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मोदीराज में निवेश 14 वर्षों के न्‍यूनतम स्‍तर पर

यदि देश में निवेश की यह हालत है तो मोदीजी से पूछा जाना चाहिए कि आपकी साढ़े चार साल की सैकड़ों विदेश यात्राओं में जो हजारों करोड़ रुपये फूंक दिए गए, उनका हासिल क्या है?

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Girish Malviya

खबर आ रही है कि मोदीराज में निवेश पिछले 14 वर्षों के सबसे न्‍यूनतम स्‍तर तक पहुंच गया है, दिसंबर तिमाही (वित्‍त वर्ष 2018-19) में निवेश को लेकर नई परियोजनाओं में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. यह आंकड़े सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनोमी (CMIE) ने जारी किए हैं. यह बेहद हैरत की बात है, क्योंकि हमें यही बताया जाता है कि विदेशों में हमारा डंका बज रहा है और विदेशी  कंपनियां हमारे देश में अपने प्रोजेक्ट लगाने को मरे जा रही हैं.

यदि देश में निवेश की यह हालत है तो मोदीजी से पूछा जाना चाहिए कि आपकी साढ़े चार साल की सैकड़ों विदेश यात्राओं में जो हजारों करोड़ रुपये फूंक दिए गए, उनका हासिल क्या है?… आपके मेक इन इंडिया का क्या हुआ?… सच तो यह है कि मेक इन इंडिया ने छोटे-मोटे स्तर पर काम किया है, लेकिन इसका कोई बड़ा असर नहीं हुआ है !

जाने-माने अर्थशास्त्री मोहन गुरुस्वामी ने पिछले साल बिल्कुल सही कहा था कि ‘मेक इन इंडिया मोदी सरकार के बाकी प्रोजेक्ट्स की तरह है – जिसमें सारा ध्यान बढ़ा-चढ़ा कर बोलने पर है.’ विदेशी निवेश के नाम पर सिर्फ बड़ी-बड़ी घोषणाएं हुई हैं, जमीन पर कोई प्रोजेक्ट कार्यान्वित होते दिखें नहीं और अब तो यह हालत है कि घोषणा होनी भी बन्द हो गयी हैं और इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि इस महीने होने वाले वाइब्रेंट गुजरात इन्वेस्टर समिट में इस बार ब्रिटेन ने भी शामिल होने से इनकार कर दिया है.

ब्रिटेन के अधिकारियों से जब इस समिट में शामिल न होने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा, “हम 2015 और 2017 में समिट में शामिल हुए थे. हमने उसमें जितना पैसा लगाया, उतना हमारा आउटकम नहीं निकला. इसलिए उसने राज्य के नेतृत्व वाले इस शो-पीस कार्यक्रम से हटने का फैसला किया है. अमेरिका पहले ही वाइब्रेंट गुजरात में शामिल होने को मना कर चुका है.

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं )

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