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इंटरव्यू: सेवाभाव से काम करेंगे डॉक्टर तो उन्हें मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट की जरुरत ही नहीं पड़ेगी

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Ranchi: जब डॉक्टर मरीजों की हित में काम नहीं करते हैं, मरीज के इलाज में डॉक्टरों द्वारा अनदेखी की जाती है. तब परिजन आक्रोशित होते हैं और फिर कुछ बुरा माहौल बनता है. यदि डॉक्टर मरीजों की हित में काम करेंगे और सेवा की भावना से काम करेंगे तो किसी एक्ट की जरुरत ही नहीं पड़ेगी. मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट पर न्यूजविंग से बात करते हुए डॉ राजेश प्रसाद ने ये बातें कही. उन्होंने कहा कि मेडिकल प्रोटेक्शन जैसा एक्ट मरीजों के लिए अहितकर साबित होंगे. ऐसे एक्ट लागू होने से वैसे डॉक्टर या हॉस्पिटल जो पहले से ही मरीज और परिजनों के साथ दुर्व्यव्यवहार करते रहे हैं उनका मनोबल और बढ़ेगा. डॉक्टरों के मन में भी यह बात आ जायेगी कि अब कोई कुछ नहीं कर सकता क्योंकि उनके पास एक्ट है.

डॉ राजेश ने बताया कि कई बार बिलिंग बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े हॉस्पिटल मरीजों को आईसीसीयू भर्ती रखते हैं. मरीज के मरने के बाद भी उसे जीवित बता कर बिलिंग करते रहते हैं. मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट के बजाय इस प्रकार के कानून बनना चाहिए जिससे डॉक्टर मरीज के हित में काम करें. सही समय पर सही जानकारी डॉक्टर मरीज के परिजन को देते रहें.

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अन्य कई बिंदुओं पर भी डॉ राजेश ने अपने विचार शेयर किए पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश

सवाल: एलोपैथी, होमियोंपैथी और आर्युवेदिक उपचार में कौन ज्यादा बेहतर है?

जवाब: समय के आधार पर देखें तो एलोपैथी उपचार को बेहतर माना जाता है. इससे जल्दी आराम मिल जाता है, लेकिन, इसमें कुछ ऐसे ड्रग्स आते हैं तो जो हमारे सोचने की क्षमता को कम कर देते हैं. ज्यादातर एक्सीडेंटल केस भी जो होते है उनमें सिर्फ और सिर्फ एलोपैथी ही कारगर होता है. अगर किसी को आंतरिक बिमारियां होती है उन्हें एलोपैथी के माध्यम से जड़ से ठीक नहीं किया जा सकता है. आर्युवेद और होमियोपैथ धीमा उपचार है, लेकिन यह बिमारी को जड़ से ठीक कर देता है. वह बिमारी दुबार लौट कर नहीं आती.

सवाल: क्या एलोपैथ और होमियोपैथ उपचार के कोई साइड इफेक्ट भी हैं?

जवाब: जी बिल्कुल, एलोपैथ की दवाईयों से साइड इफेक्ट तो होता ही है. एलोपैथ में कोई भी ऐसा टेबलेट्स या इंजेक्शन नहीं है जिनका साइड इफेक्ट नहीं है. होमियोपैथ में भी कुछ दवाईयां ऐसी हैं, जिनका साइड इफेक्ट होता है.

सवाल: बदलते मौसम में सेहत पर क्या असर पड़ता है और इसका ख्याल कैसे रखा जाये?

जवाब: मौसम के अनुसार लोगों को इसकी तैयारी करनी चाहिए. जाड़ा, गर्मी बरसात को देखते हुए इससे बचने की तैयारी पहले कर लेनी चाहिए. जाड़े में ब्रेन हैंब्रेज का खतरा बना रहता है. ठंढ में आर्टरी सिकुड़ जाता है और ब्लस्ट कर जाती है. रक्त का बहाव सही से नहीं होने के कारण ऐसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इससे बचने के सबसे सरल उपाय यही है कि गर्म कपड़े पहन कर रखें. अचानक से खुलें में न जायें और खान-पान में भी गर्म चीजों का ही प्रयोग करें.

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