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9.99 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष कमाल खान के खिलाफ भी जांच की अनुशंसा

धनबाद के 96 स्कूलों के अलावा नौ अन्य पर प्राथमिकी, जिला कल्याण पदाधिकारी के लिए अनुमति मांगी गयी

धनबाद : वर्ष 2019-20 के दौरान अल्पसंख्यक छात्रों को दी गयी प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति में हुए घोटाले में जिला प्रशासन ने 96 स्कूलों के अलावा नौ अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है. जिला कल्याण पदाधिकारी दयानंद दुबे के खिलाफ प्राथमिकी व विभागीय कार्यवाही की राज्य सरकार से अनुमति मांगी गयी है.

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बिलिंग क्लर्क व कंप्यूटर ऑपरेटर सेवा समाप्त करने की अनुशंसा

घोटाले की अंतरिम जांच रिपोर्ट के आधार पर बुधवार को जिला प्रशासन ने यह कार्रवाई की है. प्रशासन ने प्रथमदृष्टया इसे 9.99 करोड़ रुपये का घोटाला माना है. जांच टीम ने इस घोटाले में जिले के अधिकारियों के साथ-साथ राज्य स्तर के अधिकारियों की भूमिका की जांच की अनुशंसा की है. राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष व भाजपा नेता कमाल खान के खिलाफ भी जांच की अनुशंसा की गयी है. एडीएम की अध्यक्षता वाली जांच टीम ने कल्याण विभाग के लिपिक व बिलिंग क्लर्क विनोद पासवान को बर्खास्त करने और विभाग के अनुबंध कर्मी व कंप्यूटर ऑपरेटर अजय कुमार मंडल की सेवा समाप्त करने की भी अनुशंसा की है.

झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के सचिव शक के घेरे में

जांच के दौरान झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के सचिव इरफान खान का भी नाम सामने आया है. इरफान मुख्य साजिशकर्ता सादिक खान उर्फ शाहिद से लंबे समय से संपर्क थे. इरफान पर आरोप है कि उन्होंने स्कूलों के संबंध में सादिक के गिरोह को सूचनाएं दी हैं. जांच टीम ने इनके खिलाफ विस्तृत जांच की अनुशंसा की है. इनका नाम का उल्लेख पूछताछ के दौरान स्कूल संचालकों ने किया था.

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यू-डायस के बगैर स्कूलों के नाम पर किया भुगतान

जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. कई स्कूलों के नाम पर भी भुगतान कर दिया गया है. जिनका यू-डायस कोड नहीं था. जिले के 486 स्कूलों के 13,605 छात्रों को वर्ष 2019-20 के दौरान यह छात्रवृत्ति दी गयी थी. इन छात्रों को कुल 11,55,16,808 रुपये छात्रवृत्ति के रूप में दी गयी थी. इसमें से 96 स्कूलों के नाम भुगतान की गयी 9.99 करोड़ रुपये की राशि को गलत पाया है.

यह राशि इन नामजद लोगों ने साजिश कर फर्जी छात्रों को भुगतान करवा दिया है. जिन फर्जी छात्रों को यह छात्रवृत्ति भुगतान की गयी है. उनके अकाउंट के संबंध में अभी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं पायी है. हालांकि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आयी है कि ऐसे छात्रों का बैंक अकाउंट आधार से लिंक नहीं था.

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उनके आधार नंबर तक फर्जी थे. जांच टीम ने इन छात्रों के बैंक खातों के संबंध में जिला व राज्य कल्याण विभाग के साथ केंद्र सरकार के नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल से जानकारी मांगी है. लेकिन यह अभी तक उपलब्ध नहीं करायी गयी है.

कमेटी ने एक सप्ताह में दी जांच रिपोर्ट

उपायुक्त उमाशंकर सिंह ने चार नवंबर को एडीएम लॉ एंड ऑर्डर चंदन कुमार के नेतृत्व में इस घोटाले की अंतरिम जांच के लिए कमेटी गठित की थी. टीम ने एक सप्ताह में प्रारंभिक जांच कर अपनी अंतरिम रिपोर्ट बुधवार को उपायुक्त को सौंप दी.

बुधवार की शाम धनबाद परिषदन में आयोजित प्रेस वर्ता के दौरान एडीएम लॉ एंड ऑर्डर ने मीडिया के समक्ष जांच के निष्कर्षों की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस घोटाले को बड़े पैमाने पर सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया.

इन लोगों पर दर्ज हुई प्राथमिकी

अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर कल्याण विभाग के लिपिक बिनोद पासवान, विभाग के कंप्यूटर अजय कुमार मंडल, गुलाम मुस्तफा (वकील), झरीलाल महतो (प्राचार्य जीबीएम पब्लिक स्कूल, तेतुलमारी), प्रताप जसवार (प्राचार्य जीनियस पब्लिक स्कूल गोविंदपुर), कलीम अख्तर (प्राचार्य गुरुकुल विद्या निकेतन भौंरा 19), नीलोफर परवीन (दलाल), संतोष विश्वकर्मा (दलाल) और अब्दुल हमीद (दलाल) को नामजद अभियुक्त बनाया गया है.

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सादिक खान है घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता

सादिक खान उर्फ शाहिद को इस घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है. इनके गिरोह में 20 से 25 सदस्य होने की बात सामने आयी है. जांच रिपोर्ट में गिरोह के कुछ सदस्यों सबीना, सुहैल, नाजनीन, तौशिफ, ताविस आदि के नाम भी दिये गये हैं. यह पूरा गिरोह चतरा का है. इस गिरोह ने राज्य में साहिबगंज, रांची, लोहरदगा, बोकारो के साथ-साथ बिहार के कुछ जिलों में इस तरह के घोटाले को अंजाम दिया है.

उपायुक्त के निर्देश पर 96 स्कूलों के खिलाफ उसी थाना क्षेत्र में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है, जिस थाना क्षेत्र में वे स्थित हैं. सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ जिले के सभी प्रखंड एवं झरिया अंचल में संबंधित बीडीओ एवं अंचल अधिकारी द्वारा प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है.

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