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सरकारी काम के लिए IPS अधिकारी ने किया पार्टी नेता के वाहन का इस्तेमाल, विवाद

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Patna : बिहार में सत्तारूढ़ पार्टी जद (यू) के एक शीर्ष नेता की बेटी व युवा आइपीएस अधिकारी द्वारा पार्टी के एक नेता के वाहन का इस्तेमाल आधिकारिक काम के लिए करने को लेकर शनिवार को विवाद खड़ा हो गया.

खबरें हैं कि आइपीएस अधिकारी लिपि सिंह ने एक विधायक की ट्रांजिट रिमांड मांगने के संबंध में दिल्ली की एक अदालत तक पहुंचने के लिए पार्टी के एक नेता के वाहन का प्रयोग किया था.

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क्या है मामला

वर्तमान में पटना जिले के बाढ़ उपमंडल की प्रभारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लिपि दिल्ली की साकेत अदालत गईं थीं और वहां उन्होंने मोकामा विधायक अनंत सिंह की ट्रांजिट रिमांड मांगी.

एएसपी ने जब विधायक के लिए ट्रांजिट रिमांड हासिल कर ली, उसके बाद मीडिया में खबरें आईं कि अदालत पहुंचने के लिए उन्होंने जिस वाहन का इस्तेमाल किया था वह कथित रूप से जद (यू) के विधान पार्षद रणवीर नंदन का था.

हालांकि राज्य विधान परिषद के सदस्य के इस वाहन पर कथित तौर पर संसद के सदस्य द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाला स्टीकर लगा हुआ था. इस पूरे विवाद पर जद (यू) प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि क्या हमारी पार्टी के किसी नेता की गाड़ी का उपयोग करना एक अपराध है?

लिपि सिंह के पिता राम चंद्र प्रसाद सिंह उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व आइएएस अधिकारी रहे हैं और जद (यू) के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा में पार्टी के नेता हैं. वह कुमार के बाद जद (यू) में दूसरे सबसे शक्तिशाली नेता माने जाते हैं.

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क्या कहना है विपक्ष का

कांग्रेस के विधान पार्षद प्रेम चंद्र मिश्रा ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है. अनंत सिंह अपने ऊपर लगे आरोपों के अलावा लंबे समय से सवालों के घेरे में खड़ी पुलिस अधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं. एक पुलिस अधिकारी का अपनी ड्यूटी निभाने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी के किसी नेता के वाहन का इस्तेमाल करना संदेह को और पुख्ता करता है.

गौरतलब है कि अनंत सिंह ने बिहार पुलिस को कई दिनों तक चकमा देने के बाद शुक्रवार को अंतत: साकेत अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था.

अनंत सिंह के खिलाफ हाल में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. छापेमारी के दौरान उनके घर से पुलिस को एक एके47 राइफल, कुछ हथगोले और कारतूस मिले थे.

उन्होंने दावा किया था कि लंबे समय से उस घर में कोई रह नहीं रहा था और आरोप लगाया था कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी खासकर जद (यू) के नेता राजनीतिक प्रतिशोध के चलते उन्हें फंसा रहे हैं.

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