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पत्रकार से जाति विशेष बातचीत के दौरान IPS  इंद्रजीत महथा ने अपने जूनियर-सीनियर अफसरों को भला-बुरा कहा

आईपीएस और पत्रकार एक ही जाति विशेष के हैं. दोनों के बीच जो संवाद है, वह शुद्ध रूप से जाति को लेकर हो रहे भेद-भाव, पूर्वाग्रह और असंतोष को जाहिर कर रहा है.

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Ranchi: ब्यूरोक्रेटस और मीडिया में एक ऑडियो वायरल है. ऑडियो आईपीएस इंद्रजीत महथा और एक पत्रकार अभय कुमार के बीच की है. इंद्रजीत महथा अभी पलामू के एसपी हैं और पत्रकार अभय कुमार झारखंड से प्रकाशित एक बड़े अखबार के धनबाद से क्राइम रिपोर्टर हैं. आईपीएस और पत्रकार एक ही जाति विशेष के हैं. दोनों के बीच जो संवाद है, वह शुद्ध रूप से जाति को लेकर हो रहे भेद-भाव, पूर्वाग्रह और असंतोष को जाहिर कर रहा है. बातचीत के क्रम में आईपीएस यह कह रहे हैं कि उन्होंने एक बार आथॉरिटी को खूब गालियां दी. आईपीएस का एसीआर खराब होने से कुछ नहीं होता. बातचीत के दौरान वह एक अन्य आईपीएस के बारे में कहते हैं कि सिपाही का बटन खुला रहने पर भी उसे सस्पेंड करके वह आईपीएस पैसा वसूल लेता है. एक जगह इंद्रजीत महथा यह भी कहते हैं कि अभी जो भी सीनियर एसपी है, वह बेकार हैं. पिछड़ी जाति से हैं. कम रैंक लाकर भी वह आईपीएस बन गये हैं. जूनियर अफसरों का नाम लेकर बताते हैं कि उसे सीनियर एसपी को ज्यादा वैल्यू नहीं देना चाहिए. न्यूज विंग के पास यह ऑडियो सीडी मौजूद है. सिटीजन फोरम के झारखंड चैप्टर ने इस आडियो को राष्ट्रपति को भेजते हुए संबंधित अफसरों पर कार्रवाई की मांग की है. ऑडियो की सीडी सभी मीडिया संस्थानों के संपादक को भी भेजा गया है.

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ऑडियो में एक अन्य पत्रकार के नाम का जिक्र है, जो न्यूज विंग से जुड़े हैं और करीब दर्जन भर आईपीएस का नाम लिया गया है. आईपीएस इंद्रजीत महथा बातचीत के क्रम में पूरे पुलिस महकमे पर सवाल उठा रहे हैं. पत्रकार अभय का कहना है कि उनकी जाति की वजह से पुलिस महकमे में उनकी जाति के लोगों को परेशान किया जाता है. दोनों के बीच जो बातचीत हुई है, उसे न्यूज विंग हू-ब-हू छाप रहा है. बताते चलें कि यह ऑडियो करीब डेढ़ साल पुराना है. उस वक्त न्यूज विंग से जुड़े पत्रकार झारखंड के बड़े अखबार में कार्यरत थे. उनका कहना है कि पत्रकार अभय जिस वक्त की बात कर रहा है, वह वर्ष 2014 का साल था. तब उन्होंने कोयला के अवैध कारोबार को लेकर कई बड़ी स्टोरी की थी. उस वक्त कोयला क्षेत्र के आईजी लक्ष्मण सिंह थे. जो आईपीएस इंद्रजीत महथा के ससुर हैं. हालांकि अवैध कारोबार तो एसपी के स्तर से होता है. किसी भी खबर में आईजी का जिक्र हुआ था, ऐसा याद नहीं है. पत्रकार अभय जो भी बातें कर रहा है, वैसी बातचीत उससे कभी नहीं हुई. सीडी में जिन आईपीएस अफसरों के नाम का जिक्र किया गया है, उन अफसरों से भी न्यूज विंग ने संपर्क किया. सभी ने यही कहा है कि पत्रकार अभय से उन्होंने ऐसी कोई बात कभी नहीं की , जो बातें वह इंद्रजीत महथा से बातचीत के क्रम में कह रहा है. इससे समझा जा सकता है कि पत्रकार अभय किस मानसिकता के तहत झूठी बातें कहकर आईपीएस इंद्रजीत महथा को अपने बातों में उलझा रहा है.

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पत्रकारः क्या कर रहे हैं सर

आईपीएसः परिवार के साथ मैच देख रहे हैं.

