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आइपीएस अधिकारी एमवी राव बने गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवा के डीजी

Ranchi: 1987 बैच के आइपीएस अधिकारी एमवी राव डीजी रैंक में प्रोन्नत हो गये. इसके साथ ही उन्हें डीजी होमगार्ड के पद पर पदस्थापित किया गया. सरकार की ओर से इसकी अधिसूचना जारी कर दी गयी है. श्री राव दिल्ली स्थित झारखंड भवन में स्थानिक आयुक्त के पद पर पदस्थापित थे.

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बीबी प्रधान के रिटायर होने के बाद खाली हुआ था पद

उल्लेखनीय है कि 30 अप्रैल 1985 बैच के आइपीएस अधिकारी और झारखंड होमगार्ड के डीजी बीबी प्रधान रिटायर हो गये हैं. बीबी प्रधान के सेवानिवृत्त होने के बाद डीजी रैंक का एक पद रिक्त हो गया है. मालूम हो कि झारखंड में डीजी रैंक के चार पद हैं. बीबी प्रधान के रिटायर होने के बाद एक पद रिक्त था. तीन पदों पर आइपीएस डीके पांडेय, पीआरके नायडू और नीरज सिन्हा क्रमशः डीजीपी, एडीजी मुख्यालय व डीजी निगरानी के पद पर पदस्थापित हैं.

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बकोरिया कांड की जांच में तेजी लाने पर हुआ था तबादला

एमवी राव झारखंड कैडर के आइपीएस हैं. श्री राव तेज-तर्रार आइपीएस माने जाते हैं. लंबे समय तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सीआरपीएफ में रहने के बाद वर्ष 2017 में वह झारखंड लौटे थे. तब सरकार ने उनका तबादला सीआइडी में एडीजी के पद पर किया था. जिस वक्त उन्हें सीआइडी में पदस्थापित किया गया, उस वक्त सीआइडी में कई बड़े मामले जांच के लिए लंबित थे. उन्होंने सभी मामलों की जांच में तेजी लायी. जिसमें बकोरिया कांड भी शामिल था. बकोरिया कांड में तेजी लाने की वजह से वह विभाग के ही सीनियर अफसरों के निशाने पर आ गये. खास कर डीजीपी डीके पांडेय के निशाने पर. एमवी राव ने सरकार के समक्ष पूरे मामले की जानकारी रखी. लेकिन सरकार ने उनका तबादला दिल्ली में कर दिया. जिसके बाद श्री राव ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, गृह सचिव समेत अन्य कई महत्वपूर्ण लोगों को एक पत्र लिखा. जिसमें उन्होंने पूरे मामले की जानकारी दी. साथ ही बताया कि कैसे डीजीपी डीके पांडेय ने उन्हें बकोरिया कांड की जांच को धीमा करने के लिये कहा था. डीजीपी ने एमवी राव से यह भी कहा था कि न्यायालय के किसी आदेश से चिंतित होने की कोई जरूरत नहीं है. लेकिन श्री राव ने डीजीपी के इस मौखिक निर्देश का विरोध करते हुए जांच की गति सुस्त करने, साक्ष्यों को मिटाने और फर्जी साक्ष्य बनाने से इनकार कर दिया था. उनके तबादले के बाद सीआइडी ने बकोरिया कांड में फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में दायर किया. जिसके बाद हाकोर्ट ने मामले की सीबीआइ जांच का आदेश दिया.

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