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111 सेव लाइफ अस्पताल प्रकरण में तीसरे दिन भी जारी रही जांच

Ranchi: सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर-2 स्थित 111 सेव लाइफ अस्पताल प्रकरण की जांच तीसरे दिन भी जारी रही. शुक्रवार को अस्पताल की कुव्यवस्था और प्रबंधक की लापरवाही से कोरोना संक्रमित दो-दो मरीजों की मौत की शिकायत करनेवाली मृतक के परिजनों को जांच टीम ने पूछताछ के लिए गम्हरिया सीएचसी बुलाया. वहां दोनों के परिजनों से घंटों टीम ने पूछताछ की और दोनों के परिजनों का बयान दर्ज किया.

गौरतलब है कि बीते शनिवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के मौखिक आदेश के बाद जब सरायकेला जिले के प्रभारी सीएस तीन सदस्यों के साथ जांच करने 111 सेव लाइफ अस्पताल पहुंचे थे तो अस्पताल के प्रबंधक डॉ ओपी आनंद ने जांच कमेटी को जांच में सहयोग नहीं किया था. साथ ही एक बयान में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री को अपशब्द कहे थे.

इस पर संज्ञान लेते हुए जिले के एसपी ने प्रभारी सिविल सर्जन के बयान के आधार पर आरआइटी थाना पुलिस द्वारा डॉ आनंद के खिलाफ कांड संख्या 68/21 के तहत धारा 304, 323, 340, 341, 506 और 188 के तहत मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी गई है.

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उधर जिले के उपायुक्त ने भी इस मामले पर संज्ञान लेते हुए एडीसी के नेतृत्व में आठ सदस्यीय टीम से 72 घंटो के भीतर अस्पताल प्रबंधन और प्रबंधक के खिलाफ मिली शिकायतों की जांच कर रिपोर्ट तलब किया है, जहां बुधवार से ही टीम पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है.

शुक्रवार को टीम द्वारा अस्पताल पर लापवाही का आरोप लगाकर संक्रमित मरीजों की मौत के लिए जिम्मेदार मानने वाले मृतक के परिजनों को बुलाकर पूछताछ की गयी.

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इनमें से आदित्यपुर रैन बसेरा निवासी स्व सुनील कुमार झा की दोनों बेटियों ज्योत्सना झा एवं निधि झा और कदमा भाटिया बस्ती निवासी मृतका पुष्पा कुमारी की दो बेटियां प्रीति कुमारी एवं प्रिया कुमारी शामिल रहीं.

चारों ने ही जांच टीम के समक्ष अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए इलाज के नाम पर धन दोहन, और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया. चारों ने जांच टीम को पूरे घटनाक्रम से जुड़े दस्तावेज भी सौंपे.

वैसे दोनों मृतकों के परिजनों ने अस्पताल के प्रबंधक डॉ ओपी आनंद, उनकी पत्नी सरिता आनंद और जूनियर डॉ रक्षित आनंद के खिलाफ एक ही तरह के आरोप लगाये. मतलब साफ है कि अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों एवं उनके परिजनों के साथ अमानवीय बर्ताव के साथ धन दोहन का काम किया जा रहा था.

वैसे इसका भेद तब खुला जब परिजन लाखों खर्च करने के बाद भी अपने मरीज को बचा न सके. मृतक पुष्पा कुमारी और सुनील कुमार झा के परिजन अस्पताल की कुव्यवस्था की व्यथा सुनाते-सुनाते जांच अधिकारियों के समक्ष रो पड़े.

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