पत्रकारः भीड़-भाड़ में नहीं है ना..

आईपीएसः नह..नह घर में हैं..घर में हैं एकदम आराम से

पत्रकारः बोल रहे हैं कि… जो आशुतोष शेखर आया है. वो हमलोगों के फाइल (जाति) का है या क्षत्रीय है.

आईपीएसः हमको तो सुनने में आया है कि हमलोगों के फाइल का है.

पत्रकारः देखिए…हमको प्रभात बोले थे कि यह क्षत्रीय है…सुन लीजिए…उसके साथ जो एक-दू गो बॉडीगार्ड है वो सब बोल रहा है कि हमरा जात है. हमरा मामा वहां है…बहुत बड़ा गैस एजेंसी खोले हुए हैं, उनसे पुछवाए तो वो भी बोले कि…मतलब इसको कन्फर्म नहीं मानिए…वो बोले कि जो गांव रामपुरगेड़ा ये बता रहे हैं, वो राजपूत का गांव है. लेकिन एक भाजपा जिला अध्यक्ष शतेंद्र जी अपने आदमी बहुत करीबी हैं. उऩका साला कह रहा है, नहीं भैया वो तो पक्का अपना है…हम बोले कि अरे बुर्बक…हम कल प्रभात जी को बोले कि आप ही पता कीजिए…आपका बैचमेट है.

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आईपीएसः ई गिरिडीह में थे…वहां से टंडवा गए थे. हमको पता था कि अपना है. लेकिन बाद में हमको कन्फ्यूजन होने लगा. इसलिए अब इसको क्लियर करना जरूरी है.

पत्रकारः मान लीजिए प्रभात जी के बैच में…मान लीजिए आपके बैच में कौन-कौन इतना तो कम से कम आपको पता है. तो वो तो प्रभात जी के बैचमेट हैं…वो लोग बाल रहे हैं कि नहीं नहीं वो अपना नहीं है…यह कन्फर्म है. अब साथ में दोनों लोग ट्रेनिंग किए हैं, उनसे ज्यादा कोई नहीं ना जानेगा.

आईपीएसः प्रभात को हम यही बोले…प्रभात गया ना ज्वाइन किया तो हम एक बात बोले कि एसएसपी का सिटी एसपी बनकर मत रहिएगा वहां पर जमशेदपुर में…

पत्रकारः एकदम ठीक बोले

आईपीएसः आप इस राज्य के सिटी एसपी हैं…जमशेदपुर के ग्रामीण एसपी हैं… प्रशांत वहां बहुत अच्छा काम कर रहा है. प्रशांत आनंद है ना…लेकिन एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस अपने से नहीं करता है. रात-रात भर जगता है और लेकर जाकर क्रिमिनल सबको एसएसपी के हवाले कर देता है. मीडिया से बात नहीं…कुछ नहीं…हम तो बोले कि ये तो डीएसपी से भी गया-गुजरा काम है.

पत्रकारः हां….तो आप छोड़ दीजिए जैप में चले जाइए…

आईपीएसः तो हम बोले कि ये चीज नहीं सीखना है. ये सब जितना अभी एसएसपी बना हुआ है…धनबाद का या जमशेदपुर का सब लोग 600-800 रैंक वाला है. सब..ये चीज जान लीजिए…600-800 जिसमें हमारा लोग (जाति के लोग) सिलेक्ट नहीं होता है…उसमें ये लोग एसपी और एसएसपी बना हुआ है.

पत्रकारः ठीक बोले…एकदम सही बात है…

आईपीएसः और आप जो 90 रैंक 95 रैंक 88 रैंक 111 रैंक लेकर हैं यहां पर…हम बोले कि नहीं रहना तो नहीं रहना है…जो करना है, करना है…प्रशांत जबकि ब्राह्मण है. पंडित जी है…ई वाला काम नहीं करना है.

पत्रकारः टारगेट दूसरा चीज है ही नहीं…

आईपीएसः वही हम बोले आपके पास चार ही पत्रकार आता है…उसको बताइए…लेकिन लाकर पकड़ कर एसएसपी को मत दे दीजिए भाई…

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पत्रकारः हमारा कहने का मतलब है…कि ईनामी क्रीमिनल पकड़ाएगा तो वो घाटशिला में ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कीजिएगा तो फर्स्ट पेज में छपेगा.

आईपीएसः बस…बस…बस…

पत्रकारः और बाइक पकड़िएगा तो वो तो सात नंबर पेज पर छपबे करेगा…

आईपीएसः तो बोले…प्रशांत को सब चीज लाकर ये पकड़कर दे देते हैं…कोई मीडिया वाला फोन भी करता है तो वो बोलता है आप एसएसपी से सीनियर से बात कर लीजिए…ई काम..सीनियर से लड़ना नहीं है लेकिन….

