की ओर से माइंस एडं मिनरल्स डेवलपमेंट रेगुलशन एक्ट में संशोधन करने की वजह से खनन कार्य बाधित रहा. केंद्र सरकार द्वारा इस संशोधन के तहत लौह अयस्क खनन के लिए पट्टाधारकों को 31 मार्च 2020 तक ही एक्सटेंशन मिला था. खनन कार्य ठप होने की वजह कोविड-19 महामारी भी रही. अब जबकि स्थिति बहुत हद तक सामान्य हो चुकी है, इसके बाद भी खान एवं भू-तत्व विभाग की ओर से अब तक ऑक्शन की तैयारी शुरू नहीं की गयी है.

पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में मांग

राज्य के स्टील उद्योगों में हर साल लगभग 30 मिलियन टन लौह अयस्क की खपत होती है. राज्य में लौह अयस्क से इसकी भरपाई हो जाती थी, जिससे राज्य के स्टील आधारित उद्योगों को लागत भी कम लगती थी. वहीं सिर्फ पश्चिम बंगाल 20 मिलियन टन लौह अयस्क भेजा जाता था,  जिससे राज्य सरकार को अलग से राजस्व की प्राप्ति होती थी. इसके साथ बिहार, उड़ीसा जैसे राज्यों में भी लौह अयस्क भेजा जाता था.

दो हजार हेक्टेयर के लिए होना है ऑक्शन

आकंड़ों की मानें तो पश्चिमी सिंहभूम में लगभग दो हजार हेक्टेयर क्षेत्र के लिये ऑक्शन होना है. खान विभाग की मानें तो कुछ खानों में खनन जारी है. लेकिन अधिकांश बंद हैं. राज्य से निकलने वाले लौह अयस्क के कुल कारोबार की 25 प्रतिशत रॉयल्टी राज्य सरकार को प्राप्त होती है.

नियमों में बदलाव के बाद अब राज्य में शुरू हुई प्रक्रिया

खान निदेशक शंकर कुमार सिन्हा ने कहा कि केंद्र सरकार ने माइंस एडं मिनरल्स डेवलपमेंट रेगुलशन एक्ट में संशोधन किया था. जिसके तहत पट्टाधारकों को 31 मार्च 2020 तक का एक्सटेंशन दिया गया था. ऐसे में पट्टाधारकों का एक्सटेंशन खत्म होने से काम रूका है. केंद्र के नियमों में बदलाव के बाद अब राज्य सरकार ने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है.

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