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INTUC : तो क्या AICC की नजर में ददई और त्रिपाठी गुट की नहीं है कोई अहमियत!

Nitesh Ojha

Ranchi : झारखंड कांग्रेस में मजदूर संगठन इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) की राजनीति हमेशा विवादों में रही है. दरअसल राज्य में पिछले कई सालों से इंटक के दो गुट सक्रिय रहे हैं. यह गुट दिवंगत नेता राजेंद्र प्रसाद सिंह (जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जी संजीवा रेड्डी हैं) और ददई गुट के नाम से चर्चित रहा है.

इस बीच हाल ही में राज्य में इंटक के एक तीसरे गुट ने भी दस्तक दी है. जिसके कार्यकारी अध्यक्ष पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी बने हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) की नजर में तीनों गुट में कौन मान्यता रखता है. अगर कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) से जुड़े सदस्यों की सूची से देखें, तो इसमें डॉ. जी संजीवा रेड्डी गुट को ही राष्ट्रीय कांग्रेस मान्यता देती है.

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 स्पेशल इनवाइटीज में फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष होते हैं शामिल

CWC के 4 प्रमुख अंग हैं. इसमें वर्किंग कमिटी के सदस्य के साथ परमानेंट इनवाइटीज, स्पेशल इनवाइटीज और महासचिव सदस्य शामिल हैं. स्पेशल इनवाइटीज में वहीं सदस्य शामिल होते हैं, जो कांग्रेस के फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. ऐसे ऑर्गेनाइजेशन में सेवा दल, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस और इंटक प्रमुखता से शामिल हैं.

जाहिर है कि जब AICC की शीर्ष निकाय CWC में इन ऑर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्षों को मान्यता देती है, तो फिर विवाद कैसा. जिस तरह युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवासन को मान्यता देती है, उसी तरह जी संजीव रेड्ड़ी को स्पेशल इनवाइटीज के तौर पर शामिल करना उन्हें मान्यता देने जैसा ही है. 

 राष्ट्रीय अध्यक्ष भी फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन को देती हैं मान्यता: जयमंगल

जी संजीवा रेड्डी से जुड़े झारखंड इंटक के वरीय कार्यकारी अध्यक्ष सह राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ (राकोमसं) के अध्यक्ष जगमंगल सिंह उर्फ अनुप सिंह का कहना है, कि फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते जी संजीवा रेड्डी ही हमेशा वर्किंग कमिटी में स्पेशल इनवाइटीज में शामिल होते रहे हैं.

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राष्ट्रीय अध्यक्षा सोनिया गांधी भी कांग्रेस के इसी फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन इंटक को मान्यता देती हैं. उन्होंने कहा कि स्टेट बॉडी के जो अध्य़क्ष हैं, उन्हें भी प्रेस रिलीज जारी कर बोलना चाहिए कि राष्ट्रीय अध्यक्षा जिसे मान्यता देती है, उसकी वे जिम्मेवारी लें.

अनुप सिंह ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव से भी अपील है कि जिन्हें सोनिया गांधी ने वर्किंग कमिटी में शामिल किया है, उसे ही तरजीह दें.

मामला अभी भी दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है: कमल दुबे

ददई गुट इंटक के राष्ट्रीय सचिव कमल दुबे ने बताया है कि न तो कांग्रेस इंटक का मालिक होता है, न ही इंटक कांग्रेस का फ्रंटियल ऑर्गेनाइजेशन है. मामला अभी भी दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है. राज्य में तीसरा कोई गुट ही नहीं है. ऐसे में कोल इंडिया भी दोनों में से किसी गुट को कभी नहीं बुलाती है.

जहां तक जी. संजीवा रेड्डी की बात है, तो वे शुरू से ही वर्किंग कमिटी में शामिल होते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनके गुट को मान्यता मिली है. केवल नाम रख लेने से मान्यता नहीं मिल जाती है. मान्यता तो कोर्ट देगा. संजीवा रेड्डी सेटिंग करके सदस्य हो जायें, तो बात अलग है.

मामले में हाइकमान ही लेता है अंतिम निर्णयः त्रिपाठी

हाल फिलहाल गठित इंटक के तीसरे गुट के अध्यक्ष केएन त्रिपाठी का कहना है कि CWC में जी संजीवा रेड्डी को पहली बार सदस्य नहीं बनाया गया है. पार्टी के वो वरिष्ठ नेता हैं. जब किसी मामले में पार्टी के कुछ लोग आपसी मतभेद रखते हैं, तो हाइकमान ही इसपर निर्णय लेता है. पूर्व मंत्री का कहना है कि गुट के मान्यता को लेकर मामला कोर्ट में लंबित है. जबतक कोई निर्णय नहीं आता है, तबतक सभी गुट कांग्रेस पार्टी के लिए ही काम कर रहे हैं.

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