पत्रकारः डीआईजी साकेत सिंह बुलाकर हड़काए अंशुमान को… बोले… तुम नहीं समझते हो डीआईजी लिख देगा…अरे …… डीआईजी लिख देगा तो …

आईपीएसः लिख देगा तो कौन चीज हो जाएगा. लिख देने से क्या हो जाएगा.

पत्रकारः रविकांत धान…लक्ष्मण बाबू से सर्टिफिकेट लिया…आईजी मुरारी लाल मीणा से सीआर भी नहीं लिखवाए…ना कमिश्नर से लिखवाए…तो भी डीआईजी बन गए सबसे पहले…मने दोनों से वो अपना एसीआर भी नहीं लिखवाए…ऐसा थोड़ी है कि डीआईजी…अरे जिस कैडर से तुम आए हो….तो तुम चोर हो और हम ईमानदार हैं. तो हम एक आदमी (न्यूज विंग से जुड़े पत्रकार) को बोल दिए… न्यूज विंग से जुड़े पत्रकार को हम बोले कि भाई आपलोग पेपर में छापते थे लक्ष्मण सिंह के बारे में…अब हमको समझ में आ रहा है कि आपलोग लक्ष्मण सिंह के बारे में नहीं छापते थे…आप लोग भूमिहार में बारे में छापते थे. हम बोले इसके बारे में क्या है हम बोले कि ये तो आपका मित्र है, ना भाई है ना छोटा, ये तो दारोगा से भी गिरा हुआ है. भाई सीबीआई से चार्टशीटेड आदमी को आर्म लाइसेंस दिलवा दिया…आउट सोर्सिंग वाला के साथ बैठकर खाना खाता है. ये तो लक्ष्मण सिंह नहीं करते थे किसी के साथ. लक्ष्मण सिंह के साथ कोई बैठ नहीं सकता था…कोई चीज किसी से शेयर नहीं करता था… लेकिन तंग आप लोग इसलिए करते थे बड़े अखबार में राजपूत चीफ एडीटर था और आप झारखंड का क्राइम रिपोर्टर थे. तो ऊ बोले कि न..न..न.. यार तुम ऐसा बोलते हो… तो हम बोले कि न ई बात को फील कीजिए…नोट कीजिए…और हमलोग का भी समय आएगा तो हमलोग ऐसा करेंगे. लेकिन हमलोग को करने का मन तो करता है…लेकिन फिर लगता है कि ऐसा नहीं हो पाएगा…हमलोग ऐसा नहीं करेंगे…माने ई तो घिना दिया है एकदम…घिना दिया है.

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आईपीएसः लेकिन ये तो जा रहे हैं ना वहां से.

पत्रकारः हां…लेकिन जाएगा तो वहां कुछ नहीं है क्या… वहां जाएगा को अखिलेश का मदद करेगा…वहां उसी से खाली मंथली लेगा…देखिए एसएसपी और सिटी एसपी नहीं बताएगा…मान लिए बागबेड़ा थानेदार बिष्टुपुर इंस्पेक्टर को बोलेगा सुनो जी उस केस में क्या हुआ जिसमें अखिलेश सिंह वाला है जरा बताओ….

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आईपीएसः यही तो होता ही है…आईपीएस के एसीआर से कुछ होता है क्या…

पत्रकारः अभी तो और नहीं हो रहा है कुछ

आईपीएसः कुछ नहीं होता सर…कुछ नहीं होता है…

पत्रकारः व्यवस्था आपका ठीक रहा…ऊपर से सब ठीक रहा तो वो आपका एसीआर लिखेगा कि आप उसका एसीआर लिखिएगा…अनिल पालटा यहां एसपी हुआ करते थे…लक्ष्मण सिंह एडिशनल एसपी थे. तो उनको तो आईजी, डीआईजी डीजी खुदे जानता था लक्ष्मण बाबू को…लालू आता था तो …. पलटवा को पूछबे नहीं करता था और लक्ष्मण बाबू को कुछो नहीं करता था…खली बुलाकर कंधवा पर हाथ रख दिया… दूसरा दिन पेपर में वहीं फोटो छप जाता था कि लालू आए कान में क्या बतियाए. एडिशनल एसपी से पता नहीं चला…और सब लोग को टेंशन हो जाता था उसी में…ये तो उसका तरीका था कि लक्ष्मण सिंह के कंधा पर हाथ रख देना है ताकि मार्केट में लोग चर्चा करें. केबी सिंह डीआईजी थे तो मिलने नहीं जाते थे अनिल पालटा…क्या करेगा आपलोगों को डीआईजी. दिक्कत उनको है जिनको दुकान खोलकर रखना है. जिसका दुकान नहीं है उसको कोई दिक्कत नहीं है. और आपका तो मकान यहां है इसलिए आपको क्या दिक्कत है…. हा हा हा हा हा….आपका दुकान तो कभी होगा ही नहीं क्योंकि आपका तो पर्मानेंट मकान है. झारखंड के मिट्टी का दर्द जो आपको होगा वो साकेत सिंह और किसी को नहीं ना होगा…

