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जांच में पता चला कि मेनहर्ट अयोग्य है, लेकिन उसे योग्य ठहरा कर उसका तकनीकी लिफाफा खोला गया Technical Evaluation में भी गड़बड़ी-15

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Saryu Roy

तकनीकी परीक्षण कोषांग: तकनीकी क्षमता की जांच-

तकनीकी परीक्षण कोषांग ने निविदा के तकनीकी प्रस्ताव का बारीकी से जांच किया है और निष्कर्ष पर पहुंचा है कि इसने पक्षपात कर मेनहर्ट को सर्वोत्कृष्ट अंक दिया गया है. इसके अनुसार M/s Burchill Partners Pvt. Ltd. को अयोग्य ठहराने के पश्चात तकनीकी उपसमिति द्वारा शेष तीनों फर्मों का Technical evaluation दिनांक 28.09.05 को किया गया है.

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  1. निविदा के कंडिका 5 एवं 6 के अनुसार Technical evaluation हेतु

निम्न Criteria वर्णित है :-

  1. साथ ही RFP की कंडिका 5.7 में वर्णित है कि 100 Points में से 75 Points

से कम तकनीकी डलेीश प्राप्त करने वाले प्रस्ताव को अयोग्य करार किया जायेगा. तकनीकी समिति द्वारा किये गये तकनीकी मूल्यांकन में RPF में निविदा प्रावधानों के Items को SubItems के रूप में बांट कर मूल्यांकन किया गया है. उदाहरणस्वरुप Specific experience of the consultant मद हेतु RPF में वर्णित 10 marks को दो भागों में विभाजित किया गया है, Similar Project हेतु 5 marks एवं Annual Turnover हेतु 5 marks. इस विभक्ति के उपरांत भी Similar Project हेतु 5 marks को निम्न रूप से खण्डित किया गया है :-

(i) For 3 or more qualifying projects – 5 marks

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(ii) For 2 or more qualifying projects – 3 marks

(iii) For 1 or more qualifying projects – 1 Marks

उसी तरह Annual Turnover के मामले में भी 5 marks को निम्न रूप से विखण्डित किया गया है :-

(i) For Av. Turnover more than 50 cr. – 5 marks

(ii) For Av. Turnover of 45 to 50 cr – 3 marks

(iii) For Av. Turnover of 40 to 45 cr. – 1 marks

  1. RPF में Qualification and competence of key staff for the assignment हेतु 50 marks प्रावधानित था. उपसमिति के मूल्यांकन में इस मद को भी विभिन्न रूप से खण्डित करते हुए सर्वप्रथम Design Team हेतु 30 marks एवं Supervision Team हेतु 20 marks का प्रावधान किया गया है. Design Team के 30 marks को भी खण्डित कर, Criteria निम्न रूप से निर्धारित किया गया है :-

(i) Team Leader (Sewerage System & Drainage Expert) 9 marks

(ii) S.S. Design Expert 3.5 marks

(iii) S.Treatment Expert 3.5 marks

(iv) Drainage Expert 3.5 marks

(v) Structural Engineer 3.5 marks

(vi) Quality Surveyer 1 marks

(vii) Re settlement & Rehabilitation Expert 1.5 marks

(viii) Environmental Expert 1.5 marks

(ix) Electrical Engineer 1.5 marks

(x) Mechanical Engineer 1.5 marks

कुल 30 marks

  1. Approach & Methodology हेतु कर्णांकित 35 marks का भी उप-वर्गीकरण निम्न रूप से उपसमिति स्तर पर वर्णित है :-

(i) Understanding & Objectives 10 marks

(ii) Quality of Methodology 15 marks

(iii) Work Programme 5 marks

(iv) Proposal Presentation 5 marks

कुल – 35 marks

उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि Technical evaluation हेतु छोटे-छोटे Sub

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Parameters में विभाजित कर evaluation की प्रक्रिया अपनायी गयी है, जबकि Tender के RFP में प्रक्रिया का विस्तृत criteria/sub-criteria अंकित नहीं किया गया है. पारदर्शी Technical Evaluation प्रक्रिया अपनाये जाने हेतु विस्तृत Criteria/sub criteria का वर्णन RFP में किया जाना आवश्यक था. विदित हो कि Tender QBS पर आधारित था, जिसमें Technical Evaluation में Highest Marks पाने वाले Consultant का ही Financial bid खोले जाने का एवं उनसे rate negotiation का प्रावधान था.