आईपीएसः ये भी यहां पूरा छटपट मारते हैं…

पत्रकारः ये तो मारेगा ना…डबल बी राज है बाबा जी का…

आईपीएसः लेकिन यहां कुछो नहीं कर पाएगा

पत्रकारः कुछ भी नहीं चलेगा..अच्छा क्या चलेगा वो सब तो कामना कर के जाता है ना…कि हम जहां जाए वहां 100 नहीं 200 परसेंट चोर एसपी रहे…साथे खिचड़ी और खीर खाए..सब वहां उल्टा हो गया…मीया जी खूब करेगा…

आईपीएसः हां वो तो एकदम एकतरफा कर देता है…वो दंगा भी करवा देता है…

पत्रकारः बताइए आप वहां ऐसा-ऐसा आदमी को…आप वहां अंशुमान को देते. अगर सरकार को काम लेना था तो अंशुमान को देकर देखता…लेकिन अब जात तो नहीं ना बदल सकता है..क्या कीजिएगा जब जात पर ही ये होगा…कोनो राज में जब जाते देखकर करेगा तो ठीक है…मौका हमलोगों का भी आएगा…गलत हुआ है…बहुत गलत हुआ है…देखिए आपकी मर्जी आप सिमडेगा दे दीजिए…लोहरदगा दे दीजिए…एसपी को काम है…अरे हम जानते हैं कि पाकुड़ शैलेंद्र बर्णवाल के लिए बुक है.

 

आईपीएसः नया एसपी को नहीं मौका दीजिएगा..तो आपका जो है ना कहां से आएगा गुड गवर्नेंस…

पत्रकारः वो जमशेदपुर रेल में क्या करेगा…जमशेदपुर रेल में तो कोई काम ही नहीं है…

आईपीएसः नया एसपी को नहीं मौका दीजिएगा…हमारे समय में रथ जो है अलग-अलग नियम निकालता था…(गाली गलौज) रथवा अलग-अलग नियम निकालता था…

 

पत्रकारः मिया को कर दिया था और आपको

आईपीएसः बस..बस..बस…आपको तो सब मालूमे है…उस समय बोलता था कि ट्रेनिंग दो साल का करेंगे हर एसपी जैसा हटा वैसे नियम बदल गया…यहां पर तो ये सब चीज जो है ना…

पत्रकारः अच्छा क्या कीजिएगा…ई लोग का चलती है तो चल रहा है…बताइए ना अब जूनियर यानि 2010 बैच के अफसर को एसपी बनाना…

आईपीएसः वहीं तो पूरा गाली-गलौज किए थे, हम फोन लगा के और क्या… पूरा गाली गलौज उस दिन लगा कि…मतलब अथॉरिटी को इतना गाली दिए ना फोने पर…हम बोले जो रिकॉर्ड करना है कर लीजिए और जो उखाड़ना है उखाड़ लीजिए…

पत्रकारः का करेगा…कौन चीज करेगा…

आईपीएसः आप कौन चीज हैं…आप ना पोस्टिंग ना कुछ…जो एक डेकोरम है. आप वो भी नहीं कुछ कर सकते हैं तो आप क्या उखाड़िएगा…जो उखाड़ना है उखाड़ लीजिए…

पत्रकारः तब आपको नमस्ते…गुडमॉर्निंग और गुडइवनिंग का करना है…

आईपीएसः वो टर्म जो आपलोगों की शादी तय हो गयी थी…उनके एसपी रहते हुए ना…जैसे सरकार बदली तो गवर्नर बदला…तो ट्रांस्फर हुआ…हम बैठे हुए थे रामकुमार कुमार बाबू बैठे हुए थे…तो यही बात लक्ष्मण बाबू, बीडी राम को बोले ना…कि सर यही आएंगे अब डबल स्टार लगा कर आएंगे…तो वो बोले कि सुनो…सुनो ना बात कुछ दूसरा है…तो लक्ष्मण बाबू बोले कि क्या दूसरा है…आप मेरा जिम्मा ले लिए थे…कि मेरा सबकुछ ठीक है…ना तो आपसे मेरा कम खूंटा थोड़ी है…लेकिन जो जात के नाम पर कि हम भूमिहार हैं इसलिए गलत है तो सर ठीक है आप भी चिंता कर लीजिएगा अपना…कहकर फोनवा काट दिए बोकारो से…

आईपीएसः अंशुमान कुछ बोल रहे थे क्या…

पत्रकारः नह बेचारे…देखिए…थोड़ा सा डेमोरलाइज लगता है तो पीठ ठोक कर भेजे..