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  1. तकनीकी परीक्षण कोषांग ने अपने प्रतिवेदन में निविदा की शर्तों के आधार पर

विभिन्न परामर्शियों को तकनीकी समिति द्वारा दिये गये अंकों में विसंगतियों

एवं पक्षपात को दर्शाया है जो निम्नवत है

(क) उपसमिति के सदस्यों के द्वारा समिति द्वारा निर्धारित Sub parameters के आधार पर भी marks देने में एकरूपता नहीं बरता गया है. उदाहरण- स्वरूप उपसमिति के सदस्य श्री उमेश गुप्ता द्वारा Tahal Consultant के Team Leader श्री J.K. Sharma को Post graduate qualification रहने full marks 20% 20% के विरूद्ध मात्र 15% marks दिया गया है, जबकि उन्हीं के द्वारा M/s Meinhardt के श्री J.P. Nigam, Team Leader को Post Graduate degree हेतु 20% marks दिया गया है.

(ख) उसी तरह उनके द्वारा M/s Tahal Consulting Engineers Ltd. के Sewarage System Design Engineer  श्री P.K. Kapla को P.G. degree हेतु 15% marks जबकि M/s Meinhardt श्री S. Kumar को P.G.

degree हेतु 20% marks दिया गया है.

(ग) उपसमिति के अन्य सदस्य श्री केपी शर्मा द्वारा Curriculam vitae हेतु प्रावधानित 50 marks में evaluation sheet में विभिन्न Sub parameters हेतु अलग-अलग प्रतिशत marks वर्णित नहीं है, बल्कि Sub Parameter के लिए एकमुश्त marks दिया गया है, जिससे मूल्यांकन में दिये गये marks का स्पष्ट आधार दृष्टिगोचर नहीं होता है. इस तरह इनके मूल्यांकन प्रक्रिया में भी पारदर्शिता की कमी है, जबकि इनके द्वारा ही M/s Meinhardt को सबसे अधिक 92.66 अंक दिये गये.

  1. तकनीकी उपसमिति के तकनीकी मूल्यांकन, जिसमें M/s Meinhardt को अधिकतम अंक दिया गया था. लेकिन मुख्य समिति द्वारा भी दिनांक 05.10.05109 को सहमति दे दी गयी. तकनीकी उपसमिति के तकनीकी मूल्यांकन के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि समिति के अध्यक्ष, श्री शशि रंजन कुमार द्वारा तीनों फर्मों को दिये गये अंक में बहुत कम भिन्नता है, जबकि श्री केपी शर्मा एवं श्री उमेश गुप्ता द्वारा दिये गये तीनों फर्मों के अंक में अत्याधिक भिन्नता है. यह मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है.

सार संक्षेप :

1)    तकनीकी परीक्षण कोषांग ने निविदा मूल्यांकन के लिए नगर विकास विभाग द्वारा गठित तकनीकी उपसमिति द्वारा किये गये तकनीकी मूल्यांकन की जांच किया तो इसमें किया गया पक्षपात उजागर हो गया.

2)    जांच में पता चला कि मेनहर्ट को अयोग्य होने के बावजूद योग्य ठहरा दिया गया और उसका तकनीकी लिफाफा खोल दिया गया, तकनीकी मूल्यांकन में भी इसके पक्ष में पक्षपात किया गया और इसे अधिक अंक दिया गया.

3)    तकनीकी परीक्षण कोषांग ने जांच में पाया कि नगर विकास विभाग की तकनीकी उपसमिति ने मनमाने ढंग से तकनीकी क्षमता जांचने के लिए निविदा में निर्धारित अंकों के पैमाना में परिवर्तन किया है. निविदा में निर्धारित खण्डों को कई उपखण्डों में अपने स्तर पर मनमाना ढंग से विभाजित कर मेनहर्ट के पक्ष में अधिक अंक दे दिया है. जबकि मूल निविदा में ऐसा विभाजन नहीं था.

4)    तकनीकी परीक्षण कोषांग की जांच में साबित हो गया कि नगर विकास विभाग की तकनीकी उपसमिति द्वारा एक ही प्रकार की योग्यता धारण करनेवाले सभी तकनीकी विशेषज्ञों को समान अंक नहीं देकर मेनहर्ट के विशेषज्ञों को ज्यादा अंक दिया गया है, ताकि मेनहर्ट तकनीकी मूल्यांकन में पहले स्थान पर आ जाये.

5)    निगरानी के तकनीकी परीक्षण कोषांग ने आश्चर्य व्यक्त किया है कि नगर विकास विभाग द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ने भी तकनीकी उपसमिति के मूल्यांकन को स्वीकार कर लिया है और इनके द्वारा की गयी अनियमितता और पक्षपात को नजरअंदाज कर दिया है.

डिस्क्लेमर- (लेखक झारखंड के पूर्व मंत्री रह चुके हैं. यहां प्रकाशित विचार उनके निजी हैं. इसका न्यूज विंग से कोई संबंध नहीं है.)

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