आईपीएसः इनके बैच का जितना था चाहे देखिए इनके बाद वाला बैच को भी कमांडेंट बना दिया है…

पत्रकारः बताइए कमांडेंट बना दिया…प्रशांत को भी आप कहीं स्वतंत्र प्रभार आप दे देते…जब आप जेनरल ही करना था तो…अब जो उन्हीं के बैच का हुरदीप है…वो दो रुपया से लेकर तीन रुपया तक लेता है…वहीं अंशुमान बोलते हैं कि देखिए आप भूमिहार है तो इसका क्या मतलब है…डीआईजी बोला तुम्हारा दिमाग जो है वो (पत्रकार) Pollute कर दिया है…तो हमसे बोले तो हम बोले कि रुकिए हम न्यूज छापते हैं…आज भी छापे हुए हैं…एक सीनियर आईपीएस अफसर का नाम लेकर कहा गया है कि उन्होंने कहा कि सीबीआई में जाने का सपना जिंदगी में पूरा नहीं होने देंगे.

..वो लोग अभी अभियोजन कोषांग में है ना…वो रेजी डुंगडुंग ये सब…हम तो बोले कल रंजीत प्रसाद से बात हो रही थी….आप रंजीत प्रसाद गुप्ता लिखा कीजिए..आपके बारे में लगता है कन्फ्यूजन है… हेमंत टोप्पो बैठल थे…फोनवा धरा दिए…ए गो वही ना बच गए अब क्या…

आईपीएसः सही तो आदमी भी तो एकदम मिलनसार हैं…कोई दिक्कत नहीं है…मस्त आदमी हैं…

पत्रकारः हम बोले कि रघुवर दास के पास जाइए और बोलिए कि सर हम गुप्ते हैं सर…हम प्रसाद वाला दूसरा नहीं है…और हम ओरीजनल तेली हैं…तो हेमंत टोप्पो बोले कि सही है बात तो ठीक ही बोलते हैं…कुछ खरचा करिये तो हम फर्स्ट पेज में छाप देते हैं…कि रंजीत प्रसाद नहीं बल्कि रंजीत प्रसाद गुप्ता हैं…उन्होंने अपना नाम चेंज कर लिया है…तो रंजीत प्रसाद बोले कि हमरा रिजाइन कराने का सारा व्यवस्था आप करा रहे हैं…हम बोले कि सर अभी मुभमेंट ऑर्डर निकला है…सीधा जाइए सीएम हाउस में और बोलिए कि क्या चच्चा एक गो हमी बच गए हैं ना…मदन लाल का नहीं ही होगा…जाकर सरकार को धरिए सीधे…

आईपीएसः ऊ तो अपना अलग जुगाड़ किए हुए हैं…ये जहां जाते हैं एके बार में वर्दी का बटम भी अगर खुला है नो तो एक ही बार में 10-15 लोगों को सस्पेंड कर देते हैं…और सबसे पैसा लेकर रीलिज कर देते हैं.

पत्रकारः रंजीत बाबू को हम बोले कि मुभमेंट ऑर्डर रुका है…साकेत बाबू को एसटीएफ भेज दीजिए और आप चले जाइए वहां ना तो आप अपना जगह पर ले आइए………….. इसके बाद जाति को लेकर कई तरह की बातें की गयी.

आईपीएसः लेकिन नया आईपीएस सबको जगह देना चाहिए था…

पत्रकारः कौन देगा…एक सूत्र काम कर रहा है गुप्ता और बर्णवाल…बनिया को लाना है सब जगह…दूसरा बी यानि पंडित को लाना है…तो तीसरा के बारे में सोच कौन रहा है…आपको हटाना ही था तो सिमडेगा हटाते तीन साल हो गया बेचारा का…तीन रुपया तो किशोर कौशल लेता था, उसको आप रामगढ़ दे दिए…क्या करेगा जरा आप बताइए…ठीक है मैच का आनंद लीजिए..

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Averon

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